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​ट्रेन के आखिरी डिब्बे पर X का निशान न हो तो क्या होगा?

क्या है ‘X’ का मतलब… ट्रेन से सफर करते हुए या प्लेटफॉर्म पर खड़े होकर आपने कभी न कभी आखिरी डिब्बे के पीछे बना बड़ा ‘X’ जरूर देखा होगा. कई लोग इसे सिर्फ डिजाइन समझ लेते हैं, लेकिन यह निशान ट्रेन की सुरक्षा से जुड़ा एक जरूरी संकेत है. रेल मंत्रालय ने खुद सोशल मीडिया पोस्ट में बताया था कि यह अक्षर ट्रेन के आखिरी कोच की पहचान है. इससे रेलवे कर्मचारियों को पुष्टि मिल जाती है कि ट्रेन पूरी की पूरी गुजर गई है और कोई डिब्बा पीछे नहीं छूटा. यह निशान किसी खास ट्रेन या रूट तक सीमित नहीं है और सभी ट्रेनों में इस्तेमाल होता है. फोटो: Pexels

​ट्रेन के आखिरी डिब्बे पर X का निशान न हो तो क्या होगा?

LV बोर्ड क्या होता है… X के साथ आखिरी डिब्बे पर एक छोटा बोर्ड भी लगा होता है, जिस पर ‘LV’ लिखा होता है. इसका मतलब है ‘लास्ट व्हीकल’ यानी ट्रेन का आखिरी वाहन. यह बोर्ड आमतौर पर पीले रंग पर काले अक्षरों में होता है. गेटमैन, सिग्नलमैन और केबिन में तैनात कर्मचारी इसे देखकर जांचते हैं कि ट्रेन अपने पूरे रूप में गुजरी है या नहीं. फोटो: Pexels

रात में क्या होता है… अंधेरे में X या बोर्ड साफ नहीं दिखते, इसलिए आखिरी डिब्बे पर लाल रंग की चमकती टेल लैंप लगाई जाती है. रेलवे के अनुसंधान संगठन RDSO की तकनीकी स्पेसिफिकेशन के मुताबिक हर ट्रेन के आखिरी वाहन पर एक LED आधारित फ्लैशिंग टेल लैंप होना जरूरी है. पहले इसमें तेल का लैंप इस्तेमाल होता था, जो अक्सर कमजोर या गायब मिलता था. अब बैटरी वाली LED लैंप ने उसकी जगह ले ली है. फोटो: Pexels

ये निशान न दिखे तो क्या होता है… मान लीजिए ट्रेन किसी स्टेशन या गेट से गुजरी और आखिरी डिब्बे पर न X दिखा, न LV बोर्ड, न लाल लैंप. तब स्टाफ को शक हो जाता है कि ट्रेन के पीछे के डिब्बे कहीं कपलिंग टूटने से अलग हो गए हैं. ऐसे में सिग्नल और स्टेशन स्टाफ आगेपीछे के स्टेशनों को अलर्ट करता है. यह इसलिए जरूरी है कि अलग हुए डिब्बे पटरी पर रह जाएं तो पीछे से आने वाली ट्रेन से टक्कर का खतरा बन सकता है. फोटो: Pexels

यह व्यवस्था क्यों जरूरी है… भारतीय रेल नेटवर्क पर हर दिन हजारों ट्रेनें चलती हैं. स्टेशन मास्टर हर ट्रेन के साथ चलकर उसे देख नहीं सकता, इसलिए आखिरी डिब्बे का यह संकेत उसकी आंख का काम करता है. X, LV बोर्ड और टेल लैंप मिलकर एक तरह की ‘पूर्ण यात्रा की मुहर’ बन जाते हैं. अगली बार जब ट्रेन गुजरे तो आखिरी डिब्बे पर नजर डालिए. वहां बना यह छोटा सा निशान सैकड़ों यात्रियों की सुरक्षा की एक अहम कड़ी है. फोटो: Pexels

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