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जब फिल्म में दिखाने के लिए असली मोती और सोने की मूर्ति पर अड़े निर्देशक के. आसिफ, बीच में रोक दी गई थी ‘मुग़ल-ए-आज़म’ की शूटिंग

Satya Report: फिल्म ‘मुग़लएआज़म’ को भारतीय सिनेमा की सबसे शानदार फिल्मों में से एक माना जाता है, जिसे डायरेक्टर के. आसिफ ने लगभग एक दशक में बनाई थी। यह एक पीरियड फिल्म थी, जिसकी कहानी सम्राट अकबर के समय पर आधारित एक नाटक से ली गई थी। आज भी यह फिल्म भारत में बनने वाली पीरियड फिल्मों के लिए एक मिसाल मानी जाती है। अब हाल ही में एक इंटरव्यू में बॉलीवुड के अनुभवी स्क्रीनराइटर कमलेश पांडे ने फिल्म के बनने के बारे में बात की।

जब फिल्म में दिखाने के लिए असली मोती और सोने की मूर्ति पर अड़े निर्देशक के. आसिफ, बीच में रोक दी गई थी ‘मुग़ल-ए-आज़म’ की शूटिंग
जब फिल्म में दिखाने के लिए असली मोती और सोने की मूर्ति पर अड़े निर्देशक के. आसिफ, बीच में रोक दी गई थी ‘मुग़ल-ए-आज़म’ की शूटिंग

उन्होंने बताया कि कैसे निर्देशक आसिफ ने सेट पर असली मोती और सोने की मूर्तियों की मांग की थी, लेकिन उन्हें प्रोड्यूसर शापूरजी पल्लोनजी मिस्त्री से कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। ऐसे में जब तक उन्हें यह नहीं मिली तो आसिफ ने शूटिंग रोक दी थी। दरअसल,  फिल्म के एक खास सीन में दिखाया गया है कि जब सलीम 14 साल बाद युद्ध से लौटते हैं, तो उनकी मां जोधा बाई उनका भव्य स्वागत करती हैं।

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फिल्म में असली मोती चाहते थे के. आसिफ

इस सीन को लेकर के. आसिफ की सोच बहुत अलग थी। वह चाहते थे कि जोधा बाई फूलों की जगह सलीम पर मोती बरसाएं, ताकि सीन और भी शाही और खास लगे। इसके लिए बहुत सारे मोतियों की जरूरत थी। जब इस सीन की शूटिंग होने वाली थी, तब आसिफ ने साफ कहा कि उन्हें असली मोती ही चाहिए। लेकिन फिल्म के प्रोड्यूसर शापूरजी पल्लोनजी मिस्त्री ने इसका विरोध किया, क्योंकि फिल्म वैसे भी ब्लैक एंड व्हाइट में शूट हो रही थी, इसलिए असली मोतियों पर इतना खर्च करना उन्हें सही नहीं लगा।

कमलेश ने ‘द राव्या सरदा शो’ में बताया, “आसिफ इस बात पर अड़े थे कि मोती असली ही होने चाहिए। शापूरजी पालोनजी मिस्त्री ने उन्हें कहा कि हद हो गई यार। यह एक ब्लैकएंडव्हाइट मूवी है। किसे पता चलेगा कि मोती असली हैं या नकली? लेकिन आसिफ ने कहा कि मुझे पता चल जाएगा।” आसिफ अपनी बात से पीछे नहीं हटे और न ही शापूरजी, और इस तरह शूटिंग रुक गई।

कमलेश ने आगे कहा, “आसिफ ने असली मोतियों के बिना शूट करने से मना कर दिया। शापूरजी भी पीछे नहीं हटे। शूट कुछ दिनों के लिए रुक गया।” उन्होंने बताया कि फिर इस घटना के कुछ दिनों बाद उन्होंने ईद का त्योहार मनाया और क्योंकि शापूरजी आसिफ से उम्र में बड़े थे, इसलिए उन्होंने डायरेक्टर को ईदी दी। कमलेश ने कहा, “आसिफ ने शापूरजी से पूछा कि यह कितनी है, तो शापूरजी ने बताया कि 1 लाख रुपये। फिर आसिफ ने कहा कि मैं एक रुपया रखूंगा। बाकी तुम ले लो और उससे असली मोती खरीद लो।”

के. आसिफ ने सोने की मूर्ति को लेकर रोक दी थी शूटिंग

ऐसा ही एक और किस्सा सेट पर सोने की मूर्ति को लेकर भी हुआ। के. आसिफ चाहते थे कि फिल्म में जोधा बाई के मंदिर के लिए भगवान कृष्ण की असली सोने की मूर्ति रखी जाए। जब प्रोड्यूसर शापूरजी पल्लोनजी मिस्त्री ने पूछा कि ब्लैक एंड व्हाइट फिल्म में किसी को कैसे पता चलेगा कि मूर्ति असली है या नकली, तो आसिफ ने कहा कि मुझे फर्क नहीं पड़ता कि दूसरों को पता चले या नहीं, लेकिन मुझे पता होगा कि यह नकली है। मैं जोधा बाई के मंदिर में नकली मूर्ति नहीं रख सकता। इस बार भी आसिफ की ही बात मानी गई।

करण जौहर ने सुनाया था किस्सा

इससे पहले करण जौहर ने भी एक ऐसा ही किस्सा बताया था, जो उन्हें उनके पिता यश जौहर से पता चला था। यश जौहर ‘मुग़लएआज़म’ के सेट पर मौजूद थे। फिल्म कंपेनियन से बात करते हुए करण ने बताया कि एक बार के. आसिफ ने शूटिंग तीन दिन के लिए रोक दी थी, क्योंकि वह चाहते थे कि एक तालाब में पानी की जगह इत्र भरा जाए।

करण के अनुसार, “मेरे पिता ने बताया था कि के. आसिफ ने शूटिंग रोक दी, क्योंकि उन्हें असली इत्र चाहिए था। वह चाहते थे कि जब मधुबाला उस सीन में हों, तो उन्हें इत्र की खुशबू महसूस हो, जिससे उनके चेहरे पर असली और खूबसूरत एक्सप्रेशन आए।” आसिफ ने तब तक शूटिंग शुरू नहीं की, जब तक तालाब में इत्र नहीं भरा गया। प्रोडक्शन टीम के लिए यह मुश्किल था, लेकिन आखिरकार तीन दिन बाद तालाब को इत्र से भरा गया और तब शूटिंग शुरू हुई।

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