
दहेज में चार पहिया गाड़ी की मांग पूरी न होने पर पत्नी की प्रताड़ना और मृत्यु के मामले में न्यायालय ने अभियुक्त पति महीपाल को 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, साक्ष्यों के अभाव में सह-अभियुक्त ससुर ॠषिपाल और देवर जीतपाल को सभी आरोपों से दोषमुक्त किया गया है।
रजपुरा के गांव सैंडोरा निवासी नरेशपाल ने 12 दिसंबर 2019 को दहेज हत्या में पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। जिसमें बताया कि उसने अपनी बेटी रेखा का विवाह चार वर्ष पूर्व रजपुरा निवासी महीपाल के साथ किया था।
विवाह के बाद से ही ससुराल पक्ष के लोग अतिरिक्त दहेज में बुलेरो गाड़ी की मांग को लेकर रेखा को शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे। 12 दिसंबर 2019 को मारपीट के दौरान आई चोटों के कारण रेखा की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी।
तहरीर के आधार पर पति महिपाल, सास गुड्डी, जेठ यशपाल, देवर जीतपाल, ससुर ऋषिपाल के खिलाफ दहेज हत्या की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई।
पुलिस ने विवेचना में पति महिपाल, ससुर ऋषिपाल और देवर जीतपाल को दोषी माना और आरोप पत्र दाखिल किया। एडीजीसी हरिओम प्रकाश उर्फ हरीश सैनी ने बताया कि इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश गोपालजी की अदालत में हुई।
न्यायालय ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और अभियोजन की दलीलों के आधार पर अभियुक्त महीपाल को दहेज हत्या का दोषी मानते हुए 10 वर्ष के कारावास और चार हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। जबकि धारा 302/34 हत्या के आरोप से न्यायालय ने अभियुक्त को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।



