
दुनिया में चोरी के कई अजीबोगरीब किस्से सुनने को मिलते हैं, लेकिन कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो लोगों को हैरानी में डाल देती हैं। आमतौर पर चोर पैसे, गहने या कीमती सामान चुराते हैं, मगर एक ऐसा शख्स भी था जिसने सिर्फ किताबों की चोरी करके पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। यह कहानी है Stephen Blumberg की, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा “बुक थीफ” कहा जाता है।
19 टन दुर्लभ किताबों की थी चोरी
अमेरिका में रहने वाला स्टीफन ब्लमबर्ग किताबों का इतना बड़ा दीवाना था कि उसने 1970 से 1990 के बीच सैकड़ों लाइब्रेरियों को निशाना बनाया। बताया जाता है कि उसने अमेरिका और कनाडा की 268 लाइब्रेरियों से करीब 23,600 दुर्लभ किताबें और ऐतिहासिक दस्तावेज चुरा लिए थे। इनका कुल वजन लगभग 19 टन माना गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि उसने इन किताबों को बेचकर पैसा कमाने की कोशिश कभी नहीं की। उसने अपने घर को ही एक विशाल निजी लाइब्रेरी में बदल दिया था, जहां हर कमरे में किताबों के ढेर लगे रहते थे।
चोरी का अनोखा तरीका
ब्लमबर्ग बेहद चालाकी से चोरी करता था। वह पहले दिन के समय लाइब्रेरी जाकर वहां की सुरक्षा व्यवस्था, दरवाजों और रास्तों को ध्यान से देखता था। इसके बाद रात में वह बेहद सुनियोजित तरीके से अंदर घुसकर दुर्लभ किताबें चुरा लेता। कई बार वह नकली पहचान पत्रों का इस्तेमाल करता और लाइब्रेरी स्टाफ की चाबियों तक पहुंच बना लेता था, कहा जाता है कि बचपन से ही वह मानसिक रूप से अलग-थलग रहने लगा था। उसे किताबों और ऐतिहासिक दस्तावेजों से असाधारण लगाव था। वह मानता था कि कई संस्थाएं इन दुर्लभ किताबों की सही देखभाल नहीं कर रहीं, इसलिए उन्हें “सुरक्षित” रखना जरूरी है।
ब्लमबर्ग के करीबी सहयोगी ने दी पुलिस को जानकारी
हर रहस्य की तरह यह कहानी भी ज्यादा समय तक छिपी नहीं रह सकी। ब्लमबर्ग के करीबी सहयोगी Kenneth Rhodes ने आखिरकार उसकी जानकारी अधिकारियों को दे दी। इसके बाद 20 मार्च 1990 को जब एफबीआई ने उसके घर पर छापा मारा, तो वहां का दृश्य देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। घर का हर हिस्सा दुर्लभ किताबों से भरा हुआ था।
71 महीने की हुई सजा
आखिरकार 1991 में अदालत ने उसे दोषी ठहराया और 71 महीने की जेल की सजा सुनाई। आज भी स्टीफन ब्लमबर्ग का नाम इतिहास में एक ऐसे व्यक्ति के रूप में दर्ज है, जिसने किताबों के प्रति अपने जुनून को अपराध की हद तक पहुंचा दिया।



