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नीम करोली बाबा की समाधि कहां है, कैसे विलीन हुए ‘महाराज जी’? जानें गुप्त सच.

नीम करोली बाबा की समाधि कहां है, कैसे विलीन हुए ‘महाराज जी’? जानें गुप्त सच.

 यह जानना वाकई में रोचक है कि नीम करौली बाबा की समाधि कैंची धाम में नहीं है. हालिया फिल्म ‘हनुमान अंश’ से चर्चा में आए महाराज जी की वास्तविक महासमाधि कहां है, यह बहुत लोगों के लिए आज भी एक रहस्य है. आइए जानते हैं, कहां है यह महासमाधि, जहां अब भी ‘महाराज जी’ की मौजूदगी का अहसास होता है?

Neem Karoli Baba Samadhi: बहुत ये लोग ये मानते हैं कि कैंची धाम में ही नीम करोली बाबा की समाधि है. ऐसा मानने वाले लोग वाकई भ्रम में हैं। एप्पल के स्टीव जॉब्स, फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग और महान क्रिकेटर विराट कोहली जैसी नामचीन हस्तियों के स्पिरिचुअल गुरु रहे नीम करोली बाबा के चमत्कारों से पूरी दुनिया वाकिफ है. आजकल उनके जीवन पर बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने धूम मचा रखी है. आइए जानते हैं, ‘महाराज जी’ कहे जाने वाले नीम करोली बाबा पंचतत्व में कहां विलीन हुए थे और उनकी वास्तविक समाधि कहां है? कुछ लोग कहते हैं, इस पावन स्थल पर पहुंचने पर अब भी बाबा के होने का एहसास होता है.

यहां है नीम करोली बाबा की समाधि

वाकई में इस बात से बहुत लोग अनजान हैं कि नीम करोली बाबा की असली समाधि कैंची धाम में नहीं है. महाराज जी की मुख्य समाधि उत्तर प्रदेश के पवित्र धाम वृंदावन में है. यह भी कैंची धाम की तरह एक आश्रम है, जो मथुरा रोड के पास परिक्रमा मार्ग पर स्थित है. इसके भीतर बाबा का भव्य महासमाधि मंदिर बना हुआ है. आपको बता दें कि असल में कैंची धाम महाराज जी का तपोस्थल रहा है.

कैंची धाम को लेकर भ्रम क्यों?

कैंची धाम उत्तराखंड में नैनीताल के पास नीम करोली बाबा का सबसे प्रसिद्ध आश्रम है. इसे ‘महाराज जी’ ने स्वयं 1964 में स्थापित किया था. हर साल यहां 15 जून को एक विशाल मेला लगता है. संभवतः इसी पॉपुलैरिटी के कारण दुनिया भर के श्रद्धालु और लोग अनजाने में कैंची धाम को ‘महाराज जी’ की समाधि स्थल समझ लेते हैं.

ऐसे विलीन हुए थे ‘महाराज जी’

कहते हैं, ‘महाराज जी’ ने विदा लेने से पहले ही संकेत दे दिया था. उनका महासमाधि में विलीन होगा को सामान्य मृत्यु नहीं, बल्कि एक उच्च कोटि के संत द्वारा अपनी इच्छा से शरीर त्यागने की अलौकिक घटना थी. कहते हैं, उन्होंने दिन और स्थान खुद चुना था, जिसे लोग आज भी नहीं जानते है. बाबा ने अपने महाप्रयाण का दिन अनंत चतुर्दशी और स्थान पावन भूमि वृद्धावन को चुना था. आपको बता दें कि नीम करोली बाबा ने 11 सितंबर, 1073 की रात में महानिर्वाण किया था.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है

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