E20 फ्यूल विवाद के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, E20 फ्यूल E10 कारों के पार्ट में रबर के हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकता है. रिपोर्ट के सर्वे का हिस्सा तेल विपणन कंपनियों और ऑटोमोबाइल कंपनियों के साथ साझा किया गया था. ARAI की E20 रिपोर्ट को लागू करने की सिफारिश की गई थी.

इस रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया था कि E10कम्पैटिबल गाड़ियों में E20 फ्यूल का इस्तेमाल करने से फ्यूलसिस्टम के रबर वाले हिस्सों जैसे होज, गैस्केट, सील और Oरिंग में खराबी देखी गई. इस अध्ययन को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है.
E20 फ्यूल से धातु के हिस्सों पर कोई बुरा असर नहीं
सरकार और गाड़ी बनाने वाली कंपनियों के लिए यह रिपोर्ट एक आधार रही है. इस रिपोर्ट में कहा गया था कि इन पार्ट के रबर वाले हिस्सों को बदलने की जरूरत पड़ सकती है. जिन गाड़ियों पर टेस्ट किया गया था, उनमें E20 का वाहन के धातु के हिस्सों पर कोई बुरा असर नहीं पाया गया. E10कम्पैटिबल गाड़ियों में E20 से होने वाला उत्सर्जन कानूनी सीमा के भीतर था.
E20 पेट्रोल से एक भी कार में कोई खराबी नहीं गडकरी
देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को कहा कि एथनॉल मिश्रित ईंधन के कारण एक भी कार में कोई समस्या नहीं आई है. E20 पेट्रोल को लेकर कई गलत अफवाहें फैलाई जा रही हैं. कल यानी मंगलवार को ‘विकसित भारत’ समिट में गडकरी ने कहा, ‘अगर E20 पेट्रोल से किसी कार में खराबी आई है, तो सिर्फ एक कार का नाम बता दो’. उन्होंने कहा कि अब तक E20 पेट्रोल के कारण किसी भी वाहन में कोई तकनीकी समस्या का ठोस प्रमाण नहीं मिला है.
गडकरी ने बताया कि भारत को पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करनी होगी. भारत हर साल कच्चे तेल के आयात पर 22 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है. अगर एथनॉल जैसे वैकल्पिक ईंधन का ज्यादा इस्तेमाल किया जाए, तो विदेशी मुद्रा बचेगी और प्रदूषण भी कम होगा.
E20 क्या है और इस पर क्यों छिड़ा है विवाद?
E20 मतलब 20 फीसदी एथनॉल और 80 फीसदी पेट्रोल. भारत सरकार पहले E10 चला रही थी. अब पूरे देश में E20 को अनिवार्य रूप से लागू कर दिया गया है. इस पर विवाद इस बात को लेकर है कि 2023 से पहले बनी ज्यादातर गाड़ियां E10 के लिए बनी हैं. E20 में ज्यादा एथनॉल होने से रबर के पार्ट्स खराब हो सकते हैं. ARAI की एक रिपोर्ट में भी यही बात कही गई थी, जो अभी सार्वजनिक नहीं की गई है. कई लोग शिकायत कर रहे हैं कि E20 भरने के बाद गाड़ी की माइलेज 26% तक घट गई है. मतलब एक लीटर पेट्रोल से पहले जितना रन नहीं मिल रहा. वहीं, सरकार का कहना है कि अब तक किसी गाड़ी में बड़ी खराबी का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है.



