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रील देखते-देखते खाली हो गया बैंक’ अकाउंट, एक क्लिक और उड़ गई जिंदगीभर की कमाई.

पाली. अगर आप भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक या इंस्टाग्राम पर रील्स देखने के आदी हैं, तो अब संभल जाइए, क्योंकि आपकी रील्स देखने की यही बेफ़िक्र आदत आपके बैंक अकाउंट को एक ही झटके में खाली कर सकती है. सोशल मीडिया पर मिलने वाले लुभावने ऑफर और एक अनजान क्लिक आपको पाई-पाई के लिए मोहताज बना सकता है. राजस्थान के पाली ज़िले के सादड़ी कस्बे में साइबर ठगी का एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक महिला इंस्टाग्राम पर रील देखते-देखते साइबर अपराधियों के जाल में फंस गई और ऑनलाइन ठगी की शिकार हो गई.

पाली जिले के सादड़ी थाना क्षेत्र की रहने वाली पीड़िता ने पुलिस में दर्ज कराई अपनी शिकायत में बताया कि वह अपने मोबाइल में इंस्टाग्राम पर रील्स देख रही थी. इसी दौरान रील में एक बेहद लुभावना ऑफर का विज्ञापन दिखाई दिया. पीड़िता ने जैसे ही उस लिंक पर क्लिक किया, उसके बैंक खाते से रकम उड़ गई. राजस्थान में इस तरह के मामलों में तेज़ी से इज़ाफ़ा हो रहा है, जहां साइबर अपराधी सोशल मीडिया रील्स को अपना नया हथियार बनाकर आम लोगों की गाढ़ी कमाई पर डाका डाल रहे हैं.

कैसे काम करता है यह नया ठगी का खेल?

साइबर एक्सपर्ट अंकित चौधरी ने इस नए साइबर फ्रॉड के तरीके के बारे में विस्तार से जानकारी दी है, उन्होंने बताया कि आजकल इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जो रील्स और विज्ञापन दिखाए जाते हैं, उनके साथ ‘मालवेयर’ (खतरनाक वायरस) के लिंक छिपे होते हैं. जब कोई यूज़र इन लुभावने रील्स के नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करता है, तो बैकग्राउंड में व्हाट्सएप या ब्राउज़र के ज़रिए एक ‘APK’ एंड्रॉइड पैकेज किट) फाइल खुद-ब-खुद आपके फोन में डाउनलोड हो जाती है. यह APK फाइल अक्सर सस्ते कपड़ों, सामानों या फोटो फाइल के नाम का छलावा देकर आपके फोन में इंस्टॉल करवा दी जाती है.

APK फाइल से फोन का पूरा कंट्रोल ठगों के पास
साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, एक बार यह एपीके फाइल आपके फोन में डाउनलोड हो जाती है, तो यह साइबर क्रिमिनल्स को आपके मोबाइल का पूरा डेटा एक्सेस दे देती है. पर्सनल डेटा की चोरी: ठगों के पास आपके फोन के कॉन्टैक्ट्स, गैलरी के प्राइवेट फोटोज, वीडियोज और मैसेजेस का पूरा एक्सेस पहुंच जाता है. इस प्राइवेट डेटा के दम पर अपराधी लोगों को ब्लैकमेल करते हैं. आपके फोन में मौजूद फोनपे, गूगल पे या पेटीएम जैसे यूपीआई और बैंकिंग ऐप्स को हैक कर लिया जाता है.

ओटीपी (OTP) का ज़माना गया, क्रिमिनल्स हो गए हैं स्मार्ट
पहले के समय में साइबर ठग लोगों को कॉल करके ओटीपी मांगते थे, लेकिन अब लोग ओटीपी शेयर करने को लेकर जागरूक हो चुके हैं, इसलिए अपराधियों ने ठगी का तरीका भी अपडेट कर लिया है. अब उन्हें आपसे किसी ओटीपी की ज़रूरत नहीं पड़ती APK फाइल के ज़रिए वे आपके फोन के सभी मैसेजेस (जिसमें बैंक से आने वाले ओटीपी भी शामिल हैं) को खुद ही दूर बैठकर पढ़ लेते हैं और आपके खाते से पूरा पैसा साफ़ कर देते हैं.

लुभावने ऑफर और ‘सस्ते’ के चक्कर में फंस रहे लोग
रील्स स्क्रॉल करते समय अपराधियों का मुख्य मकसद होता है—यूज़र्स को किसी भी तरह लालच में फँसाना. इसके लिए रील्स के बीच ऐसे लुभावने विज्ञापन दिखाए जाते हैं. 5,000 रुपये का ब्रांडेड सामान सिर्फ 500 रुपये में देने का दावा. घर बैठे रील देखकर या लाइक करके रोज़ाना हज़ारों रुपये कमाने की स्कीम, स्क्रेच कार्ड से लग्जरी कार या आईफोन जीतने के झूठे वादे. आम लोग इतने सस्ते ऑफर देखकर बिना सोचे-समझे लिंक पर क्लिक कर देते हैं और ठगी का शिकार बन जाते हैं.

साइबर साइबर क्राइम से कैसे बचें? सावधानियां और सुरक्षा टिप्स
अंजान लिंक पर क्लिक न करें, रील्स या सोशल मीडिया पर दिखने वाले किसी भी संदिग्ध या आकर्षक लिंक पर क्लिक करने से बचें. पेज की प्रामाणिकता जांचें, किसी भी पेज या विज्ञापन पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता और समीक्षा ज़रूर देख लें. किसी भी थर्ड-पार्टी वेबसाइट से कोई भी एप्लिकेशन्स डाउनलोड न करें. हमेशा गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर का ही उपयोग करें. ध्यान रखें कि बाज़ार में कोई भी चीज़ अपनी वास्तविक कीमत से 90% सस्ती नहीं मिलती. ऐसा कोई भी ऑफर सिर्फ फ्रॉड का जरिया होता है.

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