
, सीतापुर, अमृत विचार: सीतापुर जनपद में अकेले डेढ़ वर्ष के भीतर 45 फर्जी शिक्षक बर्खास्त किये जा चुके हैं। पिछले दिनों एक बार फिर मिले मुन्ना भाईयों के मिलने से बीएसए ने गोपनीय जांच बिठा दी है। बीएसए का मानना है कि विभाग अब उन स्रोत और शातिरों की तलाश में है जो विभाग के भीतर लगातार फर्जीवाड़ा करने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसे में अन्य स्रोतों की भी मदद ली जा रही है।
दरअसल, शिक्षा विभाग में ये फर्जीवाड़ा वर्ष 2024 में 12,460 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया के बाद से आरंभ हुआ। फर्जीवाड़े की पहली कड़ी में सीतापुर जनपद में बबलू यादव, रंजना, अभिषेक कुमार, विनोद कुमार, मनोज कुमार, अरविंद कुमार, गोपाल सिंह, जीतेंद्र कुमार, राहुल कुमार, अकबर शाह, प्रदीप कुमार यादव, दिनेश कुमार यादव, प्रमोद कुमार, भूपेंद्र सिंह, सुनील कुमार और ओमवीर सिंह चिन्हित कर बर्खास्त किये गए। क्योंकि कोई फर्जी प्रमाण पत्रों के साथ शिक्षा विभाग में नियुक्ति पा चुकी था, कुछ भी ऐसे भी मिले, जिन्होंने दूसरे नियुक्ति के सहारे अपना पंजीयन करा लिया। बीएसए गोरखनाथ पटेल का कहना है कि सभी की बर्खास्तगी के बाद रिकवरी व अन्य विभागीय प्रक्रियाएं हो रही है। ये भी खंगाला जा रहा है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में किसकिस का हाथ है।
फिर कार्रवाई की जद में आए सात मुन्ना भाई
हाल दिनों में कार्रवाई की जद में कुसुमलता, मनीष सिंह, भूपेंद्र कुमार, पूजा और विवेक कुमार के अलावा मुरारी लाल रावत और जय नारायण सिंह आ गए।
तराई में हुई फर्जीवाड़े की डील
सूत्र बताते हैं कि सिधौली इलाके में रह रहे संतोष नामक युवक की तराई क्षेत्र में मजबूत पकड़ है। इसने प्रयागराज से जुड़े कुछ शातिरों के सहारे शिक्षकों के फर्जीवाड़े की पहली डील लखीमपुर और फिर पीलीभीत में की। डील का दूसरा पड़ाव दिल्ली और फिर प्रयागराज हुआ।
बर्खास्त फर्जी शिक्षकों के खंगाले जा रहे हैं रिकार्ड
जनपद के बेहटा में तैनात रहे हरियाणा के धर्मेंद्र सिंह, लखीमपुर खीरी की कविता, निजामाबाद की प्रमिला सिंह, आगरा के धर्मेंद्र कुमार सहित कुछ अन्य बर्खास्त फर्जी शिक्षकों के गोपनीय रिकार्ड और विभागीय दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है।
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