
यरुशलम: इजरायल के स्वतंत्रता दिवस से जुड़ी एक खास परंपरा दुनिया भर में चर्चा का विषय रहती है। इस दिन यरुशलम स्थित माउंट हर्जल पर 12 प्रतीकात्मक मशालें जलाई जाती हैं। यह समारोह सिर्फ आजादी के जश्न की शुरुआत नहीं माना जाता, बल्कि इजरायल के इतिहास, राष्ट्रीय एकता और उन लोगों के सम्मान से भी जुड़ा है जिन्होंने देश और समाज के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया है।
12 मशालें क्यों जलाई जाती हैं?
इजरायल के स्वतंत्रता दिवस समारोह में जलाई जाने वाली 12 मशालें प्राचीन इजरायल की 12 जनजातियों का प्रतीक मानी जाती हैं। इनका उद्देश्य देश के इतिहास और विभिन्न समुदायों की एकता को दर्शाना है।
यह परंपरा 1950 में शुरू हुई थी। मशाल प्रज्ज्वलन समारोह को इजरायल के राष्ट्रीय कैलेंडर में बेहद महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।
स्वतंत्रता दिवस की शुरुआत कैसे होती है?
इजरायल में स्वतंत्रता दिवस को योम हा’अत्समाउत कहा जाता है। इसका आयोजन हिब्रू कैलेंडर के अनुसार होता है, इसलिए ग्रेगोरियन कैलेंडर में इसकी तारीख हर साल बदलती रहती है।
स्वतंत्रता दिवस का समारोह योम हाजिकारोन यानी देश के लिए जान गंवाने वाले सैनिकों और आतंकवादी हमलों में मारे गए लोगों की स्मृति के दिन के बाद शुरू होता है। इसी बदलाव के दौरान माउंट हर्जल पर मशाल प्रज्ज्वलन समारोह आयोजित किया जाता है।
मशाल जलाने का सम्मान किसे मिलता है?
हर व्यक्ति को इस समारोह में मशाल जलाने का मौका नहीं मिलता। इसके लिए ऐसे लोगों का चयन किया जाता है जिन्होंने सामाजिक सेवा, शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति, कला, मानवता या दूसरे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया हो।
चुने गए लोग मंच पर आकर अपने संदेश देते हैं और फिर राष्ट्रीय सम्मान के साथ मशाल प्रज्ज्वलित करते हैं। इस वजह से यह सम्मान इजरायल में काफी प्रतिष्ठित माना जाता है।
इजरायल का स्वतंत्रता दिवस कब शुरू हुआ?
आधुनिक इजरायल के गठन की घोषणा 14 मई 1948 को डेविड बेन-गुरियन ने तेल अवीव में की थी। इसके बाद इजरायल और अरब देशों के बीच युद्ध शुरू हुआ।
इजरायल के स्वतंत्रता दिवस की तारीख हिब्रू कैलेंडर पर आधारित होने के कारण हर साल बदलती रहती है। इसलिए अंग्रेजी कैलेंडर में यह पर्व अलग-अलग तारीखों पर पड़ता है।
इजरायल के बनने की पृष्ठभूमि क्या थी?
आधुनिक इजरायल की स्थापना से पहले यह क्षेत्र ब्रिटिश शासन के अधीन ब्रिटिश मैंडेट फॉर फिलिस्तीन का हिस्सा था। 19वीं और 20वीं सदी में यहूदी राष्ट्र की स्थापना के समर्थन में जायोनिस्ट आंदोलन मजबूत हुआ।
द्वितीय विश्व युद्ध और होलोकॉस्ट के बाद यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और महत्वपूर्ण हो गया। 1947 में संयुक्त राष्ट्र ने फिलिस्तीन के क्षेत्र में अरब और यहूदी राज्यों के गठन की योजना प्रस्तावित की। इसके बाद घटनाक्रम तेजी से बदला और मई 1948 में इजरायल ने स्वतंत्रता की घोषणा की।
भारतीय पायलट को भी मिला था खास सम्मान
मूल खबर में भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को स्वतंत्रता दिवस के मशाल समारोह से जोड़कर विशेष निमंत्रण दिए जाने का उल्लेख किया गया है। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिए जाने की बात कही गई है।
हालांकि, ऐसे समसामयिक निमंत्रण और किसी व्यक्ति को दिए गए सम्मान से जुड़ी जानकारी को संबंधित आधिकारिक स्रोतों से अलग से सत्यापित करना जरूरी है।
कुल मिलाकर, इजरायल की 12 मशालों की परंपरा सिर्फ रोशनी का कार्यक्रम नहीं है। यह देश के ऐतिहासिक अतीत, 12 प्राचीन जनजातियों की प्रतीकात्मक स्मृति और आधुनिक इजरायल की राष्ट्रीय एकता से जुड़ा महत्वपूर्ण समारोह है।



