HealthIndiaTrending

आयुर्वेद में अंगूर और मुनक्का: को क्यों माना गया है खास? आयुर्वेदिक डॉक्टर से जानें 6 जरूरी फायदे’

आयुर्वेद में अंगूर और मुनक्का: को क्यों माना गया है खास? आयुर्वेदिक डॉक्टर से जानें 6 जरूरी फायदे’

भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और आयुर्वेद में डाइट को ही पहला औषधि ज्ञान माना गया है। फल-सब्जियों और सूखे मेवों के औषधीय गुणों का जिक्र करते समय महर्षि चरक और सुश्रुत से लेकर आधुनिक आयुर्वेदाचार्यों तक ने अंगूर और मुनक्का को खास स्थान दिया है। अक्सर लोग इन्हें केवल एक साधारण फल या स्वादिष्ट ड्राई फ्रूट मान लेते हैं, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार यह ‘द्राक्षा’ वर्ग का पौधा है जो शरीर के तीनों दोषों वात, पित्त और कफ को संतुलित करने की क्षमता रखता है। खासतौर पर ये पित्त शमन, पाचन तंत्र की मजबूती और रक्त शोधन (Blood Purification) में मुनक्का और अंगूर का नियमित सेवन बेहद प्रभावकारी माना जाता है।

आयुर्वेदिक डॉक्टर रूपाली जैन ने बताया आयुर्वेदिक ग्रंथों में अंगूर और मुनक्का का खासतौर पर उल्लेख किया गया है। काला अंगूर सुखाकर मुनक्का बनाया जाता है। आयुर्वेद में द्राक्ष को श्रेष्ठ फलों में शामिल किया गया है। इसे स्वाद में मीठा और कुछ हद तक कसैला और तासीर में ठंडा बताया गया है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि आयुर्वेद के मुताबिक मुनक्का और अंगूर का सेवन करने से सेहत को कौन कौन से फायदे होते हैं।

अंगूर और मुनक्का में मुख्य अंतर

अंगूर ताजा फल है और इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है; आयुर्वेद में इसे शीतल और ताजगी देने वाला माना जाता है। जबकि मुनक्का सूखा हुआ काला अंगूर का फल है, इसलिए इसमें पोषक तत्व और नेचुरल शुगर अधिक मात्रा में होती है।

अंगूर के आयुर्वेदिक फायदे

आयुर्वेद में अंगूर यानी द्राक्ष को मधुर, शीतल और शरीर को पोषण देने वाला फल माना गया है। पारंपरिक रूप से इसे पित्त और शरीर की गर्मी से जुड़ी परेशानियों में उपयोगी बताया जाता है। अंगूर का सेवन थकान, कमजोरी, ज्यादा प्यास, मुंह का सूखापन और शरीर में जलन जैसी समस्याओं में राहत देने वाला माना जाता है। आयुर्वेदिक दृष्टि से अंगूर को कब्ज और पाचन से जुड़ी परेशानी में भी उपयोगी माना जाता है। इसके अलावा इसे शरीर को पोषण देने और कमजोरी को दूर करने में बेहद असरदार माना गया है।

मुनक्का के आयुर्वेदिक फायदे

मुनक्का यानी बीज वाला सूखा अंगूर। मुनक्का को आयुर्वेद में पौष्टिक और शरीर को ताकत देने वाला माना जाता है। इसे खासतौर पर कमजोरी, थकान और शरीर में पोषण की कमी के दौरान डाइट में शामिल करने की सलाह दी जाती है। भिगोया हुआ मुनक्का पारंपरिक रूप से कब्ज में मददगार माना जाता है। आयुर्वेद के मुताबिक इसे रातभर पानी में भिगोकर सुबह इसका सेवन करें तो आपको फायदा होगा। मुनक्के को शरीर की गर्मी, प्यास और कमजोरी में भी उपयोगी बताया जाता है।

थकान और कमजोरी में असरदार है ये फल

मुनक्का और अंगूर का सेवन करने से शरीर को पोषण मिलता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसे कमजोरी और थकान में उपयोगी बताया गया है।

एनीमिया में भी है असरदार

मुनक्का हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद कर सकता है और इसे आयुर्वेद में रक्त धातु के लिए उपयोगी माना गया है। शरीर में हीमोग्लोबिन कम होने पर आयरन, विटामिन B12, फोलेट की कमी होने पर मुनक्का का सेवन करें आपको फायदा होगा।

शरीर को पोषण देने में मदद कर सकता है अंगूर

अंगूर और मुनक्का को शरीर की अलग-अलग धातुओं को पोषण देने वाला बताया गया है। इसमें विशेष रूप से मांस और शुक्र धातु का उल्लेख किया गया है। मुनक्का सूखे अंगूर का एक रूप है और इसमें प्राकृतिक शुगर, कार्बोहाइड्रेट और कुछ माइक्रोन्यूट्रिएंट्स होते हैं जो बॉडी को भरपूर पोषम देते हैं और बॉडी को हेल्दी रखते हैं।

वात-पित्त से जुड़ी समस्याओं में असरदार है ये फल

अंगूर और मुनक्का को वात और पित्त से जुड़े विकारों में उपयोगी बताया गया है। इसकी स्निग्ध और अपेक्षाकृत भारी प्रकृति को वात के रूखेपन से विपरीत माना गया है। शरीर में ज्यादा गर्मी, पेशाब में जलन, प्यास, एसिडिटी और जलन जैसी समस्याओं में अंगूर या मुनक्का का सेवन बेहद असरदार साबित होता है। खासतौर पर गर्म मौसम में इसे उपयोगी बताया गया है।

कब्ज और पेट साफ नहीं होता तो अंगूर खाएं

अंगूर और मुनक्का को मल त्याग में मदद करने वाला बताया गया है। इसमें मौजूद फाइबर और प्राकृतिक शुगर कुछ लोगों में मल को नरम करने और कब्ज से निजात दिलाने में मदद कर सकती हैं। अगर कब्ज लंबे समय से है, बार-बार होता है या इसके साथ खून, तेज पेट दर्द या वजन कम होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर से जांच कराएं।

यूरिन से जुड़ी समस्याओं में मुनक्का

बार-बार पेशाब आना, पेशाब में जलन, पेशाब का थोड़ा-थोड़ा आना और प्रोस्टेट से जुड़ी परेशानी में भी मुनक्का का सेवन करें।

मुनक्का का सेवन कैसे करें?

आयुर्वेद में ताजे और पके हुए अंगूर खाने की सलाह दी गई है। जब ताजा अंगूर उपलब्ध न हों, तो मुनक्का या किशमिश का इस्तेमाल किया जा सकता है। मुनक्का को रात में पानी से अच्छी तरह धोकर पानी में भिगोने और सुबह मुनक्का के साथ उसका पानी पीना सेहत के लिए फायदेमंद बताया गया है।

दस्त होने पर अंगूर और मुनक्का से करें परहेज

आयुर्वेद के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति को लूज मोशन हो रहे हैं तो उस समय मुनक्का या अंगूर का सेवन नहीं करना चाहिए। मुनक्का मल त्याग को बढ़ा सकता है। दस्त के दौरान शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है, इसलिए पर्याप्त तरल पदार्थ लेना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। मुनक्का में नेचुरल शुगर और कैलोरी होती है, इसलिए इसकी मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है। खासतौर पर डायबिटीज या ब्लड शुगर की समस्या वाले लोगों को सूखे फलों की मात्रा अपनी डाइट के अनुसार तय करनी चाहिए। साथ ही, किसी बीमारी के इलाज के लिए मुनक्का को डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

डिस्क्लेमर: मुनक्का किसी बीमारी का इलाज या दवा का विकल्प नहीं है। एनीमिया, लगातार कब्ज, पेशाब में जलन, ब्लीडिंग, अस्थमा, अल्सरेटिव कोलाइटिस या अन्य बीमारी के लक्षण होने पर डॉक्टर की सलाह और उचित जांच जरूरी है।

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply