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गोल्ड लोन बिजनेस में क्यों कूंद रही बड़ी कंपनियां? टाटा से लेकर बिड़ला तक ने लगाया दांव

भारत में गोल्ड लोन का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है और अब बड़े बिजनेस ग्रुप भी इस बाजार में उतर रहे हैं. हाल के कुछ हफ्तों में टाटा कैपिटल, गोदरेज कैपिटल और आदित्य बिड़ला कैपिटल ने गोल्ड लोन बिजनेस को लेकर बड़े कदम उठाए हैं. इससे संकेत मिल रहा है कि गोल्ड लोन अब सिर्फ एक छोटा या खास कारोबार नहीं रह गया है, बल्कि बड़े ग्रुप इसे भविष्य के बड़े बिजनेस के तौर पर देख रहे हैं.

कैपिटल ने केरल की कंपनी योगलोन्स में 88.6% हिस्सेदारी खरीदी है. इसके जरिए उसे 160 से ज्यादा ब्रांच, करीब 32,000 ग्राहकों और ₹700 करोड़ से ज्यादा के गोल्ड लोन पोर्टफोलियो तक पहुंच मिली है. वहीं, गोदरेज ने कनकादुर्गा फाइनेंस का गोल्ड लोन कारोबार खरीदा है. इस कारोबार के पास करीब ₹280 करोड़ का लोन पोर्टफोलियो, 12,000 ग्राहक और 54 ब्रांच हैं. आदित्य बिड़ला कैपिटल ने अलग रास्ता चुना है. कंपनी किसी मौजूदा कंपनी को खरीदने के बजाय खुद गोल्ड लोन का कारोबार खड़ा करेगी. इसके लिए देशभर में करीब 1,000 ब्रांच खोलने की योजना है.

गोल्ड लोन बिजनेस में क्यों कूंद रही कंपनियां?

भारत में घरों में बड़ी मात्रा में सोना रखा हुआ है. मई 2026 तक सोने के आभूषणों के बदले दिए गए लोन का कुल बकाया करीब ₹3.3 लाख करोड़ पहुंच गया था. वित्त वर्ष 2026 में गोल्ड लोन में करीब 50% की बढ़ोतरी हुई. गोल्ड लोन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें लोन के बदले सोना गिरवी रखा जाता है. इसलिए बैंक या NBFC के लिए यह एक सिक्योर्ड लोन होता है. अगर ग्राहक लोन नहीं चुका पाता, तो नियमों के तहत गिरवी रखे सोने की नीलामी की जा सकती है. दूसरी तरफ, ग्राहक के लिए भी गोल्ड लोन लेना आसान होता है. इसमें होम लोन की तरह लंबी कानूनी प्रक्रिया या ज्यादा दस्तावेजों की जरूरत नहीं होती. इसी वजह से छोटे कारोबारियों, दुकानदारों और अब ज्यादा आय वाले ग्राहकों में भी इसकी मांग बढ़ रही है.

बिना गारंटी वाले लोन से बदलाव

बड़े NBFC पहले पर्सनल लोन और दूसरे अनसिक्योर्ड लोन पर ज्यादा ध्यान दे रहे थे, लेकिन इस तरह के कर्ज में तेजी के बाद RBI की निगरानी बढ़ी है. ऐसे में कंपनियां अब सिक्योर्ड लोन की ओर बढ़ रही हैं. गोल्ड लोन इस बदलाव के लिए काफी सही है. इसमें गिरवी के तौर पर सोना मौजूद रहता है और इसकी कीमत आसानी से पता की जा सकती है. इसलिए कंपनियों के लिए जोखिम को संभालना थोड़ा आसान होता है.

सोने की कीमत बढ़ने से भी मिला फायदा

सोने की कीमतों में तेजी ने भी गोल्ड लोन कारोबार को बढ़ावा दिया है. जब सोने की कीमत बढ़ती है, तो ग्राहक उतने ही गहनों के बदले ज्यादा रकम का लोन ले सकता है. इससे NBFC का लोन पोर्टफोलियो भी तेजी से बढ़ता है. हालांकि, बड़े समूह सिर्फ सोने की बढ़ती कीमतों पर दांव नहीं लगा रहे हैं. वे ब्रांच, कर्मचारियों और तकनीकी सिस्टम पर निवेश कर रहे हैं. इससे साफ है कि वे गोल्ड लोन को लंबे समय के बिजनेस के रूप में देख रहे हैं.

कुल मिलाकर, टाटा, गोदरेज और बिड़ला का गोल्ड लोन में उतरना सिर्फ सोने की कीमत बढ़ने का असर नहीं है. बड़े समूह इसे तेजी से बढ़ते, सुरक्षित और बड़े स्तर पर फैलाए जा सकने वाले रिटेल लोन कारोबार के रूप में देख रहे हैं.

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