
नई दिल्ली: कभी खाना खाते समय तो कभी बिना किसी वजह के अचानक हिचकी आने लगती है। आमतौर पर कुछ मिनटों में यह अपने आप बंद हो जाती है, लेकिन लगातार हिचकी आने पर काफी परेशानी हो सकती है। कई लोग इसे पेट से जुड़ी समस्या समझते हैं, जबकि इसके पीछे सांस लेने में मदद करने वाली मांसपेशी और कुछ खास नसों की भूमिका होती है।
आखिर क्यों आती है हिचकी?
हमारे फेफड़ों के ठीक नीचे गुंबद के आकार की एक मांसपेशी होती है, जिसे डायफ्राम कहा जाता है। यह सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाती है। जब डायफ्राम अचानक और अनैच्छिक रूप से सिकुड़ता है, तो हवा तेजी से फेफड़ों की ओर खिंचती है। इसी समय गले में मौजूद वोकल कॉर्ड के बीच का हिस्सा अचानक बंद हो जाता है। इससे ‘हिक’ जैसी आवाज निकलती है, जिसे हम हिचकी कहते हैं।
हिचकी में इन दो नसों की होती है अहम भूमिका
हिचकी आने की प्रक्रिया में वेगस नर्व और फ्रेनिक नर्व महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। फ्रेनिक नर्व डायफ्राम की गतिविधियों को नियंत्रित करने में मदद करती है, जबकि वेगस नर्व शरीर के कई अंगों से दिमाग तक संदेश पहुंचाती है।
इन नसों से जुड़े तंत्र में उत्तेजना या किसी तरह की गड़बड़ी होने पर डायफ्राम अचानक सिकुड़ सकता है और हिचकी शुरू हो सकती है।
इन वजहों से भी शुरू हो सकती है हिचकी
हिचकी आने के कई सामान्य कारण होते हैं। इनमें शामिल हैं:
- बहुत तेजी से खाना खाना।
- जरूरत से ज्यादा भोजन करना।
- मसालेदार भोजन का सेवन।
- सोडा या दूसरे गैस वाले पेय पीना।
- बहुत गर्म और बहुत ठंडी चीजों का अचानक सेवन।
- खाते या पीते समय ज्यादा हवा निगलना।
- अचानक डर, घबराहट, उत्साह या तनाव महसूस करना।
हिचकी रोकने के लिए आजमा सकते हैं ये 5 तरीके
1. कुछ सेकंड के लिए सांस रोकें: गहरी सांस लेकर थोड़ी देर रोकें और फिर धीरे-धीरे छोड़ें। ऐसा आराम से करें और सांस रोकने के लिए खुद पर दबाव न डालें।
2. थोड़ा-थोड़ा ठंडा पानी पिएं: छोटे घूंट लेकर पानी पीने से कुछ लोगों को हिचकी में राहत मिल सकती है।
3. धीरे-धीरे सांस लें: नाक से आराम से सांस अंदर लें और धीरे-धीरे बाहर छोड़ें। इससे सांस लेने की लय सामान्य रखने में मदद मिल सकती है।
4. ठंडे पानी से गरारे करें: कुछ लोगों को ठंडे पानी से गरारे करने पर राहत महसूस होती है। हालांकि, यह तरीका हर व्यक्ति पर समान रूप से असर नहीं करता।
5. घुटनों को छाती के पास लाएं: बैठकर घुटनों को धीरे-धीरे छाती की ओर लाएं और कुछ देर आरामदायक स्थिति में रहें। इससे डायफ्राम के आसपास दबाव में बदलाव हो सकता है।
कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है?
आमतौर पर सामान्य हिचकी कुछ मिनटों में अपने आप बंद हो जाती है। लेकिन अगर हिचकी 48 घंटे से ज्यादा समय तक बनी रहे, बार-बार लौटे या खाने, सोने और सांस लेने में परेशानी पैदा करे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। लंबे समय तक रहने वाली हिचकी कभी-कभी किसी अंदरूनी स्वास्थ्य समस्या या दवा के असर से भी जुड़ी हो सकती है।
Satya Report डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। हिचकी लंबे समय तक बनी रहने या अन्य परेशानी होने पर योग्य चिकित्सक से सलाह लें। घरेलू उपाय हर व्यक्ति के लिए प्रभावी हों, यह जरूरी नहीं है।



