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मौसम​​​ बदलते ही क्यों होने लगता है सर्दी-जुकाम? बार-बार बीमार पड़ने के पीछे हो सकती हैं ये 6 वजहें

मौसम​​​ बदलते ही क्यों होने लगता है सर्दी-जुकाम? बार-बार बीमार पड़ने के पीछे हो सकती हैं ये 6 वजहें

नई दिल्ली: मौसम में बदलाव होते ही कई लोगों को छींक, नाक बहना, गले में खराश, सिरदर्द और सर्दी-जुकाम की शिकायत होने लगती है। कुछ लोगों को हर बार मौसम बदलने पर 3 से 4 दिनों तक परेशानी बनी रहती है। अक्सर इसे कमजोर इम्यूनिटी से जोड़ दिया जाता है, लेकिन इसके पीछे केवल एक कारण नहीं होता। तापमान में उतार-चढ़ाव, वायरल संक्रमण, एलर्जी और रोजमर्रा की आदतें भी इसकी वजह बन सकती हैं।

मौसम बदलने पर बार-बार क्यों पड़ते हैं बीमार?

मौसम बदलने के दौरान तापमान और हवा में नमी का स्तर बदलता है। इस समय लोग घरों और बंद जगहों में अधिक समय बिताते हैं, जहां संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से वायरस फैल सकते हैं। सर्दी-जुकाम मुख्य रूप से वायरस के कारण होता है। बदलता मौसम अपने आप संक्रमण पैदा नहीं करता, लेकिन कुछ परिस्थितियां वायरस के फैलने और संक्रमण के संपर्क में आने की संभावना बढ़ा सकती हैं।

बार-बार सर्दी-जुकाम होने की 6 वजहें

1. वायरल संक्रमण के संपर्क में आना

सर्दी-जुकाम कई तरह के वायरस से हो सकता है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों और दूषित सतहों को छूने के बाद आंख, नाक या मुंह छूने से संक्रमण फैल सकता है। मौसम बदलने के दौरान ऐसे संक्रमण आम हो सकते हैं।

2. एलर्जी की समस्या

कुछ लोगों को धूल, परागकण, फफूंद या पालतू जानवरों के बालों से एलर्जी होती है। मौसम बदलने पर हवा में मौजूद एलर्जी पैदा करने वाले कणों की मात्रा बदल सकती है। इसके कारण लगातार छींक, नाक बहना, आंखों में खुजली और नाक बंद होने जैसी परेशानी हो सकती है। एलर्जी में आमतौर पर बुखार नहीं होता।

3. तापमान में अचानक बदलाव

दिन और रात के तापमान में अंतर होने पर कुछ लोगों को गले में परेशानी या नाक से जुड़ी शिकायत महसूस हो सकती है। हालांकि, केवल ठंडी हवा में रहने से वायरल सर्दी-जुकाम नहीं होता। इसके लिए आमतौर पर किसी वायरस का संक्रमण जिम्मेदार होता है।

4. नींद पूरी न होना

पर्याप्त नींद शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी है। लगातार कम सोने से शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए रोजाना पर्याप्त और नियमित नींद लेने की कोशिश करें।

5. हाथों की साफ-सफाई का ध्यान न रखना

बिना हाथ धोए आंख, नाक और मुंह छूने से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है। खासकर सार्वजनिक जगहों से लौटने के बाद हाथ साफ करना जरूरी है। साबुन और पानी से नियमित रूप से हाथ धोने की आदत संक्रमण से बचाव में मदद करती है।

6. धूम्रपान और प्रदूषण के संपर्क में रहना

सिगरेट का धुआं और वायु प्रदूषण श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। इससे नाक और गले में जलन, खांसी या सांस संबंधी परेशानी बढ़ सकती है। पहले से एलर्जी या अस्थमा की समस्या वाले लोगों को इसका असर अधिक महसूस हो सकता है।

सर्दी-जुकाम से बचने के लिए अपनाएं ये आदतें

  • दिनभर में जरूरत के अनुसार पर्याप्त पानी पिएं।
  • रोजाना संतुलित और पौष्टिक भोजन करें।
  • पर्याप्त नींद लें और नियमित शारीरिक गतिविधि बनाए रखें।
  • बाहर से आने के बाद और खाने से पहले हाथ धोएं।
  • खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकें।
  • बीमार व्यक्ति के बहुत करीब रहने से बचें।
  • धूम्रपान और प्रदूषण से दूरी बनाने की कोशिश करें।
  • एलर्जी की समस्या होने पर उसके कारणों की पहचान कर डॉक्टर से सलाह लें।

कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?

अगर सर्दी-जुकाम के साथ सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, तेज या लगातार बुखार, गंभीर कमजोरी या शरीर में पानी की कमी के लक्षण हों, तो चिकित्सकीय सलाह लें। लक्षण 10 दिनों से ज्यादा बने रहें, पहले ठीक होकर दोबारा बिगड़ जाएं या बार-बार संक्रमण हो, तब भी जांच कराना उचित है।

Satya Report नोट: मौसम बदलने पर होने वाली हर सर्दी-जुकाम की शिकायत कमजोर इम्यूनिटी का संकेत नहीं होती। इसके पीछे वायरल संक्रमण, एलर्जी और पर्यावरणीय कारण हो सकते हैं। बार-बार परेशानी होने पर सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से सलाह लें।

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