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हर सूर्य ग्रहण भारत में क्यों नहीं दिखता? आसान भाषा में समझें पूरा विज्ञान

इस साल का दूसरा सूर्य ग्रहण आज यानी 12 अगस्त को लगेगा. इसकी शुरुआत रात 9 बजकर 4 मिनट पर होगी और 1 बजकर 24 मिनट पर खत्म होगा. कुल 4 घंटे 24 मिनट तक लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, लेकिन दुनिया के कई हिस्सों में देखा जा सकेगा. जैसे दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया, जिम्बाब्वे, जाम्बिया, मॉरिशस, अंटार्कटिका और दक्षिण अमेरिका के अर्जेंटीना और चिली में नजर आएगा. अब सवाल है कि कभी सूर्य ग्रहण भारत में दिखता है और कभी नहीं. ऐसा क्यों होता है.

हर सूर्य ग्रहण भारत में क्यों नहीं दिखता? आसान भाषा में समझें पूरा विज्ञान

इसे समझने के लिए पहले यह जानना होगा कि सूर्य ग्रहण कब पड़ता है. सूर्य ग्रहण की स्थिति तब बनती है जब चंद्रमा धरती और सूर्य के बीच आ जाता है. ऐसी स्थिति में चंद्रमा सूर्य की रोशनी को पूरी तरह से या फिर आधीअधूरी तरह से रोक लेता है और सूर्य ग्रहण की स्थिति बनती है.

हर सूर्य ग्रहण भारत में क्यों नहीं दिखाई देता?

इस सवाल का जवाब है कि भारत में वही सूर्य ग्रहण दिखाई देता है जब चंद्रमा की छाया वाली पट्टी भारतीय उपमहाद्वीप के ऊपर से गुजरती है. पृथ्वी लगातार घूमती रहती है और चंद्रमा भी अपनी कक्षा में घूमता है. इसलिए हर ग्रहण में छाया का रास्ता पृथ्वी के अलगअलग हिस्सों से गुजरता है.

अगर सूर्य ग्रहण के दौरान पृथ्वी घूमते हुए ऐसी स्थिति में हो कि भारत सूर्य के सामने न हो तो भारत में ग्रहण नहीं दिखेगा, भले ही वह ग्रहण धरती पर कहीं और हो रहा हो. यही वजह है कि पिछले कुछ सालों में लगे कई सूर्य ग्रहण अमेरिका, यूरोप या प्रशांत महासागर के इलाकों से दिखे, लेकिन भारत में या तो आंशिक रूप से दिखे या बिल्कुल नहीं दिखे.

इस तस्वीर से समझ सकते हैं कि भारत पर छाया नहीं पड़ रही, इसलिए यहां सूर्य ग्रहण भी नहीं पड़ रहा. फोटो: AI Generated

इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी को तीन गेंदों की तरह समझें. चंद्रमा हर बार सूर्य के ठीक सामने आता है, लेकिन उसकी छाया हमेशा भारत पर पड़े यह जरूरी नहीं है.

चांद की छाया कितनी पड़ी?

अब सवाल है कि चंद्रमा की छाया आखिरी कितनी बड़ी होती है. पृथ्वी के मुकाबले चंद्रमा काफी छोटा है. सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी भी काफी ज्यादा है. यही वजह है कि चांद से होते हुए पृथ्वी पर जो छाया पड़ती है वो पृथ्वी के बहुत छोटे हिस्से को कवर करती है.

चंद्रमा पृथ्वी के मुकाबले काफी छोटा है. फोटो: Pexels

पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान बनने वाली छाया छाया सबसे गहरी होती है. आमतौर पर सिर्फ 100 से 270 किलोमीटर चौड़ी पट्टी जितनी होती है. सोचिए, पूरी पृथ्वी का व्यास लगभग 12,742 किलोमीटर है, और इसके मुकाबले यह छाया कितनी छोटी है. यही वजह है कि पूर्ण सूर्य ग्रहण सिर्फ पृथ्वी के एक बेहद पतले से पट्टी वाले हिस्से से ही दिखता है.

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