Satya Report: पश्चिम बंगाल इन दिनों पूरे देश में छाया हुआ है. इस प्रमुख कारण वहां हो रहे विधानसभा के चुनाव हैं. बंगाल में पहले चरण का मतदान हो गया है. सभी राजनीतिक पार्टियां जो भी वहां पर चुनाव लड़ रही हैं सभी के सभी जोरदार प्रचार में जुटी हुई हैं. बंगाल की चर्चा चुनाव के इतर जब भी होती है तब वहां की सभ्यता और खाने की बात जरूर होती है. खाने में मछली-भात वहां का प्रमुख व्यंजन है, जो कि बंगाल की एक तरीके से पहचान भी है, लेकिन क्या आपको पता है कि माछ-भात बंगाल की जीडीपी में कितना योगदान देता है. आइए आपको इसके बारे में डिटेल से बताते हैं.

ऑल इंडिया फिश स्टैटिस्टिक्स और RBI के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, 2011-12 में इसका राज्य की GSDP में 3.3% योगदान था, लेकिन 2022-23 में यह घटकर 2.1% रह गया. इन आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि 2019-20 में राज्य की लगभग 3.25% आबादी मछली पकड़ने यानी फिशिंग के बिजनेस से जुड़ी थी, जो भारत में सबसे ज्यादा हिस्सों में से एक है. 2020-21 में, समुद्री प्रोडक्ट्स का पश्चिम बंगाल के कुल एक्सपोर्ट में 5.46% हिस्सा था.
2022-23 में पश्चिम बंगाल में प्रति व्यक्ति मछली की खपत भारत में आठवें स्थान पर रही, जिससे साफ है कि आगे ग्रोथ की काफी गुंजाइश है. ईटी की रिपोर्ट में एक्सपर्ट्स ने कहा कि अगर प्रोसेसिंग बेहतर की जाए, तो समुद्री प्रोडक्ट्स, खासकर झींगा के एक्सपोर्ट में अच्छी बढ़त हो सकती है. बंगाल की मछली और मीट इकोनॉमी कई लेवल पर फैली हुई है मछली पालन, होलसेल व्यापार, कोल्ड स्टोरेज, रिटेल बिक्री, डिलीवरी, क्लाउड किचन, QSR फॉर्मेट, पुराने रेस्टोरेंट, पैकेज्ड फूड और एक्सपोर्ट तक. .
मांस का इकोनॉमी कनेक्शन
पश्चिम बंगाल में मांस उत्पादन भी एक बड़ा बिजनेस है. भारत सरकार के ‘बेसिक एनिमल हसबैंड्री स्टैटिस्टिक्स 2025’ के अनुसार, पश्चिम बंगाल देश के कुल मांस उत्पादन का लगभग 12.46% हिस्सा पैदा करता है, जिससे यह सबसे बड़ा प्रोड्यूसर राज्य बन गया है. यह मांस-आधारित प्रोडक्ट्स की मजबूत डिमांड और बड़े मार्केट को दिखाता है. उत्तर प्रदेश 12.2% के साथ दूसरे और महाराष्ट्र 11.57% के साथ तीसरे नंबर पर है.
राज्य मत्स्य अधिकारियों के संघ के अनुसार, पश्चिम बंगाल 2025-26 में लगभग 2 मिलियन टन सालाना उत्पादन के साथ दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक बना हुआ है. यह राज्य इनलैंड मछली उत्पादन में सबसे आगे है और मछली के बीज का टॉप सप्लायर भी है, जिसका देश के कुल उत्पादन में 16% से ज्यादा योगदान है. यह सेक्टर करीब 3.2 मिलियन लोगों की रोजी-रोटी का आधार है और इसकी अनुमानित क्षमता लगभग 3.4 मिलियन टन है, यानी आगे और ग्रोथ की संभावना है. भारत के मत्स्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की तटरेखा 158 किमी लंबी है और यहां 2,526 किमी लंबी नदियां और नहरें हैं.
निर्यात, पैमाना और विकास का अगला मोर्चा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत का समुद्री भोजन एक्सपोर्ट 2020-21 के 43,720.98 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 62,408.45 करोड़ रुपये हो गया है, जो लगभग 42.7% की ग्रोथ दिखाता है. पश्चिम बंगाल ने भी इसी ट्रेंड को फॉलो किया है. हालांकि, यह राज्य अभी भी आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे बड़े एक्सपोर्टर्स से पीछे है. हालांकि बंगाल में नॉन-वेज फूड की खपत से जुड़ा सीधा इन्वेस्टमेंट कम है, लेकिन पोल्ट्री, QSR और फिश एक्सपोर्ट जैसे सेक्टर्स की कंपनियां संगठित खपत बढ़ने पर अप्रत्यक्ष रूप से फायदा उठा सकती हैं.
शी फूड
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