
दीपावली से पहले आने वाली काली चौदस की रात को धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन मां काली, भगवान हनुमान और यमराज की पूजा से जुड़ी कई परंपराएं निभाई जाती हैं। कहीं इस अवसर पर यम दीपक जलाया जाता है, तो कहीं बुरी शक्तियों से रक्षा के लिए विशेष पूजा और मंत्र जाप किए जाते हैं। गुजरात और महाराष्ट्र सहित देश के कई हिस्सों में काली चौदस का पर्व विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
काली चौदस को नरक चतुर्दशी और रूप चौदस से भी जोड़कर देखा जाता है। साल 2026 में यह पर्व 7 नवंबर को मनाया जाएगा। इस रात से जुड़ी ऐसी पांच प्रमुख धार्मिक मान्यताएं हैं, जिनके बारे में जानना दिलचस्प है।
क्यों मनाई जाती है काली चौदस?
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को काली चौदस मनाई जाती है। इस दिन मां काली की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि मां काली शक्ति, साहस और बुरी शक्तियों के विनाश का प्रतीक हैं। इसलिए भक्त इस दिन उनकी पूजा करके भय और संकट से रक्षा की प्रार्थना करते हैं।
काली चौदस से जुड़ी हैं ये 5 प्रमुख मान्यताएं
1. मां काली की पूजा से जुड़ी है शक्ति की मान्यता
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब रक्तबीज जैसे असुरों के अत्याचार बढ़ने लगे, तब देवी ने मां काली का उग्र रूप धारण कर उनका संहार किया था। इसी वजह से काली चौदस पर मां काली की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। भक्त उनसे साहस, शक्ति और नकारात्मक परिस्थितियों से लड़ने का आशीर्वाद मांगते हैं।
2. नरकासुर के वध से जुड़ा है पर्व
धार्मिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने इसी तिथि पर अत्याचारी नरकासुर का वध किया था और उसकी कैद से हजारों कन्याओं को मुक्त कराया था। इस प्रसंग को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में देखा जाता है। नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान यानी तेल और उबटन लगाकर स्नान करने की परंपरा भी प्रचलित है।
3. यमराज के नाम से जलाया जाता है दीपक
काली चौदस पर यम दीपक जलाने की परंपरा भी काफी प्रचलित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन दक्षिण दिशा में यमराज के निमित्त दीपक जलाने से परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। इसे यमराज के प्रति सम्मान और परिवार की लंबी आयु की कामना से जुड़ी परंपरा माना जाता है।
4. तंत्र-मंत्र और नकारात्मक शक्तियों से जुड़ी मान्यताएं
काली चौदस की रात को कुछ परंपराओं में तंत्र साधना और विशेष मंत्र जाप के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि मां काली की आराधना और मंत्रों के जाप से भय तथा नकारात्मकता से मुक्ति मिलती है। हालांकि, तंत्र-मंत्र से जुड़ी कई बातें लोकविश्वास और परंपराओं पर आधारित हैं। इन्हें प्रमाणित तथ्य या किसी समस्या के समाधान की गारंटी नहीं समझना चाहिए।
5. हनुमान जी की पूजा का भी है विशेष महत्व
गुजरात और महाराष्ट्र समेत कई क्षेत्रों में काली चौदस के दिन भगवान हनुमान की पूजा करने की परंपरा है। भक्त बजरंगबली को सिंदूर, तेल और चोला अर्पित करते हैं। मान्यता है कि हनुमान जी की आराधना से भय और संकटों से लड़ने का साहस मिलता है। इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ और सुंदरकांड का पाठ भी कई श्रद्धालु करते हैं।
काली चौदस पर क्यों किया जाता है दीपदान?
दीपदान को अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। काली चौदस पर यमराज के नाम से दीपक जलाने की परंपरा इसी धार्मिक भावना से जुड़ी है। कई परिवार इस दिन घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक रखते हैं और परिवार के सदस्यों की कुशलता की कामना करते हैं।
काली चौदस की इन परंपराओं में मां काली की शक्ति, भगवान कृष्ण की विजय, हनुमान जी की भक्ति और यमराज के प्रति श्रद्धा जैसे कई धार्मिक भाव जुड़े हुए हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में इस पर्व को मनाने के तरीके और मान्यताएं भी अलग हो सकती हैं।
Satya Report डिस्क्लेमर: इस लेख में बताई गई जानकारी पौराणिक कथाओं, धार्मिक परंपराओं और लोकमान्यताओं पर आधारित है। तंत्र-मंत्र या पूजा से किसी बीमारी, भय अथवा परेशानी के निश्चित रूप से दूर होने का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। पाठक इन मान्यताओं को अपनी श्रद्धा और विवेक के अनुसार समझें।



