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भारत में हॉलीवुड सुपरहीरोज़ का इतना क्रेज क्यों? जानिए भारतीय सुपरहीरो फिल्में क्यों रह गईं पीछे

सुपरहीरोज़ का युवाओं के बीच क्रेज होना आम बात है पर बशर्ते वो सुपरहीरो हॉलीवुड फिल्म का होना चाहिए। ऐसा नही है कि भारत में कोई सुपरहीरोज़ पर आधारित फिल्म बनी नही है।

भारत में हॉलीवुड सुपरहीरोज़ का इतना क्रेज क्यों? जानिए भारतीय सुपरहीरो फिल्में क्यों रह गईं पीछे
भारत में हॉलीवुड सुपरहीरोज़ का इतना क्रेज क्यों? जानिए भारतीय सुपरहीरो फिल्में क्यों रह गईं पीछे

बस बात इतनी सी है कि वो अपना वैसा स्टारडम बनाने में नाकामयाब रहीं है जैसा किसी भी हॉलीवुड फिल्म के लिए भारत में देखा जाता है।

भारत में का क्रेज होना आज की कोई नई बात नही है। ये सिलसिला 2002 में रिलीज़ हुई फिल्म स्पाइडर मैन के समय से देखा जाता है। टोबी मैगुइरे को कोई उनके नाम से जाने या न जाने पर स्पाइडर मैन के नाम से जरूर जानता है।

स्पाइडर मैन इस गिनती में कोई अकेली फिल्म नही है। आप एवेंजर्स, बैटमैन, सुपरमैन जैसी फिल्मों का भी उदाहरण ले सकते है। भारत में बच्चाबच्चा इन सुपरहीरोज़ कैरेक्टरों को याद रखता है। भले ही उन्होंने वो फिल्म देखी हो या न देखी हो।

हॉलीवुड सुपरहीरोज़ के फेमस होने की असली वजह

हॉलीवुड की वाली फिल्मों का लेवल सबसे अच्छी क्वालिटी का माना जाता है। हॉलीवुड फिल्मों का वी एफ एक्स और एक्शन स्टेजिंग अविश्वसनीय स्तर का होती है। उनकी कहानियां, विजुएल इफेक्ट्स, बड़े स्तर की दुनिया और एक्टरों की मैसिव फैन फॉलोइंग दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींच लाती है।

हॉलीवुड में एक फ्रेंचाइज़ी कल्चर को फॉलो किया जाता है यानी कि फिल्मों को अलग अलग भागों में बांटा जाता है। जिससे दर्शक उस फिल्म से और उस किरदार से बंधे रहते है। इतना ही नही बल्कि उन कैरेक्टर्स से कनेक्ट भी करने लगते है और सालों साल उन्हें याद रखते है।

वहां सुपरहीरोज़ को एक ह्यूमन इंटरस्ट के साथ बनाया जाता है। जिनमें हर तरह के इमोशन्स होते है, उनमें किरदार में कमियां भी होती है और उन्हें दिखाने की आजादी भी।

स्पाइडर मैन

स्पाइडर मैन इसका एक अच्छा उदाहरण है। सबसे पहले 2002 में टोबी मैगुइरे स्टारर स्पाइडरमैन आई। इसके तीन भाग रिलीज हुए है। इस पूरी ट्राईलॉजी का निर्देशन सैम राइमी ने क्या था। स्पाइडर मैन के नाम और फैन फॉलोइंग की वजह से इसके तीनों भागों ने सिनेमाघरों में अच्छा प्रदर्शन किया था।

स्पाइडर मैन का क्रेज इतना ज्यादा है कि एंड्रयू गारफील्ड भी दो स्पाइडरमैन फिल्मों में नजर आए, साल 2012 और 2014 में उनकी फिल्में द अमेजिंग स्पाइडर मैन, द अमेजिंग स्पाइडरमैन 2 रिलीज हुई थी।

इसके बाद स्पाइडरमैन के किरदार में एंट्री हुई टॉम हॉलैंड की, जो मार्वल की फिल्मों में स्पाइडर मैन का रोल निभाते हैं। वो अब तक 3 सोलो स्पाइडरमैन फिल्म्स में नजर आ चुके हैं, जबकि अवेंजर्स की बाकी सुपरहीरो फिल्मों में भी नजर आते रहते हैं।

अवेंजर्स युनिवर्स

थॉर, हल्क, कैप्टन अमेरिका और आएरन मैन जैसे यादगार कैरेक्टर्स से भरपूर मार्वल सिनेमेटिक यूनिवर्स में अब तक अवेंजर्स की चार फिल्में रिलीज़ हो चुकी है जबकि दो अभी बाकी है जो साल 2026 और साल 2027 में रिलीज़ की जाएंगी लेकिन इन फिल्मों के लिए एक क्रेज़ पहले से ही बन चुका जिसका कारण इस श्रृंखला की बाकी सभी फिल्मों के आइकॉनिक किरदार है। जो भारत में काफी ज्यादा फेमस है।

भारतीय सुपरहीरोज़ फिल्मों में क्या कमी

क्योंकि हॉलीवुड ने सुपरहीरो़ज की फिल्मों का एक अलग लेवल सेट कर दिया है तो लोगों को इतना जल्दी भारतीय सुपरहीरोज वाली फिल्में खास पसंद नही आती है। भारत में लो क्वालिटी वी एफ एक्स वाली कमजोर कहानियों को सुपरहीरोज़ बनाकर दिखाया जाता है और ऐसी फिल्में दर्शकों को अपने पास खींच लाने में कामयाब नही होती।

आप ए फ्लाइंग जट्ट और रावन जैसी फिल्मों का उदाहरण ले सकते है। क्रिश के हिट होने के पीछे का कारण भी उसकी कहानी और फ्रेंचाइजी कल्चर है। जिसे लोगों को बांधे रखा और हर पार्ट में दर्शकों को कुछ अच्छा और बेहतर देने की कोशिश की।

शक्तिमान

भारत में शक्तिमान काफी फेसम सुपरहीरो है लेकिन ये भी अमेरिकन सुपरहीरो से इंपायर्ड है। 1997 में इसकी शुरुआत हुई थी और साल 2004 तक लगभग इसके कुल 450 से 520 एपिसोड बताए जाते है। ये एक ऐसा शो था जो भारतीय ऑडियंस के बीच काफी मशहूर है। लेकिन ये भी ओरिजनल नही है।

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