
रामगढ़, झारखंड: झारखंड के रामगढ़ जिले के कुज्जू ओपी क्षेत्र में एक महिला की हत्या के मामले में पुलिस ने उसके पति और साली को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, पति और साली के बीच कथित अवैध संबंध थे। पत्नी को इसकी जानकारी मिलने के बाद घर में अक्सर विवाद होता था। इसी विवाद के दौरान महिला की हत्या किए जाने का आरोप है।
पति और साली के बीच संबंध को लेकर होता था विवाद
मृतका की पहचान जेबा परवीन के रूप में हुई है। पुलिस ने इस मामले में उसके पति गुलाम सरवर उर्फ राजन (37) और मृतका की बहन नेहा परवीन (32) को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान गुलाम सरवर ने बताया कि उसके और नेहा परवीन के बीच संबंध थे। जेबा परवीन को इस बारे में पता चल गया था, जिसके बाद पति-पत्नी के बीच अक्सर झगड़े होने लगे थे। पुलिस मामले में दोनों आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।
झगड़े के दौरान पत्नी के साथ हुई मारपीट
पुलिस को दिए गए कथित बयान के मुताबिक, 17 अक्टूबर 2026 को पति-पत्नी के बीच फिर विवाद हुआ। आरोप है कि इसी दौरान गुलाम सरवर ने जेबा परवीन का सिर दीवार पर पटक दिया, जिससे वह बेहोश हो गईं। घटना के बाद आरोपी पति के रांची भाग जाने की बात सामने आई है।
मामले में नेहा परवीन पर भी अपनी बहन के साथ मारपीट करने का आरोप है। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
मृतका के भाई की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला
जानकारी के अनुसार, जेबा परवीन के भाई की शिकायत के आधार पर 18 अक्टूबर 2026 को हत्या का मामला दर्ज किया गया था। मामले की जांच के लिए रामगढ़ के पुलिस अधीक्षक ने एक विशेष टीम गठित की थी। जांच के बाद पुलिस ने मृतका के पति और उसकी बहन को गिरफ्तार किया।
14 साल पहले हुई थी शादी, दो बच्चे हैं
बताया गया है कि जेबा परवीन की शादी करीब 14 साल पहले गुलाम सरवर से हुई थी। दंपती के दो बच्चे हैं। घटना के समय दोनों बच्चे ट्यूशन पढ़ने गए हुए थे। मृतका और उसकी बहन नेहा परवीन एक ही गांव में रहती थीं। नेहा अविवाहित बताई गई हैं।
इस घटना के बाद इलाके में चर्चा का माहौल है। पुलिस मामले से जुड़े तथ्यों और आरोपियों की भूमिका के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।
Satya Report डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है। आरोपों और कथित बयानों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी। गिरफ्तारी या पुलिस के सामने कथित स्वीकारोक्ति अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है।



