
भोपाल: पति-पत्नी के बीच लगातार बढ़ते विवाद ने आखिरकार एक परिवार को अलग होने के फैसले तक पहुंचा दिया। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक सरकारी कर्मचारी अपनी सहकर्मी के साथ रहना चाहता था और पत्नी से अलग होने को तैयार था। दूसरी ओर, पत्नी अपनी दो बेटियों के भविष्य और आर्थिक सुरक्षा को लेकर चिंतित थी। मामला कुटुंब न्यायालय की काउंसलिंग तक पहुंचा, जहां लंबी बातचीत के बाद तीनों पक्षों के बीच समझौता हुआ।
जानकारी के मुताबिक, 42 वर्षीय सरकारी कर्मचारी की नजदीकियां अपने ही कार्यालय में कार्यरत 52 वर्षीय महिला अधिकारी से बढ़ गई थीं। धीरे-धीरे पति का अपनी पत्नी से विवाद बढ़ने लगा और घर का माहौल तनावपूर्ण रहने लगा। दंपती की 16 और 12 वर्ष की दो बेटियां हैं। माता-पिता के बीच रोज होने वाले झगड़ों से परेशान होकर बड़ी बेटी ने कुटुंब न्यायालय में शिकायत की, जिसके बाद दोनों को काउंसलिंग के लिए बुलाया गया।
पति ने कहा- अब पत्नी के साथ नहीं रहना चाहता
काउंसलिंग के दौरान पति ने स्पष्ट किया कि वह अपनी सहकर्मी के साथ रहना चाहता है और पत्नी से विवाह संबंध खत्म करने को तैयार है। उसने यह भी कहा कि वह अपनी बेटियों से प्यार करता है, लेकिन पत्नी के साथ रहना नहीं चाहता।
काउंसलिंग से जुड़े लोगों के अनुसार, पति-पत्नी के बीच लंबे समय से विश्वास की कमी और विवाद बने हुए थे। हालात ऐसे हो गए थे कि दोनों के बीच समझौता कराकर साथ रहने की संभावना मुश्किल नजर आ रही थी।
पत्नी ने बेटियों के भविष्य के लिए रखी शर्त
अलग होने की सहमति बनाते समय पत्नी ने अपनी और बेटियों की आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी। उसने एक डुप्लेक्स मकान और 27 लाख रुपये नकद देने की मांग रखी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पति की सहकर्मी ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और मकान व नकद राशि देने पर सहमति बनी।
बताया गया कि पूरे समझौते का मूल्य करीब डेढ़ करोड़ रुपये आंका गया। इस व्यवस्था का उद्देश्य पत्नी और दोनों बेटियों के भविष्य को आर्थिक सुरक्षा देना था, ताकि अलग होने के बाद उन्हें परेशानियों का सामना न करना पड़े।
बेटी की शिकायत से शुरू हुई काउंसलिंग
इस पूरे मामले में बेटियों पर माता-पिता के विवाद का असर अहम वजह बना। घर में लगातार तनाव से परेशान होकर बड़ी बेटी ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद काउंसलिंग के जरिए परिवार के सदस्यों की बात सुनी गई और अलगाव की शर्तों पर सहमति बनाने की कोशिश हुई।
आखिरकार, पति-पत्नी के अलग होने और आर्थिक व्यवस्था को लेकर सहमति बनने की जानकारी सामने आई। हालांकि, विवाह विच्छेद की कानूनी प्रक्रिया और समझौते की अंतिम स्थिति के बारे में आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही पूरी पुष्टि की जा सकती है।
सत्या रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध विवरणों पर आधारित है। समझौते की शर्तों और कानूनी स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों से की जानी चाहिए।



