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छह​​​ महीने तक फॉरेस्ट गार्ड बनकर करता रहा नौकरी, वर्दी और ID कार्ड भी मिला… जांच में खुला 14 लाख से ज्यादा की ठगी का राज

छह​​​ महीने तक फॉरेस्ट गार्ड बनकर करता रहा नौकरी, वर्दी और ID कार्ड भी मिला… जांच में खुला 14 लाख से ज्यादा की ठगी का राज

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश: सरकारी नौकरी पाने की चाह में एक परिवार ने अपनी जमा-पूंजी तक दांव पर लगा दी, लेकिन जिस नौकरी को असली समझकर युवक छह महीने तक ड्यूटी करता रहा, वह पूरी तरह फर्जी निकली। आरोप है कि जालसाजों ने उसे फॉरेस्ट गार्ड की वर्दी पहनाई, पहचान पत्र दिया और बिहार के मोतिहारी स्थित एक कार्यालय में नियमित रूप से काम भी कराया। जब ज्वाइनिंग लेटर और ID कार्ड की जांच हुई, तब पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। इस मामले में युवक के पिता से नकद और ऑनलाइन माध्यम से कुल 14 लाख 20 हजार 700 रुपये वसूलने का आरोप है।

मामला गोरखपुर के रामगढ़ताल थाना क्षेत्र की शिवपुरी नई कॉलोनी, मिर्जापुर का है। यहां रहने वाले जितेंद्र कुमार राजभर मैरिज हॉल में काम करते हैं। उन्होंने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि एक शादी समारोह के दौरान उनकी मुलाकात विनोद कुमार मिश्रा, उसके बेटे दीपक और बेटी पूजा से हुई थी। विनोद ने खुद को सेना से जुड़ा व्यक्ति बताया और दावा किया कि वह पहले भी 15 से 20 लोगों को नौकरी दिलवा चुका है। उसके बेटे और बेटी ने भी उसकी बातों का समर्थन किया।

आरोप है कि उनकी बातों पर भरोसा करके जितेंद्र ने अपने बेटे सुनील कुमार राजभर को सरकारी नौकरी दिलाने के लिए शुरुआत में 50 हजार रुपये नकद दिए।

फॉरेस्ट गार्ड की नौकरी का दिया भरोसा

शिकायत के मुताबिक, कुछ समय बाद दीपक सुनील को मेडिकल जांच के लिए लखनऊ लेकर गया। इसके बाद सुनील के मोबाइल पर वन विभाग में फॉरेस्ट गार्ड पद का ज्वाइनिंग लेटर भेजा गया। उसे 4 मई 2024 को बिहार के मोतिहारी में नौकरी ज्वाइन करने के लिए कहा गया।

सुनील जब मोतिहारी पहुंचा तो रेलवे स्टेशन पर उसे लेने के लिए कोई नहीं आया। ऐसे में उसे तीन दिन तक होटल में रुकना पड़ा। बाद में उसने चंद सरैया पिपरा कोठी में नवीन कुमार के यहां किराये पर कमरा लिया। कुछ दिनों बाद दीपक वहां पहुंचा और उसे मोतिहारी के एक कार्यालय में ले गया।

वहां सुनील को फॉरेस्ट गार्ड की वर्दी पहनाई गई और एक पहचान पत्र भी दिया गया। इसके बाद उससे कार्यालय में नियमित रूप से काम कराया जाने लगा। इतना ही नहीं, उससे रजिस्टर में हस्ताक्षर भी करवाए जाते थे। इन परिस्थितियों में सुनील और उसके परिवार को लंबे समय तक यही लगता रहा कि उसकी सरकारी नौकरी लग चुकी है।

नौकरी बचाने के नाम पर लगातार मांगे रुपये

आरोप है कि कुछ समय बाद आरोपियों ने ज्वाइनिंग की प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर 11 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग कर दी। सुनील को चेतावनी दी गई कि अगर रकम नहीं दी गई तो उसकी नौकरी चली जाएगी। बेटे की नौकरी छिनने के डर से जितेंद्र ने पैसों का इंतजाम करना शुरू कर दिया।

बताया गया कि उन्होंने अपनी पत्नी के गहने गिरवी रखे और कर्ज लेकर दो बार में 5.50-5.50 लाख रुपये आरोपियों के बेटे और बेटी को दिए। इसके अलावा 10 हजार, 35 हजार और 40 हजार रुपये सहित अन्य रकम ऑनलाइन भी भेजी गई। शिकायत के अनुसार, ऑनलाइन माध्यम से कुल 3 लाख 20 हजार 700 रुपये ट्रांसफर किए गए।

इस तरह परिवार से नकद और ऑनलाइन मिलाकर कुल 14 लाख 20 हजार 700 रुपये लिए जाने का आरोप है।

छह महीने बाद आरोपियों से संपर्क हुआ बंद

सुनील करीब छह महीने तक मोतिहारी के कार्यालय में काम करता रहा। इस दौरान उसे नौकरी के फर्जी होने का अंदाजा नहीं हुआ। लेकिन बाद में दीपक वहां से फरार हो गया और विनोद ने भी फोन उठाना बंद कर दिया। इसके बाद परिवार को संदेह हुआ और जितेंद्र ने बेटे को मिले ज्वाइनिंग लेटर तथा पहचान पत्र की जांच कराई।

जांच में दोनों दस्तावेज फर्जी पाए गए। इसके बाद जितेंद्र ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) से शिकायत की और पूरे मामले की जानकारी दी।

एसएसपी के आदेश पर रामगढ़ताल पुलिस ने विनोद कुमार मिश्रा, उसके बेटे दीपक और बेटी पूजा के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। आरोपों की पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।

नोट: यह खबर उपलब्ध शिकायत और पुलिस कार्रवाई से जुड़ी जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगी।

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