Satya Report: World Malaria Day: दशकों से जारी मलेरिया के खिलाफ वैश्विक जंग अब एक बेहद निर्णायक और ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंच गई है। हर साल 25 अप्रैल को मनाया जाने वाला विश्व मलेरिया दिवस इस वर्ष केवल जागरूकता फैलाने का माध्यम नहीं, बल्कि उस वैज्ञानिक प्रगति और वैश्विक इच्छाशक्ति का प्रदर्शन है, जो इस जानलेवा बीमारी को जड़ से खत्म करने का माद्दा रखती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक विज्ञान और सटीक रणनीतियों के मेल से हमारे ही जीवनकाल में मलेरिया का पूरी तरह उन्मूलन संभव नजर आ रहा है।

मलेरिया उन्मूलन
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपने वैश्विक साझेदारों के साथ मिलकर इस वर्ष एक सशक्त आह्वान किया है करने के लिए प्रतिबद्ध: अब हम कर सकते हैं। अब हमें करना ही होगा। यह नारा इस विश्वास को दर्शाता है कि पिछले दो दशकों में हमने जो हासिल किया है उसे अब अंतिम मुकाम तक ले जाने का समय आ गया है। साल 2000 से लेकर अब तक के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में लाखों मामलों और करोड़ों संभावित मौतों को समय रहते टाला जा चुका है।
47 देशों की उपलब्धि
मलेरिया के खिलाफ इस लड़ाई में सफलता के कई उजले पक्ष भी सामने आए हैं। अब तक दुनिया के 47 देशों को आधिकारिक तौर पर ‘मलेरियामुक्त’ घोषित किया जा चुका है। विशेष रूप से ग्रेटर मेकांग उपक्षेत्र जैसे इलाकों ने यह साबित कर दिखाया है कि अगर ठोस रणनीति अपनाई जाए तो दवा प्रतिरोध जैसी कठिन परिस्थितियों के बावजूद मामलों में 90 प्रतिशत तक की गिरावट लाई जा सकती है। हालांकि 2024 के आंकड़े थोड़ी चिंता भी पैदा करते हैं जहां अनुमानित 282 मिलियन मामले और 6 लाख 10 हजार मौतें दर्ज की गई हैं।
मच्छर की तस्वीर
विज्ञान और तकनीक
आज हमारे पास मलेरिया से लड़ने के लिए पहले से कहीं अधिक उन्नत हथियार मौजूद हैं। नई पीढ़ी की मच्छरदानियां अब कुल वितरण का 84 प्रतिशत हिस्सा बन चुकी हैं। इसके साथ ही मलेरिया के नए टीके एक गेमचेंजर साबित हो रहे हैं। वर्तमान में 25 देश पहले ही लगभग एक करोड़ बच्चों को टीकों के जरिए सुरक्षा कवच प्रदान कर रहे हैं। इसके अलावा मच्छरों के आनुवंशिक संशोधन और विकास के चरण में मौजूद आधुनिक इंजेक्शन इस दिशा में क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं।
दवाएं हो रही बेअसर
प्रगति के बावजूद विश्व मलेरिया रिपोर्ट 2025 कुछ गंभीर चुनौतियों की ओर इशारा करती है। अफ्रीका के कई हिस्सों में मलेरिया की दवाओं के प्रति प्रतिरोध देखा जा रहा है जो एक बड़ा खतरा है। साथ ही कीटनाशकों के प्रति मच्छरों की बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता, वित्तीय संसाधनों की कमी और जलवायु परिवर्तन जैसी स्थितियां इस लड़ाई को और अधिक जटिल बना रही हैं।
मलेरिया का होगा अंत!
के लिए अब राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत नेतृत्व और स्थानीय जरूरतों के अनुसार बनाई गई रणनीतियों की आवश्यकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जब हमारे पास तकनीक, ज्ञान और साधन मौजूद हैं तो मलेरिया से किसी की भी जान जाना स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। विश्व मलेरिया दिवस 2026 इसी सोच को समर्पित है कि यदि हम एकजुट होकर और नवाचार में निवेश बढ़ाकर आगे बढ़ें तो मलेरिया का अंत अब केवल एक सपना नहीं रह जाएगा।



