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World Population Day: पॉपुलेशन कंट्रोल से जनसंख्या बढ़ाने तक: क्यों बदलनी पड़ी दुनिया के 15 देशों की स्ट्रेटजी, जानिए पूरी कहानी

World Population Day 2026: एक समय दुनिया के कई देशों ने तेजी से बढ़ती आबादी को आर्थिक विकास में बाधा मानते हुए पॉपुलेशन कंट्रोल करने के लिए सख्त नीतियां लागू की थीं, लेकिन कुछ दशक बाद तस्वीर पूरी तरह से बदल गई है।

World Population Day: पॉपुलेशन कंट्रोल से जनसंख्या बढ़ाने तक: क्यों बदलनी पड़ी दुनिया के 15 देशों की स्ट्रेटजी, जानिए पूरी कहानी

अब यही देश घटती जन्मदर, बढ़ती बुजुर्ग आबादी और श्रमिकों की कमी से जूझ रहे हैं। इसके चलते सरकारें जन्मदर बढ़ाने के लिए नकद प्रोत्साहन, कर छूट, मातृत्वपितृत्व अवकाश और मुफ्त चाइल्डकेयर जैसी योजनाएं लागू कर रही हैं।

संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन के अनुसार, दुनिया में लगभग 15 से 20 देश ऐसे हैं, जिन्होंने अलगअलग समय पर बढ़ती जनसंख्या कंट्रोल करने के लिए एक्टिव सरकारी नीतियां अपनाईं। इनमें से कई देश अब विपरीत दिशा में जाकर जन्मदर बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

दुनिया का सबसे बड़ा उदाहरण चीन

चीन ने 1979 में वन चाइल्ड पॉलिसी लागू की थी। इसका उद्देश्य तेजी से बढ़ती आबादी को नियंत्रित करना था। यह नीति 2015 तक प्रभावी रही। इसके बाद सरकार ने पहले दो और 2021 से तीन बच्चों की मंजूरी दी। 

आज चीन कई प्रांतों में जन्म लेने वाले बच्चों पर नकद सहायता, कर रियायत और आवासीय सहायता जैसी योजनाएं चला रहा है।

संयुक्त राष्ट्र के विश्व जनसंख्या संभावना 2024 के अनुसार, चीन की जनसंख्या लगातार दूसरे साल घटी है और आने वाले दशकों में इसमें और कमी आने का अनुमान है।

सिर्फ चीन ही नहीं, कई देशों ने बदली स्ट्रेटजी

जानकारों के अनुसार, चीन के अलावा सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, ईरान, वियतनाम, थाईलैंड, ताइवान, जापान, हांगकांग और मकाऊ जैसे देशों ने भी कभी छोटे परिवार को बढ़ावा दिया था। आज इनमें से अधिकांश देश जन्मदर बढ़ाने के लिए नई योजनाएं लागू कर रहे हैं।

यूरोप में भी इटली, स्पेन, हंगरी, एस्टोनिया और रूस जैसी सरकारें कम जन्मदर के कारण परिवार बढ़ाने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन दे रही हैं। हालांकि, इन देशों में पहले चीन जैसी कानूनी एकबच्चा नीति नहीं थी, बल्कि परिवार नियोजन और कम जन्मदर की चुनौती के जवाब में प्रोनैटल नीतियां अपनाई जा रही हैं।

कौनकौन से देश स्ट्रेटजी बदल काम कर रहे हैं?

देश पहले की नीति वर्तमान स्थिति
चीन 19792015 तक एक बच्चा नीति तीन बच्चें की अनुमतिआर्थिक प्रोत्साहन
सिंगापुरस्टॉप एट टू अभियान जन्म पर नकद सहयता, टैक्स लाभ
दक्षिण कोरिया परिवार नियोजन अभियान जन्मदर बढ़ाने बड़े आर्थिक पैकेज
ईरान 1990 के दशक में जनसंख्या नियंत्रण अधिक बच्चों को प्रोत्साहन
वियतनाम दो बच्चा नीतिकई क्षेत्रों में नीति में ढील
थाईलैंडजन्म नियंत्रण कार्यक्रमजन्मदर बढ़ाने की नई रणनीति
जापान छोटे परिवार को बढ़ावा बच्चों वाले परिवारों के लिए आर्थिक सहायता
ताइवानपरिवार नियोजन जन्म प्रोत्साहन योजनाएं
हांगकांग छोटा परिवार अभियान कम जन्मदर से निपटने के प्रयास
मकाऊ छोटा परिवार नीति जन्म प्रोत्साहन कार्यक्रम

आबादी स्थिर रखने की प्रजनन दर क्या है?

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, किसी देश की की आबादी को स्थिर बनाए रखने के लिए कुल प्रजनन दर 2.1 मानी जाती है। वर्तमान में दक्षिण कोरिया, जापान, इटली, स्पेन, चीन और सिंगापुर समेत अनेश देशों की प्रजनन दर इससे काफी नीचे है।

कम जन्मदर का असर सिर्फ आबादी पर नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। कामकाजी आयु वर्ग घटन से उद्योगों में श्रमिकों की कमी, टैक्स कलेक्शन में गिरावट, पेंशन पर बढ़ता बोझ और स्वास्थ्य सेवाओं की मांग बढ़ने जैसी समस्याएं सामने आती हैं।

क्या आर्थिक प्रोत्साहन से बढ़ रही है जन्मदर?

आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन और संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों के अनुसार, सिर्फ आर्थिक सहायता से जन्मदर में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। रोजगार, महंगा आवास, शिक्षा का खर्च, महिलाओं की कार्यभागीदारी, देर से विवाह और बदलती सामाजिक प्राथमिकताएं भी परिवार के आकार को प्रभावित करती हैं। यही कारण है कि दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देशों में भारी सरकारी खर्च के बावजूद जन्मदर अपेक्षा से कम बनी हुई है।

भारत में स्वैच्छिक परिवार नियोजन की पॉलिसी

भारत की स्थिति उन देशों से काफी अलग है, जिन्होंने कभी जन्मदर पर सख्त कानूनी पाबंदी लगाई थी। यहां लंबे समय से स्वैच्छिक परिवार नियोजन की नीति अपनाई गई है। भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है।

संयुक्त राष्ट्र विश्व जनसंख्या संभावनाएं 2024 के अनुसार, भारत में लगभग 146 करोड़ यानी 1.46 बिलियन जनसंख्या है। यहां 201921 तक कुल प्रजनन दर 2.0, जो रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से नीचे है। भारत ने जनसंख्या के मामले में 2023 में चीन को पीछे छोड़ दिया।

कुछ राज्यों में चुनाव उम्मीदवारों के लिए लागू किए

केंद्रीय स्तर पर दो बच्चे का कानून लागू नहीं किया है, लेकिन कुछ राज्यों में पंचायत या स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवारों दो बच्चे से जुड़े नियम समयसमय पर लागू किए हैं या उन पर विचार हुआ है। यह पूरे देश पर लागू नहीं है।

क्या भारत में जन्मदर चिंता का विषय बनने लगी है?

जानकारों का मानना है कि भारत की औसत प्रजनन दर अब 2.0 तक आ चुकी है। हालांकि, देश के अंदर बड़ा अंतर है। बिहार, मेघालय जैसे राज्यों में जन्मदर राष्ट्रीय औसत से अधिक है। 

केरल, तमिलनाडु, कनार्टक, आंध्र प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल और दिल्ली जैसे राज्यों में प्रजनन दर काफी कम है। जबकि कुछ जगह यह दर 1.6 से 1.8 तक पहुंच चुकी है।

दुनिया के मुख्य 10 देशों में जनसंख्या की स्थिति

देश
देश जनसंख्या नियंत्रण नीति कब शुरू हुईअब जन्मदार बढ़ाने की नीति कब शुरू हुईउस समय की जनसंख्यावर्तमान 202526 अनुमान
जापान1948: यूजेनिक प्रोटेक्शन एक्ट परिवार नियोजन को बढ़ावा1990 के दशक के अंत से 2003 के बाद व्यापक प्रोत्साहन1948: लगभग 8.0 करोड़ लगभग 12.3 करोड़
सिंगापुर196669: स्टॉप एट टू अभियान 1987 से हेव थ्री ओर मोर, इफ यू केन एफॉर्ड इट 1965: 19 लाख लगभग 60 लाख
दक्षिण कोरिया 1962 राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम 2006 से जन्मदर बढ़ाने की नीति 1962: 2.6 करोड़ लगभग 5.17 करोड़
थाईलैंड 1970 परिवार नियोजन अभियान2021 से जन्मदर बढ़ाने पर विशेष नीति 1970: 3.6 करोड़ लगभग 7.1 करोड़
चीन 1979 वन चाइल्ड पॉलिसी 2016 दो बच्चे, 2021 तीन बच्चे 1979: 97 करोड़ लगभग 140.8 करोड
वियतनाम 1988 दोबच्चा नीति 2020 से कम जन्मदर वाले क्षेत्रों में प्रोत्साहन 1988 6.3 करोड़ लगभग 10.1 करोड़
ईरान1989 राष्ट्रीय परिवार नियोजन 2014 से जनसंख्या वृद्धि नीति 1989 5.5 करोड़ लगभग9.2 करोड़ 
ताइवान1964 परिवार नियोजन 2010 के बाद जन्म प्रोत्साहन 1964: 1.2 करोड़ लगभग 2.34 करोड़
हांगकांग 1970 टू इज इनॉट 2023 से जन्म प्रोत्साहन 1970: 39 लाख लगभग 75 लाख
मकाऊ 1970 दशक छोटा परिवार अभियान 2018 के बाद जन्म प्रोत्साहन 1970: 2.5 लाख लगभग 7.1 लाख

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