WHO के मुताबिक रेबीज से मरने वालों में 40 प्रतिशत बच्चे 15 साल की उम्र से कम के होते हैं. ये एक ऐसी समस्या है जिसे टीकाकरण और बचाव के जरिए ही रोका जा सकता है. लोगों में इसको लेकर जागरूकता लाने के लिए हर साल 28 सितंबर को वर्ल्ड रेबीज डे मनाया जाता है. इस बार की थीम Stronger Together रखी गई है. रेबीज के चलते न जाने कितने लोग अपनी जान गंवा देते हैं. कई बार तो ऐसे मामले देखने में आते हैं जहां लोगों का कहना होता है कि उन्हें कुत्ते ने काटा ही नहीं है. दरअसल कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं. इससे रेबीज का खतरा बढ़ जाता है.

के मुताबिक रेबीज मुख्य रूप से एशिया और अफ्रीका में सार्वजनिक स्वास्थ्य की एक गंभीर समस्या है. यह एक वायरल, ज़ूनोटिक और नजरअंदाज की गई बीमारी है, जिससे हर साल हजारों लोगों की मौत होती है.इंसानों में रेबीज के 99% मामले कुत्तों के काटने या खरोंचने से होते हैं, और कुत्तों के टीकाकरण व काटने से बचाव के जरिए इसे रोका जा सकता है.
सौ प्रतिशत जान जाने का जोखिम
के मुताबिक, एक बार जब रेबीज वायरस सेंट्रल नर्वस सिस्टम को संक्रमित कर देता है और बीमारी के लक्षण दिखाई देने लगते हैं, तो रेबीज के मामलों में मौत निश्चित होती है. हालांकि, वायरस को सेंट्रल नर्वस सिस्टम तक पहुंचने से रोककर और तुरंत ‘पोस्टएक्सपोज़र प्रोफिलैक्सिस’ देकर रेबीज से होने वाली मौतों को रोका जा सकता है.
त्वचा पर लार लगना को इग्नोर करना
डॉग पेरेंट कई बार छोटीछोटी लापरवाही कर देते हैं, जो रेबीज के खतरे को बढ़ा सकती हैं. इसमें से एक है त्वचा पर लार का लगना. ज्यादातर लोग इसपर ध्यान नहीं देते हैं. अगर कुत्ते की लार त्वचा पर लग जाए और उस जगह पर किसी तरह का घाव है तो इससे रेबीज का खतरा बढ़ सकता है.
खरोंच को नजरअंदाज कर देना
बहुत सारे लोग पेट्स के साथ खेलते वक्त पंजे से लगने वाली हल्की खरोंच को नजरअंदाज कर देते हैं. इसी तरह हल्का सा दांत लगने पर भी लोग इसे ऐसे ही रहने देते हैं और इंजेक्शन लेने की जरूरत नहीं समझते हैं. ऐसा करने से बचना चाहिए. थोड़ी सी खरोंच को भी इग्नोर न करें. इसके लिए डॉक्टर से मिलकर सलाह लेनी चाहिए और जरूरत पड़े तो वैक्सीन लेनी चाहिए.
कुत्ता काटने या खरोंच पर सावधानी
अगर कुत्ते ने काट लिया है, हल्का सा दांत लगा है या फिर खरोंच भी है तो घाव को बहते पानी में अच्छी तरह से 10 से 15 मिनट तक धोना चाहिए. इसके बाद तुरंत रेबीज की डोज की पहली वैक्सीन लेनी चाहिए और डॉक्टर के बताए के शेड्यूल के मुताबिक पूरा टीकाकरण करवाना चाहिए. इस तरह से थोड़ी सी सावधानी आपको रेबीज के खतरे से बचा सकती है.



