Satya Report: यमुना एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाला बहुप्रतीक्षित इंटरचेंज अब अंतिम चरण में पहुंच गया है. ग्रेटर नोएडा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए राहत भरी खबर है कि जून के अंत या जुलाई तक यह इंटरचेंज वाहनों के लिए खोल दिया जाएगा. इसके शुरू होते ही दोनों एक्सप्रेसवे के बीच सीधी कनेक्टिविटी मिल जाएगी और करीब 20 किलोमीटर तक दूरी कम हो जाएगी.

शुरुआती चरण में दिल्ली के कंपनी को इसका ठेका दिया गया लेकिन बाद में जिम्मेदारी यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण को सौंप दी गई. यमुना एक्सप्रेसवे के 10 किलोमीटर पॉइंट पर जगनपुर अफजलपुर गांव के पास इस इंटरचेंज की योजना वर्ष 2019 में बनाई गई थी, जिसका उद्देश्य यमुना एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे को सीधे जोड़ना था, ताकि वाहन चालकों को बारबार शहर के भीतर या परी चौक जैसे व्यस्त मार्गों से होकर न गुजरना पड़े.
हालांकि भूमि विवाद, किसानों के विरोध, कोविड19 महामारी और लागत बढ़ने जैसी वजहों से यह योजना लंबे समय तक अटकी रही. अब करीब 75 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और शेष काम तेजी से किया जा रहा है.
432 करोड़ रुपये की लागत से हो रहा तैयार
करीब 432 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस इंटरचेंज का निर्माण लगभग 48 हेक्टेयर क्षेत्र में किया जा रहा है. इसमें कुल 8 लूप बनाए गए हैं, जिनकी कुल लंबाई करीब 11 किलोमीटर है. इनमें 4 लूप उत्तर दिशा और 4 दक्षिण दिशा के ट्रैफिक को सुगम बनाएंगे. अधिकारियों के अनुसार, मुख्य संरचना तैयार हो चुकी है और अब अंतिम चरण में ब्लैक लेयर व अन्य तकनीकी काम पूरे किए जा रहे हैं.
नहीं लगाना पड़ेगा लंबा चक्कर
फिलहाल ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से यमुना एक्सप्रेसवे पर आनेजाने के लिए वाहन चालकों को सिरसा या परी चौक के रास्ते लंबा चक्कर लगाना पड़ता है, जिससे समय, ईंधन और ट्रैफिक तीनों पर दबाव बढ़ता है. इंटरचेंज शुरू होने के बाद वाहन बिना शहर में प्रवेश किए सीधे एक एक्सप्रेसवे से दूसरे पर जा सकेंगे, जिससे ग्रेटर नोएडा की सड़कों और प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा.
ये होगा बड़ा फायदा
इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के यात्रियों को मिलेगा. साथ ही नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंच भी पहले से आसान और तेज हो जाएगी. यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के विकसित हो रहे सेक्टरों को भी इस इंटरचेंज से सीधा लाभ मिलेगा, जिससे औद्योगिक और आवासीय गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है. करीब सात साल से प्रतीक्षित यह प्रोजेक्ट अब अपने अंतिम पड़ाव पर है और इसके शुरू होते ही इसे पश्चिमी यूपी और हरियाणा के लिए कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव माना जा रहा है.



