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Team India में चयन पर भावुक हुए Yash Thakur, बोले- आज पापा का सपना पूरा हुआ।

 जब विदर्भ के तेज गेंदबाज यश ठाकुर जिम्बाब्वे के आगामी दौरे के दौरान भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम में कदम रखेंगे तो यह किसी अनुभवहीन खिलाड़ी की कहानी नहीं होगी।
यह एक ऐसे खिलाड़ी की कहानी होगी जिसने पिछले लगभग एक दशक से घरेलू क्रिकेट में जमकर पसीना बहाया है। यह एक ऐसे खिलाड़ी की कहानी होगी जिसके पिता ने अपने बेटे को भारतीय टीम की तरफ से खेलने का सपना देखा था।
अब जबकि यह सपना साकार होने के करीब है तब दुर्भाग्य से उनके पिता इसे देखने के लिए जीवित नहीं हैं।
27 वर्षीय ठाकुर को हाल ही में श्रीलंका के भारत ए दौरे से लौटने के बाद नागपुर हवाई अड्डे पर अपना सामान लेने का इंतजार करते समय शायद उनके पेशेवर जीवन का अब तक का सबसे महत्वपूर्ण फोन कॉल आया।

Team India में चयन पर भावुक हुए Yash Thakur, बोले- आज पापा का सपना पूरा हुआ।

यह फोन जिम्बाब्वे दौरे के लिए भारत की टीम में उनके पहली बार चयन की सूचना देने के लिए था। भारतीय टीम इस दौरे में 23 से 26 जुलाई तक तीन टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलेगी।
यश ठाकुर ने पीटीआई से कहा, ‘‘सच कहूं तो मुझे इसकी उम्मीद नहीं थी क्योंकि मैं श्रीलंका दौरे से अभीअभी लौटा था। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे इतनी जल्दी भारतीय टीम में जगह मिल जाएगी।’’
उन्होंने 2017 में लिस्ट ए क्रिकेट में पदार्पण किया था और 57 मैचों में वह 100 विकेट के करीब पहुंच चुके हैं। उन्होंने 74 टी20 मैच खेले हैं, जिनमें दो अलगअलग फ्रेंचाइजी के लिए 22 आईपीएल मैच भी शामिल हैं। इसके अलावा, लखनऊ सुपर जायंट्स के साथ आईपीएल के दौरान भारतीय गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल के साथ उनकी अच्छी जानपहचान भी रही है। ऐसे में ठाकुर को अनुभवहीन कहना गलत होगा।

वह वास्तव में भारतीय क्रिकेट प्रणाली का एक आदर्श उदाहरण हैं, जिन्होंने रणजी ट्रॉफी, दलीप ट्रॉफी, ईरानी कप और विजय हजारे ट्रॉफी खेली हैं और बाद में भारतीय क्रिकेट बोर्ड के संभावित तेज गेंदबाजों की सूची में शामिल किया गया था। उन्हें विश्वास है कि भारत की सीनियर टीम की तरफ से खेलने का उनका सपना जल्द ही सरकार हो जाएगा।
यह सपना सिर्फ उनका ही नहीं था।

उनके पिता रविसिंह ठाकुर भी इसमें पूरी तरह से समर्पित थे, लेकिन 2023 में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया था और वह अब इस सपने को साकार होते देखने के लिए इस दुनिया में नहीं हैं। इसके बाद हालांकि ठाकुर की मां काजल और बड़ी बहन ने उन्हें लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया।

ठाकुर ने कहा ‘‘मुझे अभी भी यकीन नहीं हो रहा है। मैं अभी भी इसे समझ नहीं पा रहा हूं। इसे पूरी तरह से स्वीकार करने में थोड़ा समय लगेगा। घर में सभी लोग काफी खुश हैं और अभी भी सारी भावनाएं उमड़ रही हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह मेरे पिताजी, मेरे परिवार का सपना था कि मैं भारत की तरफ से खेलूं। भारतीय टीम में चयन से यह सपना पूरा हो गया।’’
अपने जीवन के सबसे कठिन दौर के बारे में बात करते हुए, ठाकुर ने याद किया कि कैसे उनके पिता के अचानक निधन ने उन्हें पूरी तरह से तोड़ दिया था।
उन्होंने कहा,‘‘मैं उस समय नागपुर में था। वह मेरे लिए बहुत मुश्किल समय था। मुझे इस क्षति से उबरने में काफी समय लगा।

लेकिन मेरे पिताजी कहते थे कि चाहे कुछ भी हो जाए मुझे अपने सपने को नहीं भूलना है और उसे साकार करने के लिए कड़ी मेहनत जारी रखनी है। उनके इन शब्दों में मुझे हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।’’
ठाकुर को यह स्वीकार करने में कोई संकोच नहीं है कि उनकी क्रिकेट यात्रा का श्रेय उनके मातापिता को जाता है, जिन्होंने मध्यम स्तर के व्यवसायी परिवार से होने की वित्तीय बाधाओं के बावजूद उनका समर्थन किया।

ठाकुर ने कहा, ‘‘उन्होंने मुझे कभी क्रिकेट खेलने से मना नहीं किया। मैंने जो भी फैसला लिया, वे मेरे साथ खड़े रहे। मैं उन्हें इसका पूरा श्रेय देता हूं। मैं एक साधारण परिवार से आता हूं।’’
ठाकुर ने मौजूदा टेस्ट और वनडे कप्तान शुभमन गिल के साथ भारत की अंडर19 टीम के साथ इंग्लैंड का दौरा किया था, लेकिन उस साल उन्हें अंडर19 विश्व कप के लिए टीम में जगह नहीं मिली।

इसके बावजूद उन्होंने कड़ी मेहनत जारी रखी।
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले कुछ समय से मुझे भारत ए की तरफ से खेलने के काफी मौके मिले जिससे मुझे लगने लग गया था कि मैं भारत की सीनियर टीम में जगह बना सकता हूं। लेकिन इसके साथ ही मैं यह अच्छी तरह से समझता था कि इसके लिए मुझे लगातार अच्छा प्रदर्शन करना होगा।

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