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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को साफ करने में छूटेंगे पसीने, जानें कितना लगेगा वक्त..

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को साफ करने में छूटेंगे पसीने, जानें कितना लगेगा वक्त..

तेहरान :अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक समझौते की सुगबुगाहट के साथ ही दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री व्यापारिक मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (होर्मुज जलडमरूमध्य) को दोबारा खोलने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। दोनों देशों के आला अधिकारियों के मुताबिक, समझौते पर हस्ताक्षर होने के तुरंत बाद इस रूट को साफ करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों और जानकारों का कहना है कि इस पूरे जलमार्ग को माइंस (बारूदी सुरंगों) से मुक्त कर पूरी तरह सुरक्षित बनाने में न्यूनतम 30 दिन से लेकर अधिकतम 6 महीने तक का समय लग सकता है। इसकी मुख्य वजह युद्ध के दौरान ईरान द्वारा अमेरिकी नौसेना को रोकने के लिए पानी के नीचे बिछाया गया बारूद का खतरनाक जाल है।

हर एक मीटर पर एक किलो बारूद का खौफनाक गणित

अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के हवाले से जो सनसनीखेज आंकड़े सामने आए हैं, वे वैश्विक व्यापार के लिए बेहद डरावने हैं। अमेरिकी खुफिया एजेंसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने होर्मुज के संकरे समुद्री रास्ते में पानी के नीचे ‘माहम-3’ (Maham-3) नामक 100 से अधिक घातक माइंस तैनात कर रखी हैं। इस अत्याधुनिक माइंस की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके महज एक यूनिट में करीब 340 किलोग्राम अत्यधिक शक्तिशाली विस्फोटक भरा होता है। गणितीय अनुमान के मुताबिक, होर्मुज के पानी के नीचे कुल 34,000 किलो बारूद एक्टिव मोड में है, जिसका मतलब यह हुआ कि इस समुद्री मार्ग के हर एक मीटर के दायरे में औसतन 1 किलो बारूद सेट है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन है 34 किमी चौड़ा यह रूट

34 किलोमीटर चौड़ा होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फारस की खाड़ी का प्रवेश द्वार माना जाता है। सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और कतर जैसे खाड़ी के तमाम बड़े देश इसी संकरे जलमार्ग के जरिए पूरी दुनिया में कच्चे तेल (Crude Oil) और एलएनजी (LNG) की आपूर्ति करते हैं। वैश्विक स्तर पर होने वाली कुल तेल और गैस सप्लाई का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा अकेले इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में इस रूट के बंद होने या यहां माइंस का खतरा होने मात्र से वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें आसमान छूने लगती हैं।

30 दिन या 6 महीने? सफाई अभियान पर पेंटागन और विशेषज्ञों में मतभेद

हालांकि ईरान डील के बाद इस रूट को तुरंत खोलने का दावा किया जा रहा है, लेकिन पानी के नीचे से बारूद हटाना बेहद जटिल और जोखिम भरा काम है। जानकारों का कहना है कि अगर हाई-स्पीड ऑपरेशन चलाया गया तो भी कम से कम 30 दिन का समय लगेगा। वहीं, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ‘पेंटागन’ का अनुमान इससे कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। पेंटागन के सैन्य रणनीतिकारों का मानना है कि समुद्र की गहराइयों में बिछी इन सभी माइंस को पूरी तरह निष्क्रिय और नष्ट करने में कम से कम 6 महीने का लंबा वक्त लग सकता है।

फ्रांस और ब्रिटेन के अत्याधुनिक युद्धपोत संभालेंगे मोर्चा

ईरान ने आधिकारिक तौर पर माइंस हटाने की अपनी रणनीति साझा नहीं की है, लेकिन माना जा रहा है कि वह इस बेहद तकनीकी काम में यूरोपीय देशों की मदद ले सकता है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पहले ही बयान जारी कर कहा है कि समझौते के बाद फ्रांस होर्मुज को बारूद मुक्त करने में केंद्रीय भूमिका निभाने के लिए तैयार है। इसके संकेत तब भी मिले जब फ्रांस और ब्रिटेन ने बारूद खोजने और नष्ट करने वाले (Mine Countermeasures Vessels) अपने अत्याधुनिक जहाजों को साइप्रस की ओर रवाना कर दिया था।

मुफ्त आवाजाही या पर्यावरण टैक्स? ओमान के साथ ईरान का नया प्लान

अमेरिका और ईरान के बीच हो रही इस महाडील में होर्मुज जलमार्ग मुख्य केंद्र बिंदु बना हुआ है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति और वार्ता दल के प्रमुख जेडी वेंस के मुताबिक, समझौते के तुरंत बाद ईरान इस रूट को खोलने के लिए राजी हो गया है और वेंस ने दावा किया कि ईरान इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लेगा। हालांकि, अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक ईरान इस रणनीतिक रूट से ‘पर्यावरण टैक्स’ वसूलने की फिराक में है। इसके लिए ईरान अपने पड़ोसी देश ओमान के साथ मिलकर एक नया कानूनी प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जो आने वाले दिनों में नया विवाद खड़ा कर सकता है।

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