
बेतिया: बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया में पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर ले जाए जा रहे युवक की मौत के बाद मामला गरमा गया है। मृतक की पहचान दिलशाद अंसारी के रूप में हुई है। परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई और युवक की मौत की परिस्थितियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। वहीं, पुलिस का कहना है कि दिलशाद चलती गाड़ी से कूदकर घायल हो गए थे और अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। फिलहाल घटना की जांच की जा रही है।
रात में घर से ले गई थी पुलिस
परिजनों के मुताबिक, बानूछापर और सहोदरा थाने की पुलिस रात करीब दो बजे दिलशाद को उनके घर से अपने साथ ले गई थी। सुबह लगभग पांच बजे परिवार को फोन आया कि दिलशाद की तबीयत बिगड़ गई है।
परिवार के सदस्य जब अस्पताल पहुंचे, तो उन्हें दिलशाद की मौत की जानकारी मिली। इसके बाद घर में मातम छा गया। परिजनों ने दावा किया कि दिलशाद के सिर पर गंभीर चोट थी और माथा फटा हुआ था। उनका कहना है कि वे युवक की मौत की असली वजह जानना चाहते हैं और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
दिलशाद की पत्नी नगमा खातून और पिता अकबर अंसारी ने घटना को लेकर सवाल उठाए हैं। परिवार के मुताबिक, दिलशाद की महज चार महीने की बेटी है, जिसके सिर से पिता का साया उठ गया है।
पुलिस ने बताई अलग कहानी
बेतिया पुलिस ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर घटना के संबंध में अपना पक्ष रखा है। पुलिस के अनुसार, दिलशाद अंसारी सहोदरा थाना कांड संख्या 65/25 में आरोपी थे। यह मामला 2 अगस्त 2025 को एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज किया गया था।
पुलिस का कहना है कि दिलशाद को बानूछापर से गिरफ्तार करने के बाद सहोदरा थाने ले जाया जा रहा था। इसी दौरान प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शिकारपुर थाना क्षेत्र में वह चलती पुलिस गाड़ी से कूद गए। पुलिस के मुताबिक, इस घटना में उन्हें गंभीर चोटें आईं।
नरकटियागंज से बेतिया अस्पताल किया गया रेफर
पुलिस के अनुसार, घायल दिलशाद को मौके पर मौजूद जवानों ने तत्काल अनुमंडलीय अस्पताल, नरकटियागंज पहुंचाया। उनकी गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए जीएमसीएच, बेतिया रेफर कर दिया।
पुलिस का दावा है कि बेतिया अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने दिलशाद को मृत घोषित कर दिया। हालांकि, परिजनों के आरोप और पुलिस के बयान के बीच घटना की परिस्थितियों को लेकर सवाल बने हुए हैं।
मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत जांच
बेतिया पुलिस ने कहा है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप मामले में निष्पक्ष जांच के लिए विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है।
फिलहाल मौत की वास्तविक वजह और घटनाक्रम की पूरी जानकारी सामने आना बाकी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, चिकित्सकीय तथ्यों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों से यह स्पष्ट होने में मदद मिल सकती है कि युवक को चोटें किन परिस्थितियों में लगीं।
परिजन मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही घटना से जुड़े आरोपों और पुलिस के दावे की पुष्टि हो सकेगी।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध रिपोर्ट और पुलिस के आधिकारिक पक्ष के आधार पर तैयार की गई है। परिजनों के आरोपों और पुलिस के दावे की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। मौत की परिस्थितियों का अंतिम निष्कर्ष जांच और संबंधित साक्ष्यों के आधार पर ही निकलेगा।



