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Zojila Tunnel: 11,578 फीट की ऊंचाई पर भारत ने कर दिखाया कमाल, 13 km लंबी जोजिला टनल के दोनों छोर जुड़े

भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग के इतिहास में आज का दिन एक स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होने वाला मील का पत्थर साबित हुआ है। समुद्र तल से लगभग 11,578 फीट की ऊंचाई पर बन रही जोजिला टनल के 13.153 किलोमीटर लंबे मुख्य हिस्से के दोनों छोरों को आज सफलतापूर्वक आपस में जोड़ दिया गया है। यह ऐतिहासिक कामयाबी न केवल भारतीय इंजीनियरों के अदम्य साहस को दर्शाती है, बल्कि कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए एक नए युग की शुरुआत है।

Zojila Tunnel: 11,578 फीट की ऊंचाई पर भारत ने कर दिखाया कमाल, 13 km लंबी जोजिला टनल के दोनों छोर जुड़े
Zojila Tunnel: 11,578 फीट की ऊंचाई पर भारत ने कर दिखाया कमाल, 13 km लंबी जोजिला टनल के दोनों छोर जुड़े

पहाड़ों का सीना चीरकर बनाई गई यह सुरंग दुनिया की सबसे लंबी सिंगलट्यूब, दोनों तरफ से आनेजाने वाली टनल है, जो इतनी ज्यादा ऊंचाई पर स्थित है। वर्तमान में सोनमर्ग से द्रास, करगिल और लद्दाख की ओर जाने वाले यात्रियों और वाहनों को बेहद खतरनाक और संकरे जोजिला पास से होकर गुजरना पड़ता है। यह रास्ता तीखे मोड़ों, अचानक होने वाली बर्फबारी और खराब मौसम के कारण देश के सबसे चुनौतीपूर्ण रास्तों में से एक माना जाता है। इस सुरंग के पूरी तरह शुरू होने के बाद यात्रियों का यह साढ़े तीन घंटे का जोखिम भरा सफर घटकर मात्र 15 मिनट का रह जाएगा। यह टनल जम्मूकश्मीर के बालटाल और लद्दाख के मनिमार्ग को सीधे और सुरक्षित तरीके से जोड़ेगी।

12 महीने रहेगी लद्दाख से कनेक्टिविटी

लद्दाख के लोगों के लिए सर्दियों का मौसम किसी अभिशाप से कम नहीं होता था। हर साल भारी बर्फबारी और खतरनाक हिमस्खलन के कारण जोजिला दर्रा कई महीनों के लिए पूरी तरह बंद हो जाता था। इसके चलते लद्दाख का संपर्क देश के बाकी हिस्सों से लगभग 5 से 6 महीने तक पूरी तरह कट जाता था। सर्दियों के महीनों में वहां राशन, दवाइयों और जरूरी चीजों की भारी किल्लत हो जाती थी। लेकिन जोजिला सुरंग के दोनों छोर जुड़ने के बाद अब यह समस्या हमेशा के लिए दफन हो जाएगी। अब साल के पूरे 12 महीने और हर मौसम में कश्मीर से लद्दाख तक वाहनों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के संभव हो सकेगी।

भारतीय सेना की बढ़ेगी ताकत

इस महासुरंग का सबसे बड़ा रणनीतिक लाभ भारतीय सेना को मिलेगा। चीन और पाकिस्तान की सीमाओं से सटे इस संवेदनशील इलाके में अब हर मौसम में सैनिकों, भारी टैंकों और सैन्य उपकरणों की आवाजाही बेहद आसान हो जाएगी, जिससे देश की सीमावर्ती सुरक्षा कई गुना मजबूत होगी।

टूरिज्म को लगेंगे पंख

स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए यह टनल किसी वरदान से कम नहीं है। सालभर कनेक्टिविटी रहने से लद्दाख, कारगिल और सोनमर्ग जैसे खूबसूरत पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की संख्या में भारी इजाफा होगा। सर्दियों में भी टूरिज्म चालू रहने से स्थानीय होटलों, होमस्टे, परिवहन और स्थानीय हस्तशिल्प व्यापार से जुड़े लोगों को रोजगार के बंपर नए अवसर मिलेंगे।

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