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​अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप की परीक्षा

वॉशिंगटन। अमेरिका में 2026 के मध्यावधि चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों, उनकी सरकार के फैसलों और देश के मौजूदा राजनीतिक माहौल के बीच चुनावी मुकाबले पर सबकी नजरें टिकी हैं। जिन सीटों को पारंपरिक रूप से किसी एक पार्टी के लिए सुरक्षित माना जाता रहा है, वहां भी मुकाबले को लेकर चर्चा तेज होने की खबरें सामने आ रही हैं। इस बदलते चुनावी माहौल में उम्मीदवार और राजनीतिक संगठन प्रचार अभियान पर भारी रकम खर्च कर रहे हैं।

​अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप की परीक्षा

अमेरिका में मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच में होते हैं। इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा की सभी सीटों और सीनेट की लगभग एकतिहाई सीटों के लिए मतदान होता है। इनके नतीजे राष्ट्रपति की पार्टी की संसद में स्थिति और अगले दो वर्षों के राजनीतिक एजेंडे को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए ये चुनाव केवल स्थानीय प्रतिनिधियों के चयन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि इन्हें राष्ट्रपति के नेतृत्व और सरकार की नीतियों के प्रति मतदाताओं के रुख को समझने के महत्वपूर्ण अवसर के रूप में भी देखा जाता है।

ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट, चुनाव पर पड़ सकता है असर

अमेरिका के चुनावी माहौल में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है। प्यू रिसर्च सेंटर की 8 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, 28 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच किए गए सर्वेक्षण में ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 30 प्रतिशत दर्ज की गई। सर्वेक्षण में शामिल 63 प्रतिशत मतदाताओं ने कहा कि कांग्रेस के लिए उनका वोट तय करने में ट्रंप एक कारक हैं। इनमें 44 प्रतिशत ने कहा कि उनका वोट ट्रंप के विरोध में होगा, जबकि 19 प्रतिशत ने इसे ट्रंप के समर्थन में वोट बताया।

ये आंकड़े बताते हैं कि राष्ट्रपति की छवि और उनके कामकाज को लेकर मतदाताओं के विचार चुनावी बहस का अहम हिस्सा बने हुए हैं। हालांकि, किसी सर्वेक्षण के नतीजों को सभी मतदाताओं की अंतिम राय या चुनाव परिणाम का निश्चित संकेत नहीं माना जा सकता।

महंगाई और आर्थिक मुद्दे बने चुनावी बहस का केंद्र

मध्यावधि चुनाव में अमेरिकी अर्थव्यवस्था मतदाताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल है। रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें, ईंधन और ऊर्जा की लागत तथा परिवारों के खर्च से जुड़े सवाल चुनाव प्रचार में प्रमुखता से उठाए जा रहे हैं।

प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वेक्षण के अनुसार, पंजीकृत मतदाताओं में 84 प्रतिशत ने अर्थव्यवस्था को अपने वोट के लिए बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। ऐसे में उम्मीदवारों के लिए केवल अपनी पार्टी का समर्थन जुटाना ही नहीं, बल्कि मतदाताओं को आर्थिक समस्याओं के समाधान को लेकर भरोसा दिलाना भी बड़ी चुनौती है।

सुरक्षित मानी जाने वाली सीटों पर भी क्यों बढ़ी हलचल?

अमेरिका की चुनावी राजनीति में कुछ निर्वाचन क्षेत्रों को लंबे समय से रिपब्लिकन या डेमोक्रेटिक पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। लेकिन इस बार कुछ ऐसी सीटों पर भी अतिरिक्त प्रचार और चुनावी संसाधन लगाए जा रहे हैं, जिन्हें पहले अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता था।

रॉयटर्स की 27 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े चुनावी रणनीतिकारों के अनुसार, आंतरिक सर्वेक्षणों में संभावित चुनौती के संकेत मिलने के बाद पार्टी और उससे जुड़े संगठनों ने 39 से अधिक प्रतिनिधि सभा सीटों पर खर्च शुरू किया, जहां इस चुनाव चक्र में पहले पैसा नहीं लगाया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, इस कदम के पीछे मतदाताओं की नाराजगी और ट्रंप की नीतियों को लेकर संभावित प्रतिक्रिया की चिंता भी एक वजह थी।

इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि चुनावी रणनीति बनाने वाले संगठन उन सीटों पर भी नजर रख रहे हैं, जहां मुकाबला पहले से तय मानकर चलना जोखिम भरा हो सकता है। हालांकि, अतिरिक्त खर्च का मतलब यह नहीं है कि किसी सीट पर परिणाम निश्चित रूप से बदल जाएगा।

प्रचार अभियान पर करोड़ों डॉलर खर्च

चुनाव नजदीक आने के साथ राजनीतिक विज्ञापनों पर खर्च में भी तेजी आई है। टेलीविजन, डिजिटल प्लेटफॉर्म और अन्य माध्यमों के जरिए उम्मीदवार मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

द वॉशिंगटन पोस्ट के 8 अक्टूबर को प्रकाशित विश्लेषण के मुताबिक, 2026 के मध्यावधि चुनावों के लिए समीक्षा किए गए 8,000 से अधिक विज्ञापनों पर कुल खर्च लगभग 1.6 अरब डॉलर था। इसमें रिपब्लिकन पक्ष का खर्च लगभग 1 अरब डॉलर और डेमोक्रेटिक पक्ष का लगभग 66.1 करोड़ डॉलर बताया गया। विश्लेषण में अर्थव्यवस्था को विज्ञापनों में सबसे अधिक उठाए गए मुद्दों में शामिल पाया गया।

इतनी बड़ी रकम खर्च किए जाने के बावजूद चुनाव में सफलता की गारंटी नहीं होती। विज्ञापनों के जरिए मतदाताओं तक संदेश पहुंचाया जा सकता है, लेकिन वोट देने का अंतिम फैसला उम्मीदवारों, स्थानीय मुद्दों, पार्टी की छवि और मतदाताओं की प्राथमिकताओं जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है।

रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों के सामने क्या चुनौती?

रिपब्लिकन पार्टी के लिए चुनौती अपने समर्थकों को मतदान केंद्रों तक पहुंचाने और उन मतदाताओं का भरोसा बनाए रखने की है, जो आर्थिक स्थिति या सरकार की नीतियों से असंतुष्ट हो सकते हैं। वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी इस असंतोष को चुनावी समर्थन में बदलने की कोशिश कर रही है।

दोनों पक्षों के लिए प्रचार अभियान का बड़ा हिस्सा अर्थव्यवस्था, महंगाई, सरकार के कामकाज और भविष्य की नीतियों पर केंद्रित है। ट्रंप की लोकप्रियता को लेकर सामने आए सर्वेक्षणों ने भी चुनावी बहस को प्रभावित किया है। फिर भी स्थानीय उम्मीदवारों की लोकप्रियता और अलगअलग राज्यों की परिस्थितियां नतीजों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

3 नवंबर को होगा मतदान

अमेरिका में 2026 के मध्यावधि चुनाव के लिए 3 नवंबर की तारीख निर्धारित है। इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा की सभी सीटों और सीनेट की लगभग एकतिहाई सीटों पर मतदान होगा। इनके नतीजों से यह तय होगा कि कांग्रेस में दोनों प्रमुख पार्टियों की स्थिति कैसी रहती है और राष्ट्रपति ट्रंप को अपने शेष कार्यकाल में विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कितना समर्थन मिलता है।

 

 

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