
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में एक ऐसा रहस्यमयी और आस्था से जुड़ा स्थल मौजूद है, जो आज भी लोगों को हैरान कर देता है. भीषण गर्मी और सूखे के हालात में जहां जलस्रोत सूख जाते हैं. वहीं खंडवा की प्रसिद्ध ‘सीता बावड़ी’ आज भी निरंतर जल से भरी रहती है. यह स्थान न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि अपने भीतर हजारों साल पुरानी एक अद्भुत कहानी भी समेटे हुए है.
त्रेतायुग से जुड़ी है मान्यता
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह स्थल त्रेतायुग के समय का है, जब भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण वनवास के दौरान इस क्षेत्र से गुजरे थे. उस समय यह इलाका खांडव वन के नाम से जाना जाता था. कहा जाता है कि यात्रा के दौरान माता सीता को प्यास लगी, लेकिन आसपास कहीं पानी नहीं था. तब भगवान श्रीराम ने अपने बाण से धरती में प्रहार किया, जिससे वहां से जलधारा फूट पड़ी. यही जलधारा आज भी इस स्थान पर बह रही है और इसी के ऊपर बाद में ‘सीता बावड़ी’ का निर्माण किया गया.
आज भी नहीं सूखता पानी
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि सदियों बीत जाने के बाद भी इस बावड़ी का पानी कभी नहीं सूखता. भीषण गर्मी में भी यहां जल का स्तर बना रहता है. बावड़ी के अंदर एक प्राकृतिक झिर (स्रोत) है, जहां से लगातार पानी निकलता रहता है. यह बावड़ी खंडवा के प्रसिद्ध रामेश्वर मंदिर के ठीक पीछे स्थित है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. लोग इसे भगवान राम का चमत्कार मानते हैं और यहां के जल को पवित्र मानकर ग्रहण भी करते हैं.
आस्था के साथ इतिहास की झलक
यह स्थान करीब 5000 साल पुराना माना जाता है और आज भी लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है. जब श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और उस कुंड को देखते हैं, जहां से जलधारा निकली थी, तो उन्हें ऐसा महसूस होता है जैसे वे इतिहास के किसी जीवंत पल के साक्षी बन गए हों.
संरक्षण की जरूरत
यह स्थल धार्मिक और ऐतिहासिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि इसकी देखरेख उतनी अच्छी नहीं हो पा रही है. यहां बने पुराने पत्थरों के मंडप और बावड़ी के हिस्से धीरे-धीरे जर्जर होते जा रहे हैं. स्थानीय निवासी नंदनी अत्रे और अन्य लोगों का मानना है कि यदि नगर निगम और पुरातत्व विभाग इस पर ध्यान दें, तो यह जगह न सिर्फ सुरक्षित रह सकती है, बल्कि खंडवा का एक प्रमुख पर्यटन स्थल भी बन सकती है.



