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​नेचुरल या हर्बल लिखा प्रोडक्ट क्या स्किन के लिए है सेफ? आयुर्वेद के डॉक्टर से समझें

महिलाओं की रोजमर्रा की देखभाल और पर्सनल हाइजीन से जुड़े उत्पादों में इन दिनों नेचुरल और हर्बल जैसे शब्द खूब देखने को मिलते हैं. एलोवेरा, नीम, हल्दी, मोरिंगा और कैमोमाइल जैसे पौधों से बने या इनके अर्क वाले प्रोडक्ट बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं. कई लोग इन्हें सामान्य कॉस्मेटिक उत्पादों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित मानते हैं. लेकिन क्या किसी प्रोडक्ट पर नेचुरल या हर्बल लिखा होना उसे हर किसी की त्वचा के लिए सुरक्षित बना देता है?

​नेचुरल या हर्बल लिखा प्रोडक्ट क्या स्किन के लिए है सेफ? आयुर्वेद के डॉक्टर से समझें

एलोवेरा से कैमोमाइल तक, क्यों बढ़ रहा इस्तेमाल?

एलोवेरा का इस्तेमाल लंबे समय से त्वचा को मॉइस्चराइज करने और ठंडक देने के लिए किया जाता रहा है. इसी वजह से यह कई स्किन केयर प्रोडक्ट्स में शामिल किया जाता है. कैमोमाइल का इस्तेमाल भी त्वचा को शांत करने वाले गुणों के लिए किया जाता है और यह संवेदनशील त्वचा के लिए बनाए गए कुछ उत्पादों में पाया जाता है.

नीम का पारंपरिक इस्तेमाल त्वचा और साफसफाई से जुड़ी देखभाल में होता रहा है. आज इसके अर्क का इस्तेमाल साबुन, शैंपू और कुछ अन्य हाइजीन उत्पादों में किया जाता है.

मोरिंगा और हल्दी भी बने स्किन केयर का हिस्सा

मोरिंगा यानी सहजन की पत्तियों में कई पोषक तत्व और पौधों से मिलने वाले जैविक यौगिक पाए जाते हैं. इसके संभावित स्वास्थ्य और त्वचा संबंधी गुणों पर वैज्ञानिक शोध जारी है. कुछ कॉस्मेटिक और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स में मोरिंगा एक्सट्रैक्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है.

वहीं, हल्दी को आयुर्वेद में हरिद्रा कहा जाता है. इसका इस्तेमाल पारंपरिक देखभाल में लंबे समय से होता रहा है. आधुनिक स्किन केयर में भी हल्दी और इसके कुछ यौगिकों का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि, किसी पौधे में संभावित जैविक गुण पाए जाने का मतलब यह नहीं है कि उससे बना हर उत्पाद बीमारी का इलाज या रोकथाम कर सकता है.

नेचुरल लिखा है तो क्या बिना सोचे लगा सकते हैं?

नेशनल एकेडमी ऑफ आयुर्वेद के सदस्य वैद्य अच्युत कुमार त्रिपाठी के मुताबिक कई औषधीय पौधों में एंटीऑक्सीडेंट और त्वचा को आराम देने वाले संभावित गुणों का अध्ययन किया जा रहा है. लेकिन किसी पौधे का पारंपरिक इस्तेमाल अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह किसी बीमारी का इलाज कर सकता है.

विशेषज्ञों के मुताबिक, नेचुरल या हर्बल लेबल को सुरक्षा की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए. पौधों से प्राप्त कुछ तत्व भी कुछ लोगों में एलर्जी, जलन या त्वचा पर दूसरी तरह की प्रतिक्रिया पैदा कर सकते हैं. यह जोखिम खासतौर पर संवेदनशील त्वचा या शरीर के इंटिमेट हिस्सों पर इस्तेमाल किए जाने वाले उत्पादों में महत्वपूर्ण हो सकता है.

इंटिमेट एरिया में ज्यादा सावधानी जरूरी

इंटिमेट एरिया की त्वचा शरीर के कई दूसरे हिस्सों की तुलना में अधिक संवेदनशील होती है. इसलिए वहां किसी भी नए प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने से पहले उसके इंग्रेडिएंट्स और इस्तेमाल का तरीका देखना जरूरी है. खुशबू, एसेंशियल ऑयल या कई तरह के बोटेनिकल एक्सट्रैक्ट्स कुछ लोगों में इर्रिटेशन पैदा कर सकते हैं.

अगर किसी उत्पाद को लगाने के बाद जलन, खुजली, लालिमा, सूजन या असामान्य परेशानी महसूस हो तो उसका इस्तेमाल रोक देना चाहिए. लक्षण बने रहें या बढ़ें तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है.

आखिर क्या देखें?

किसी भी स्किन केयर या पर्सनल हाइजीन प्रोडक्ट को खरीदते समय केवल नेचुरल या हर्बल शब्द देखकर फैसला नहीं करना चाहिए. नेचुरल का मतलब हमेशा हर किसी के लिए सेफ नहीं होता. किसी भी प्रोडक्ट की सेफ्टी उसके पूरे फॉर्मूलेशन, इस्तेमाल की मात्रा और व्यक्ति की त्वचा पर निर्भर करती है.

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