बच्चों की अच्छी सेहत सिर्फ उनकी लंबाई और वजन बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी हड्डियों, मांसपेशियों और जोड़ों का सही विकास भी उतना ही अहम है. बचपन में हड्डियों का मजबूत होना आगे चलकर बेहतर शारीरिक क्षमता और हेल्दी लाइफ की नींव रखता है. हालांकि, कई बार मातापिता बच्चों के पैरों में दर्द, चलते समय लंगड़ाने, बारबार गिरने या शारीरिक गतिविधियों से बचने जैसे लक्षणों को सामान्य विकास का हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं.

बीएलकेमैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली के चेयरपर्सन, पीडियाट्रिक डिपार्टमेंट डेवलपमेंट एवं प्रिंसिपल डायरेक्टर पीडियाट्रिक्स, डॉ. विवेक जैन इसे एक बड़ी समस्या बताते हैं. उनके मुताबिक ये हड्डियों के कमजोर होने का लक्षण है. जानें इसके बारे में…
बच्चों में हड्डियों का विकास क्यों है महत्वपूर्ण?
बचपन और यंग ऐज में हड्डियों का बनना और मजबूती के अहम चरण होते हैं. इस दौरान शरीर में हड्डियों का विकास तेजी से होता है. कैल्शियम, विटामिन डी, प्रोटीन और संतुलित आहार हड्डियों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इसके साथ ही, दौड़ना, खेलना, कूदना और उम्र के अनुरूप अन्य शारीरिक गतिविधियां हड्डियों और मांसपेशियों के स्वस्थ विकास में मदद करती हैं.
डॉक्टर कहते हैं कि बच्चों के शारीरिक विकास के दौरान उनकी हड्डियों और जोड़ों की सेहत पर खास ध्यान देना जरूरी है. सही न्यूट्रिएंट्स लेना, धूप लेना, खेलकूद और समयसमय पर हेल्थ चेकअप के जरिए हड्डियों के बेहतर विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है.
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
बच्चों में हड्डियों और जोड़ों से संबंधित समस्याएं कई रूपों में सामने आ सकती हैं. लगातार दर्द, जोड़ों में सूजन, चलने में परेशानी, लंगड़ाना, हाथपैरों की गतिविधियों में कमी या किसी अंग के आकार अथवा बनावट में असामान्यता ऐसे संकेत हैं, जिन पर मातापिता को ध्यान देना चाहिए. अगर बच्चा किसी खास एक्टिविटी से बारबार बचता है या पहले की तुलना में कम एक्टिव हो गया है, तो इसके पीछे दर्द या शारीरिक परेशानी भी कारण हो सकती है.
हालांकि, हर बार पैरों में दर्द किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता. लेकिन लगातार बने रहने वाले दर्द, एक ही जगह पर दर्द, सूजन या चलने में परेशानी होने पर डॉक्टर से सलाह लेनी जरूरी है. अगर बच्चा अचानक चलने में असमर्थ हो जाए, उसे तेज दर्द हो या जोड़ों में सूजन के साथ बुखार आए, तो तत्काल चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए.
सही पोषण से मजबूत होंगी हड्डियां
हड्डियों को हेल्दी रखने के लिए उनके डाइट में दूध, दही, पनीर, रागी, तिल, दालें और दूसरी खाने की चीजें शामिल की जा सकती हैं. विटामिन डी कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है, इसलिए इसकी पर्याप्त मात्रा भी जरूरी है. बच्चों में विटामिन डी या कैल्शियम की कमी की आशंका होने पर डॉक्टर की सलाह से जांच और आवश्यक उपचार कराया जाना चाहिए. बिना चिकित्सीय सलाह के सप्लीमेंट देना उचित नहीं है.
इसके अलावा, बच्चों को लंबे समय तक मोबाइल, टेलीविजन या अन्य स्क्रीन के सामने बैठने के बजाय फिजिकल एक्टिविटी के लिए भेजना चाहिए. उम्र के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि से मांसपेशियां मजबूत होती हैं, शरीर का संतुलन बेहतर होता है और हड्डियों के विकास को सहारा मिलता है.
बढ़ती उम्र के साथ सही निगरानी भी जरूरी
बच्चों में कुछ बोन्स और जॉइंट से जुड़ी समस्याएं जन्म से मौजूद हो सकती हैं, जबकि कुछ विकास के दौरान सामने आती हैं. पैरों का असामान्य रूप से मुड़ना, चाल में बदलाव, पैरों की लंबाई में स्पष्ट अंतर या शारीरिक विकास में असामान्यता दिखने पर विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए. इसी तरह, खेलकूद के दौरान लगी चोट को केवल सामान्य दर्द समझ कर लंबे समय तक टालना भी उचित नहीं है.



