
गलत खान-पान, कम पानी पीना, फाइबर की कमी और शारीरिक गतिविधि कम होने के कारण कब्ज की समस्या काफी आम हो गई है। इसमें मल सख्त होना, कई दिनों तक पेट साफ न होना या टॉयलेट में ज्यादा जोर लगाना जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
कभी-कभार होने वाली कब्ज में डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव मदद कर सकते हैं। ऐसे में इसबगोल की भूसी जैसे फाइबर का इस्तेमाल कुछ लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है। इसे दूध के साथ लेने का घरेलू चलन भी है, हालांकि हर व्यक्ति को दूध आसानी से पचे, यह जरूरी नहीं है।
इसबगोल कब्ज में कैसे करता है मदद?
इसबगोल यानी Psyllium Husk एक तरह का घुलनशील फाइबर है। यह आंतों में पानी सोखकर जेल जैसा बनता है, जिससे मल में नमी और मात्रा बढ़ सकती है और उसे बाहर निकालना आसान हो सकता है।
इसबगोल लेते समय पर्याप्त पानी पीना बहुत जरूरी है। कम पानी के साथ ज्यादा फाइबर लेने से उल्टा कब्ज बढ़ सकती है। इसलिए इसे हमेशा पर्याप्त तरल पदार्थ के साथ लेना चाहिए।
सेंधा नमक मिलाने से क्या फायदा?
कई घरेलू नुस्खों में इसबगोल के साथ थोड़ी मात्रा में सेंधा नमक मिलाया जाता है। हालांकि, कब्ज से राहत में मुख्य भूमिका फाइबर और पर्याप्त पानी की होती है। सेंधा नमक को कब्ज का प्रमाणित इलाज नहीं माना जा सकता।
अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर, किडनी की बीमारी या शरीर में पानी रुकने की समस्या है तो नमक की मात्रा को लेकर विशेष सावधानी रखें।
रात में दूध के साथ लेना जरूरी है क्या?
कब्ज के लिए इसबगोल को दूध के साथ लेना जरूरी नहीं है। इसे पानी जैसे पर्याप्त तरल पदार्थ के साथ भी लिया जा सकता है। जिन लोगों को लैक्टोज इनटॉलरेंस है, उन्हें दूध के साथ लेने पर गैस, पेट फूलना या दस्त जैसी परेशानी हो सकती है।
इसलिए अपने शरीर की सहनशीलता के अनुसार इसका सेवन करना बेहतर है।
कब्ज से बचने के 5 आसान तरीके
1. सुबह की रूटीन बनाएं
सुबह पर्याप्त पानी पीने और रोज एक निश्चित समय पर टॉयलेट जाने की आदत मददगार हो सकती है। खासकर नाश्ते के बाद मल त्याग की इच्छा बढ़ सकती है। टॉयलेट में जरूरत से ज्यादा देर बैठने और जोर लगाने से बचें।
2. टॉयलेट में फोन चलाने से बचें
टॉयलेट सीट पर लंबे समय तक बैठे रहना और बिना जरूरत जोर लगाना बवासीर जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए जरूरत पूरी होने के बाद टॉयलेट से बाहर आ जाएं।
3. रोज थोड़ा व्यायाम करें
कम शारीरिक गतिविधि कब्ज की समस्या को बढ़ा सकती है। रोजाना पैदल चलना, हल्की एक्सरसाइज या भोजन के बाद थोड़ी देर टहलना आंतों की गतिविधि के लिए फायदेमंद हो सकता है।
4. डाइट में फाइबर बढ़ाएं
फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, ओट्स, दलिया, चिया सीड्स और अलसी जैसे खाद्य पदार्थ फाइबर के अच्छे स्रोत हैं। पपीता, अमरूद, नाशपाती और हरी सब्जियों को भी डाइट में शामिल किया जा सकता है।
फाइबर अचानक बहुत ज्यादा बढ़ाने के बजाय धीरे-धीरे बढ़ाएं, क्योंकि इससे गैस और पेट फूलने की समस्या हो सकती है।
5. पानी पर्याप्त पिएं
फाइबर तभी ठीक से काम करता है जब शरीर में पर्याप्त तरल पदार्थ हों। हालांकि, हर व्यक्ति के लिए रोज 2-3 लीटर पानी पीने का एक ही नियम लागू नहीं होता। पानी की जरूरत मौसम, उम्र, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है?
अगर कब्ज लंबे समय से बनी हुई है, बार-बार हो रही है या घरेलू उपायों से राहत नहीं मिल रही है तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। पेट में लगातार दर्द, मल में खून, बिना वजह वजन कम होना, उल्टी या अचानक आंतों की आदत बदलना जैसे लक्षण हों तो इसे नजरअंदाज न करें।
निष्कर्ष: इसबगोल पर्याप्त पानी के साथ कब्ज को मैनेज करने में मदद कर सकता है। इसे दूध के साथ लेना जरूरी नहीं है और सेंधा नमक को भी इलाज नहीं माना जाना चाहिए। कब्ज से राहत के लिए फाइबर युक्त डाइट, पर्याप्त पानी और नियमित शारीरिक गतिविधि सबसे महत्वपूर्ण हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। घरेलू नुस्खे किसी बीमारी के इलाज का विकल्प नहीं हैं। लंबे समय से कब्ज या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह लें।



