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11वीं पास युवक पर देशभर में फर्जी बैंकिंग ऐप बनाने का आरोप, करोड़ों की साइबर ठगी की जांच..

11वीं पास युवक पर देशभर में फर्जी बैंकिंग ऐप बनाने का आरोप, करोड़ों की साइबर ठगी की जांच..

देश में बढ़ते साइबर अपराध के बीच गुजरात के सूरत से एक बड़े फर्जी बैंकिंग ऐप गिरोह का खुलासा हुआ है। पुलिस ने उत्तर प्रदेश से 18 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि उसने अलग-अलग बैंकों, सरकारी सेवाओं और निजी कंपनियों के नाम से बड़ी संख्या में नकली मोबाइल एप्लिकेशन तैयार किए, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया गया।

पुलिस के अनुसार, मामले की जांच एक साइबर धोखाधड़ी की शिकायत मिलने के बाद शुरू हुई। शिकायतकर्ता को मैसेजिंग ऐप के माध्यम से बैंक के नाम पर एक फर्जी एप्लिकेशन भेजा गया था। उसे आधिकारिक ऐप समझकर डाउनलोड करने के बाद उसके मोबाइल की संवेदनशील जानकारी अपराधियों के हाथ लग गई और उसके बैंक खाते से लाखों रुपये निकाल लिए गए।

इसके बाद साइबर विशेषज्ञों ने संदिग्ध एप्लिकेशन का तकनीकी विश्लेषण किया। डिजिटल जांच के आधार पर आरोपी की पहचान की गई और उसे उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस का दावा है कि आरोपी ने विभिन्न बैंकों, सरकारी योजनाओं और निजी संस्थानों के नाम पर कुल 121 फर्जी मोबाइल एप्लिकेशन तैयार किए थे। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि इन ऐप्स का इस्तेमाल देश के विभिन्न हिस्सों में साइबर ठगी के लिए किया गया।

जांच एजेंसियों के अनुसार, इन फर्जी ऐप्स को व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से लोगों तक पहुंचाया जाता था। जैसे ही कोई व्यक्ति इन्हें अपने मोबाइल में इंस्टॉल करता, ऐप कथित रूप से मोबाइल की महत्वपूर्ण जानकारियों और बैंकिंग संबंधी डेटा तक पहुंच बनाने की कोशिश करता था। इसके बाद अपराधी इन जानकारियों का दुरुपयोग कर बैंक खातों से अवैध लेनदेन करते थे।

पुलिस ने आरोपी के कब्जे से मोबाइल फोन और लैपटॉप जब्त किए हैं। इन उपकरणों की डिजिटल फोरेंसिक जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा सके। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर कई अन्य संदिग्धों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

साइबर ठगी से बचने के लिए रखें ये सावधानियां

केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही मोबाइल एप्लिकेशन डाउनलोड करें।

व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, एसएमएस या ईमेल से प्राप्त APK फाइल कभी इंस्टॉल न करें।

किसी भी लिंक या ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें।

ओटीपी, यूपीआई पिन, बैंक पासवर्ड या अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें।

मोबाइल में अनावश्यक परमिशन देने से बचें।

बैंकिंग ऐप और मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम को हमेशा अपडेट रखें।

संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर तुरंत बैंक को सूचित करें और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करें।

साइबर अपराधी अब लोगों को ठगने के लिए फर्जी बैंकिंग ऐप, सरकारी योजनाओं और प्रतिष्ठित संस्थानों के नाम का सहारा ले रहे हैं। थोड़ी सी सतर्कता और केवल आधिकारिक स्रोतों से ऐप डाउनलोड करने की आदत आपको बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकती है।

नोट: यह समाचार पुलिस की प्रारंभिक जांच और दर्ज मामले के आधार पर तैयार किया गया है। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों और सुनवाई के बाद ही होगी।

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