Newborn Branding Superstition Incident: अमरावती जिले में आधुनिकता के दौर में भी मेलघाट के दुर्गम इलाकों में अंधविश्वास की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका एक खौफनाक और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है।

चिखलदरा तहसील के ग्राम रेट्याखेड़ा में 15 दिन की एक नवजात बच्ची की बीमारी ठीक करने के नाम पर उसे जलती दराती से पेट पर चटके दिए गए, मासूम की चीखों से पूरा इलाका सिहर उठा। इस अमानवीय कृत्य के बाद पुलिस ने आरोपी वृद्धा के खिलाफ सख्त कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।
पीड़ित बच्ची की मां यशवंती प्रितेश धुर्वे की 15 दिन की मासूम बेटी का पेट फूल रहा था। उसी समय गांव की ही एक बुजुर्ग महिला भुलई जामुनकर उनके घर आई। बच्ची को देखते ही उसने पुरानी प्रथा का हवाला देते हुए कहा कि इसे डम्मा देना पड़ेगा, तभी इसका पेट ठीक होगा।
अंधविश्वास के चक्कर में न आएं
पुलिस और ने ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों के नागरिकों से किसी भी बीमारी के इलाज के लिए अधविश्वास या झाड़फूंक के चक्कर में न पड़ने की अपील की। बच्चों की तबीयत खराब होने पर तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल या डॉक्टर से ही संपर्क करें। दोषी लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जिंदगी से जूझ रही मासूम
गर्म लोहे से दागे जाने के बाद मासूम बच्ची दर्द से तड़पने लगी और उसकी हालत बिगड़ने लगी, घबराए मातापिता तुरंत बच्ची को लेकर सेमाडोह के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उसका इलाज चल रहा है।
डॉक्टरों के अनुसार, की त्वचा बेहद संवेदनशील होती है और ऐसे अमानवीय कृत्य से संक्रमण का गंभीर खतरा बढ़ जाता है। चिखलदरा थाने में मा ने शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी महिला भुलई जामुनकर के खिलाफ मामला दर्ज किया।
डॉक्टर की सलाह को ठुकरा कर की बर्बरता
बच्ची की मां ने वृद्धा को रोकने की कोशिश की और बताया कि बच्ची को डॉक्टरों की दवा दी जा रही है और इलाज जारी है। लेकिन आरोपी महिला ने मां की बात को सिरे से खारिज कर दिया और डांटते हुए कहा कि तुझे कुछ समझ नहीं आता।
इसके बाद उसने परिजनों की अनसुनी करते हुए घर के चूल्हे पर रखी लोहे की छोटी दराती को लालगर्म किया और 15 दिन की मासूम के नाजुक पेट पर कई जगह चटके दिए,



