बोले छात्रों की आवाज़ पर सरकार ने उठाया कदम, अब मेहनत और मेरिट से तय होगा भविष्य; पंजाब और कर्नाटक के कथित परीक्षा घोटालों का भी किया जिक्र

नई दिल्ली : राज्यसभा में लोक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान सांसद राघव चड्ढा ने विधेयक का समर्थन करते हुए इसे देश का पहला समर्पित एंटीपेपर लीक फ्रेमवर्क बताया। उन्होंने कहा कि वर्षों से पेपर लीक ने लाखों छात्रों की मेहनत और सपनों को नुकसान पहुंचाया है, लेकिन अब संगठित पेपर लीक माफिया के खिलाफ सख्त कानूनी ढांचा तैयार किया गया है।
राघव चड्ढा ने कहा कि NEET सहित विभिन्न परीक्षाओं में छात्रों की शिकायतों को सरकार ने गंभीरता से लिया और प्रधानमंत्री ने परिवार के मुखिया की तरह निर्णय लेते हुए परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक बयानबाजी के बजाय संस्थागत सुधारों का रास्ता चुना गया है।
उन्होंने कहा कि नया कानून पेपर लीक को संगठित अपराध की श्रेणी में लाएगा। इसमें 10 वर्ष तक की सजा, 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने, विशेष जांच दल, फास्ट ट्रैक कोर्ट और समयबद्ध जांच जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। उनका कहना था कि इससे ईमानदार छात्रों को निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था मिलेगी और मेरिट का सम्मान सुनिश्चित होगा।
भाषण के दौरान राघव चड्ढा ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि “एक परीक्षा केवल रैंक तय कर सकती है, किसी छात्र की कीमत नहीं।” उन्होंने छात्र आंदोलनों के राजनीतिकरण से बचने की अपील करते हुए कहा कि यह लड़ाई राजनीतिक दलों की नहीं, बल्कि मेरिट और माफिया के बीच है।
राघव चड्ढा ने अपने भाषण में पंजाब में फार्मेसी भर्ती, PSTET समेत विभिन्न भर्ती परीक्षाओं तथा कर्नाटक में हुए कथित पेपर लीक मामलों का उल्लेख करते हुए जवाबदेही की मांग की। उन्होंने कहा कि देशभर में सामने आई ऐसी घटनाओं ने एक सख्त राष्ट्रीय कानून की आवश्यकता को स्पष्ट किया है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा, “मुझे सुर्खियां नहीं, समाधान चाहिए था।” उन्होंने विश्वास जताया कि नए कानून से परीक्षा प्रणाली अधिक सुरक्षित होगी, पेपर लीक माफिया पर प्रभावी अंकुश लगेगा और अंततः जीत मेहनत करने वाले छात्रों की होगी।



