
बिहार के अररिया जिले के 19 वर्षीय मोनू मेटुरबाला की कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा में है। रिपोर्टों के मुताबिक, मां की बीमारी के दौरान उन्होंने भगवान शिव से मन्नत मांगी थी कि मां के स्वस्थ होने पर वह देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन दौड़कर करेंगे। अब मां की सेहत में सुधार के बाद मोनू अपने संकल्प को पूरा करने के लिए लंबी यात्रा पर निकले हैं। उनके इस प्रयास को लोग माता के प्रति प्रेम और समर्पण से जोड़कर देख रहे हैं।
मां के स्वस्थ होने पर पूरा करने निकले संकल्प
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जब मोनू की मां गंभीर रूप से बीमार थीं, तब उन्होंने भगवान शिव से प्रार्थना की थी। इसी दौरान उन्होंने संकल्प लिया कि मां के ठीक होने पर वह 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने के लिए दौड़ते हुए यात्रा करेंगे।
बताया जा रहा है कि मां की सेहत में सुधार के बाद मोनू ने अपनी यात्रा शुरू कर दी। उनके इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर लोग भावुक प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई लोग इसे मां के प्रति उनके प्रेम और आस्था का प्रतीक मान रहे हैं।
रोजाना करीब 50 किलोमीटर दौड़ने का दावा
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, मोनू ने 15 मार्च 2026 को अपनी यात्रा शुरू की थी। वह रोजाना लगभग 50 किलोमीटर दौड़ने का प्रयास करते हैं और अपनी यात्रा से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करते हैं।
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि वह अब तक 8,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर चुके हैं और 12 में से पांच ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर चुके हैं। हालांकि, उनकी कुल दूरी और अब तक पूरी हुई यात्रा के विवरण की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
क्यों कहा जा रहा है आधुनिक श्रवण कुमार?
भारतीय परंपरा में श्रवण कुमार को माता-पिता की सेवा और उनके प्रति समर्पण के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है। प्रचलित कथा के अनुसार, उन्होंने अपने नेत्रहीन माता-पिता को तीर्थयात्रा कराने के लिए कंधों पर बैठाकर यात्रा की थी।
मोनू की कहानी सामने आने के बाद लोग उनकी तुलना श्रवण कुमार से कर रहे हैं। इसकी वजह उनकी मां के प्रति चिंता और उनके स्वस्थ होने की मनोकामना के साथ लिया गया कठिन संकल्प है। सोशल मीडिया पर कई लोग उन्हें आधुनिक श्रवण कुमार कहकर संबोधित कर रहे हैं।
भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का लक्ष्य
मोनू की यात्रा का उद्देश्य भगवान शिव के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करना बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ये प्रमुख शिव तीर्थस्थल हैं:
- सोमनाथ
- मल्लिकार्जुन
- महाकालेश्वर
- ओंकारेश्वर
- केदारनाथ
- भीमाशंकर
- काशी विश्वनाथ
- त्र्यंबकेश्वर
- बैद्यनाथ
- नागेश्वर
- रामेश्वरम
- घृष्णेश्वर
इन सभी स्थलों के दर्शन पूरे करना मोनू के संकल्प का हिस्सा बताया गया है।
सोशल मीडिया पर मिल रही सराहना
मोनू की यात्रा से जुड़ी पोस्ट सामने आने के बाद कई लोग उनके हौसले और मां के प्रति प्रेम की प्रशंसा कर रहे हैं। उनके प्रयास को आस्था, पारिवारिक लगाव और दृढ़ संकल्प की कहानी के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, लंबी दूरी तक दौड़ना शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसी यात्रा के दौरान आराम, पर्याप्त भोजन-पानी और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है।
सत्या रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी पर आधारित है। मोनू की यात्रा, तय की गई दूरी और ज्योतिर्लिंगों के दर्शन से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।



