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300 से ऊपर पहुंची ब्लड शुगर तो न करें नजरअंदाज! दिल, किडनी और आंखों को हो सकता है नुकसान, कंट्रोल करने के 5 आसान तरीके

डायबिटीज में ब्लड शुगर का बढ़ना आम समस्या है, लेकिन जब शुगर का स्तर 300 mg/dL या उससे ज्यादा पहुंच जाए तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। बहुत ज्यादा ब्लड शुगर लंबे समय तक बनी रहे तो शरीर की रक्त वाहिकाओं और कई महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है। खासतौर पर दिल, किडनी, आंखों और नसों पर इसका असर पड़ सकता है।

डायबिटीज में शरीर या तो पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या फिर कोशिकाएं इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पातीं। इसके कारण ग्लूकोज खून में जमा होने लगता है और ब्लड शुगर बढ़ जाती है। इसलिए डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए सिर्फ दवाओं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। सही खानपान, नियमित शारीरिक गतिविधि और ब्लड शुगर की निगरानी भी जरूरी है।

300 mg/dL से ज्यादा शुगर क्यों है चिंता की बात?

अगर ब्लड शुगर लगातार बहुत ज्यादा बनी रहती है तो समय के साथ रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ सकता है। इससे हृदय रोग, किडनी की समस्या, आंखों की रोशनी से जुड़ी परेशानी और नसों को नुकसान होने का खतरा बढ़ सकता है।

अगर शुगर 300 mg/dL या इससे अधिक आ रही है, खासकर बार-बार ऐसा हो रहा है, तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। बहुत ज्यादा शुगर के साथ उल्टी, पेट दर्द, अत्यधिक प्यास, कमजोरी, भ्रम या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण हों तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए।

क्या सिर्फ दवा खाने से डायबिटीज कंट्रोल हो जाती है?

डायबिटीज की दवा ब्लड शुगर मैनेज करने का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसके साथ लाइफस्टाइल में बदलाव भी जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति दवा लेने के बावजूद लगातार मीठी चीजें, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और ज्यादा प्रोसेस्ड फूड खाता है और शारीरिक गतिविधि बहुत कम करता है, तो ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना मुश्किल हो सकता है।

इसलिए दवा के साथ सही डाइट और नियमित एक्सरसाइज पर ध्यान देना चाहिए।

डायबिटीज कंट्रोल करने के 5 जरूरी टिप्स

1. खाने से पहले सलाद जरूर लें

लंच और डिनर से पहले सलाद लेना डाइट में फाइबर बढ़ाने का आसान तरीका है। खीरा, ककड़ी, पत्ता गोभी और अन्य कम स्टार्च वाली सब्जियों को सलाद में शामिल किया जा सकता है।

फाइबर पाचन की प्रक्रिया को धीमा करने में मदद करता है, जिससे भोजन के बाद ब्लड शुगर तेजी से बढ़ने की संभावना कम हो सकती है।

2. सलाद में कच्चा प्याज शामिल करें

कच्चा प्याज भी सलाद का हिस्सा बनाया जा सकता है। इसमें फाइबर और कई प्राकृतिक पौधों से मिलने वाले यौगिक पाए जाते हैं।

हालांकि, प्याज को डायबिटीज की दवा या ब्लड शुगर कम करने वाला इलाज नहीं माना जाना चाहिए। डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं नियमित रूप से लेते रहें।

3. जौ और मिलेट्स को डाइट में जगह दें

डायबिटीज में अत्यधिक रिफाइंड अनाज की जगह जौ, बाजरा, ज्वार और रागी जैसे साबुत या कम प्रोसेस्ड अनाजों को डाइट में शामिल किया जा सकता है।

जौ में बीटा-ग्लूकान नाम का घुलनशील फाइबर पाया जाता है, जो भोजन के बाद ब्लड ग्लूकोज के स्तर को मैनेज करने में मदद कर सकता है। हालांकि, अनाज की मात्रा और पूरी डाइट का संतुलन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

4. फलों का जूस नहीं, पूरा फल खाएं

डायबिटीज होने पर फल पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं होती। आमतौर पर जूस की तुलना में पूरा फल खाना बेहतर विकल्प माना जाता है, क्योंकि पूरे फल में फाइबर मौजूद रहता है।

जूस में कम समय में ज्यादा मात्रा में शुगर ली जा सकती है। इसलिए फलों का सेवन करते समय मात्रा और अपनी ब्लड शुगर का ध्यान रखना जरूरी है।

5. हेल्दी फैट और प्रोटीन को डाइट में शामिल करें

बादाम, अखरोट, अलसी, चिया सीड्स और दूसरे नट्स व बीजों में हेल्दी फैट, फाइबर और कुछ मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। इन्हें सीमित मात्रा में डाइट में शामिल किया जा सकता है।

इसके अलावा साबुत मूंग, चना और अन्य दालें भी प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत हैं। ये भोजन को ज्यादा संतुलित बनाने में मदद कर सकते हैं।

रोजाना एक्सरसाइज करना भी जरूरी

डायबिटीज को कंट्रोल करने में शारीरिक गतिविधि की महत्वपूर्ण भूमिका है। रोजाना तेज चाल से चलना, साइकिल चलाना या डॉक्टर की सलाह के अनुसार व्यायाम करने से शरीर ग्लूकोज का बेहतर इस्तेमाल कर सकता है और इंसुलिन की संवेदनशीलता में सुधार हो सकता है।

लेकिन अगर ब्लड शुगर बहुत ज्यादा है, खासकर 300 mg/dL या उससे ऊपर, तो भारी एक्सरसाइज करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

क्या टाइप-2 डायबिटीज रिमिशन में जा सकती है?

टाइप-2 डायबिटीज के कुछ मरीजों में वजन कम करने, डाइट सुधारने और नियमित व्यायाम से ब्लड शुगर में इतना सुधार हो सकता है कि बीमारी रिमिशन की स्थिति में पहुंच जाए।

लेकिन रिमिशन का मतलब यह नहीं है कि डायबिटीज हमेशा के लिए खत्म हो गई। स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखना जरूरी होता है और दवाओं को कम या बंद करने का फैसला डॉक्टर की निगरानी में ही होना चाहिए।

इन बातों का रखें खास ध्यान

  • डॉक्टर की सलाह के बिना डायबिटीज की दवा बंद न करें।
  • नियमित रूप से ब्लड शुगर और HbA1c की जांच कराएं।
  • मीठे पेय और ज्यादा प्रोसेस्ड फूड से बचें।
  • डाइट में फाइबर और पर्याप्त प्रोटीन शामिल करें।
  • नियमित शारीरिक गतिविधि करें।
  • पर्याप्त नींद लें।
  • 300 mg/dL या उससे ज्यादा शुगर बार-बार आने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से है। 300 mg/dL या उससे अधिक ब्लड शुगर होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी हो सकता है। अपनी दवा, डाइट या एक्सरसाइज में बदलाव डॉक्टर या योग्य डायबिटोलॉजिस्ट की सलाह के बिना न करें।

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