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Firozabad News : नीम करौली बाबा के पैतृक आवास पर छिड़ा विवाद! जानिए पोतियों ने किस ट्रस्ट पर लगाया कब्जे का आरोप, DM ने दिए जांच के आदेश

डिजिटल डेस्क, अमृत विचार। उत्तराखंड के प्रसिद्ध कैंची धाम से जुड़े संत नीम करौली बाबा के पैतृक घर को लेकर विवाद सामने आया है। फिरोजाबाद जिले की टूंडला तहसील के अकबरपुर गांव स्थित पैतृक मकान पर बाबा की छह पोतियों ने श्री ठाकुर हनुमान जी ट्रस्ट पर कब्जा करने का आरोप लगाया है। पोतियों ने इस संबंध में जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा को शिकायती पत्र देकर मकान और पूजा स्थल को ट्रस्ट के कब्जे से मुक्त कराने की मांग की है। मामले में डीएम ने जांच के आदेश दिए हैं।

पैतृक मकान में बनी है बाबा की पूजा स्थली

अकबरपुर गांव स्थित यह मकान नीम करौली बाबा की जन्मस्थली बताया जाता है। परिजनों के मुताबिक बाबा इसी मकान में रहते थे। मकान के दो कमरों में बाबा और उनकी पत्नी की पूजा स्थली बनी हुई है, जबकि अन्य कमरों में पुजारियों के रहने की व्यवस्था है।

छह पोतियों ने लगाया जबरन कब्जे का आरोप

नीम करौली बाबा के छोटे बेटे धर्म नारायण शर्मा की छह बेटियों ने आरोप लगाया है कि उनके पैतृक मकान पर श्री ठाकुर हनुमान जी ट्रस्ट ने जबरन कब्जा कर रखा है। उन्होंने प्रशासन से मकान को ट्रस्ट के कब्जे से मुक्त कराने और इसे ट्रस्ट से बाहर रखने की मांग की है। पोतियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो वे मामले को लेकर अदालत का रुख करेंगी।

बाबा के परिवार में दो बेटों की संतान

बताया गया है कि नीम करौली बाबा के दो बेटे थे। बड़े बेटे अनेक सिंह शर्मा के एक बेटा और एक बेटी हैं, जबकि छोटे बेटे धर्म नारायण शर्मा की छह बेटियां हैं। इन्हीं छह पोतियों ने अब पैतृक संपत्ति को लेकर प्रशासन से शिकायत की है।

ट्रस्ट ने आरोपों को बताया गलत

वहीं श्री ठाकुर हनुमान जी ट्रस्ट ने मकान पर कब्जा करने के आरोपों से इनकार किया है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष मनोज अग्रवाल का कहना है कि बाबा का मकान, मंदिर और डाक बंगलिया ट्रस्ट को दान में दिए गए थे। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि संपत्ति ट्रस्ट को नहीं मिली होती तो इतने वर्षों से ट्रस्ट इसकी देखरेख क्यों करता।

अब प्रशासन की जांच पर टिकी नजर

पैतृक मकान पर मालिकाना हक और ट्रस्ट को संपत्ति दिए जाने के दावे को लेकर दोनों पक्ष आमनेसामने हैं। फिलहाल डीएम ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। अब जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों से ही स्पष्ट होगा कि संपत्ति पर अधिकार किसका है और ट्रस्ट को यह संपत्ति किस आधार पर मिली थी।

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