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पटना​​​ DTO के लॉगिन से 547 वाहनों को मिला अप्रूवल, BS-3 और BS-4 के निबंधन में गड़बड़ी साबित; तत्कालीन अधिकारी को दंड

पटना​​​ DTO के लॉगिन से 547 वाहनों को मिला अप्रूवल, BS-3 और BS-4 के निबंधन में गड़बड़ी साबित; तत्कालीन अधिकारी को दंड

पटना, बिहार: बिहार की राजधानी पटना के जिला परिवहन कार्यालय (DTO) में वाहन निबंधन से जुड़ी अनियमितताओं के मामले में तत्कालीन जिला परिवहन पदाधिकारी अजय कुमार ठाकुर के खिलाफ विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित हुए हैं। जांच में सामने आया कि उनके लॉगिन आईडी से BS-3 और BS-4 श्रेणी के वाहनों की बैकलॉग एंट्री और अप्रूवल की प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई थी। मामले में सामान्य प्रशासन विभाग ने अधिकारी के खिलाफ वेतनवृद्धि संचयात्मक प्रभाव से रोकने का दंड निर्धारित किया है।

अजय कुमार ठाकुर वर्तमान में अररिया जिले में अपर समाहर्ता (लोक शिकायत) के पद पर तैनात बताए गए हैं। विभागीय कार्रवाई से जुड़ा सरकारी संकल्प 29 अक्टूबर 2026 को जारी किया गया।

547 वाहनों को दिया गया था अप्रूवल

विभागीय आरोपों के मुताबिक, पटना के तत्कालीन DTO अजय कुमार ठाकुर ने निर्धारित आदेशों की अवहेलना करते हुए BS-3 और BS-4 वाहनों की बैकलॉग एंट्री और निबंधन को मंजूरी दी थी। आरोप है कि उनके लॉगिन आईडी से पांच वाहनों की बैकलॉग एंट्री की गई, जबकि 547 वाहनों को अप्रूवल दिया गया।

इस प्रक्रिया में फर्जी मनी रसीदों के इस्तेमाल का भी मामला सामने आया। विभाग का आरोप था कि इन अनियमितताओं के कारण सरकारी राजस्व को नुकसान हुआ। साथ ही, अधिकारी पर प्रशासनिक चूक का आरोप लगाया गया, जिसके चलते कार्यालय के कर्मचारियों ने उनके लॉगिन आईडी का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया।

2021 में मांगा गया था स्पष्टीकरण

मामले में परिवहन विभाग ने तत्कालीन DTO से 1 सितंबर 2021 को स्पष्टीकरण मांगा था। निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने के बाद 7 अक्टूबर 2021 को उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही चलाने का निर्णय लिया गया।

जांच के लिए मुख्य जांच आयुक्त को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। लंबी प्रक्रिया के बाद 7 मई 2026 को जांच प्रतिवेदन सौंपा गया। इसमें अजय कुमार ठाकुर के खिलाफ लगाए गए आरोपों को प्रमाणित बताया गया।

BPSC की सहमति के बाद जारी हुआ दंडादेश

जांच रिपोर्ट मिलने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने अधिकारी के खिलाफ वेतनवृद्धि संचयात्मक प्रभाव से रोकने का दंड निर्धारित किया। इस दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने भी अपनी सहमति दी। इसके बाद राज्य सरकार ने 29 अक्टूबर को इस संबंध में संकल्प जारी कर दिया।

वाहन निबंधन प्रक्रिया पर उठे सवाल

पटना DTO कार्यालय में सामने आई इस अनियमितता ने सरकारी डिजिटल सिस्टम की निगरानी और लॉगिन आईडी की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं। खासतौर पर यह जांच का विषय रहा कि फर्जी मनी रसीदों के आधार पर वाहनों को निबंधन की मंजूरी कैसे मिली और इस प्रक्रिया से सरकारी खजाने को कितना नुकसान हुआ।

विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित होने के बाद अधिकारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई है। अब इस मामले ने परिवहन विभाग में रिकॉर्ड सत्यापन, डिजिटल अनुमोदन और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

— Satya Report

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