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राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों ने AAP छोड़ी, क्या राज्यसभा से सांसदी जाएगी? जानें क्या कहता है कानून

Satya Report: राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी से नाता तोड़ने का ऐलान कर दिया है. प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा ने कहा है, ‘पार्टी के दो तिहाई सांसद हमारे साथ हैं और हम बीजेपी में विलय कर रहे हैं. मैं आम आदमी पार्टी से दूर और जनता के बीच जा रहा हूं.’ राज्यसभा में फिलहाल आप के 10 सांसद हैं. इसमें 7 पंजाब से और 3 दिल्ली से हैं.

राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों ने AAP छोड़ी, क्या राज्यसभा से सांसदी जाएगी? जानें क्या कहता है कानून
राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों ने AAP छोड़ी, क्या राज्यसभा से सांसदी जाएगी? जानें क्या कहता है कानून

अब सवाल है कि क्या राघव चड्ढा समेत दो तिहाई सांसदों के भाजपा में विलय के बाद उनकी राज्यसभा सांसदी बची रहेगी या कुर्सी जाएगी? इस सवाल का जवाब दलबदल कानून में दिया गया है.

क्या जाएगी राज्यसभा की सांसदी?

दलबदल कानून में ऐसे मामलों का जिक्र किया गया है. कानून कहता है, अगर कोई विधायक या सांसद पार्टी को छोड़ता है तो उसे अयोग्य करार दिया जा सकता है. अगर वो पार्टी के खिलाफ जाकर वोट करता है तो भी उसे अयोग्य करार दे सकते हैं. यही नहीं, पार्टी की तरफ से व्हिप जारी होने के बाद भी अगर कोई सदस्य वोट नहीं करता है उसे इस कानून के दायरे में लाया जा सकता है, लेकिन राघव चड्ढा समेत दो तिहाई सांसदों के मामले में यह नियम नहीं लागू होता है.

राघव चड्ढा

दल बदल कानून में बचाव का भी एक तरीका है. कानून कहता है कि अगर एक या दो सांसद या विधायक पार्टी छोड़कर जाते हैं तो उनके खिलाफ दलदबदल कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है. लेकिन पार्टी के कुल विधायकों या सांसदों में से दो तिहाई सदस्य राजनीतिक दल छोड़ते हैं तो यह कानून नहीं लागू होगा. यानी उन पर कार्रवाई नहीं की जा सकती. ऐसे मामले में विधायकों और सांसदों की सदस्यता बरकरार रहेगी.

#WATCH | Delhi: Addressing a press conference with Sandeep Pathak and Ashok Mittal, AAP MP Raghav Chadha says, “We have decided that we, the 2/3rd members belonging to the AAP in Rajya Sabha, exercise the provisions of the Constitution of India and merge ourselves with the BJP.” pic.twitter.com/K3IK4TPXml

— ANI April 24, 2026

इस तरह यह बात साफ हो गई है कि आप को छोड़ने वाले सांसदों की सांसदी नहीं जाएगी. प्रेस कॉन्फेंस के दौरान राघव चड्ढा ने बारबार जोर देकर यही कहा है कि उनके साथ आप के दो तिहाई सांसद हैं.

दलबदल कानून कब नहीं लागू होता?

कुछ ऐसी स्थितियां हैं जब दलबदल कानून नहीं लागू होता है. जैसे दो तिहाई सांसदों के पार्टी छोड़ने की स्थिति में. जैसा ही आप के साथ हुआ है. दूसरा, अगर कोई पार्टी किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी में अपना विलय कर लेती है तब. या फिर सदस्य पार्टी के विलय को नहीं स्वीकार करते और अगल होने का फैसला लेते हैं. ऐसे मामले में स्पीकर आखिरी फैसला सुनाते हैं.

राघव चड्ढा ने क्याक्या कहा?

प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा का कहना है, सभी सांसदों ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए हैं. दस्तावेज राज्यसभा के सभापति को सौंप दिया गया है. राघव ने पार्टी छोड़ने वाले सदस्यों के जो नाम गिनाए हैं उनमें स्वाति मालीवाल, अशोक कुमार मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह और विक्रमजीत सिंह साहनी शामिल हैं.

राघव का कहना है कि पिछले कुछ समय से मुझे यह लग रहा है कि मैं गलत पार्टी में हूं. हमने तय किया कि संविधान के नियमों का पालन करते हुए भाजपा में विलय करेंगे. जिस आम आदमी पार्टी को खूनपसीने से सींचा था. अपने जीवन के महत्वपूर्ण 15 साल दिए, वो अब अपने मूल्यों, सिद्धांतों और नैतिकता से भटक गई है. आम आदमी पार्टी देशहित में नहीं, निजी फायदे के लिए काम करती है.

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