8th Pay Commission: केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बेहद अहम खबर सामने आ रही है. अगर आप भी लंबे समय से आठवें वेतन आयोग की सुगबुगाहट का इंतजार कर रहे हैं, तो अब जमीनी स्तर पर हलचल तेज हो चुकी है. आज 13 मई और कल 14 मई को दिल्ली में आठवें वेतन आयोग की टीम ने रक्षा मंत्रालय और रेल मंत्रालय से जुड़े तमाम कर्मचारी संगठनों के साथ सीधी बातचीत शुरू कर दी है. इन बैठकों का मकसद केवल कर्मचारियों की मांगें सुनना नहीं है, बल्कि नए वेतन ढांचे, भत्तों और पेंशन से जुड़े पेंच सुलझाना है. इस बातचीत से ही वह ब्लूप्रिंट तैयार होगा, जिसके आधार पर आयोग सरकार को सैलरी बढ़ाने के सुझाव सौंपेगा.

न्यूनतम सैलरी 65 हजार करने का प्रस्ताव
कर्मचारी संगठनों ने के सामने कई मांगें रखी हैं. इसमें सबसे प्रमुख है न्यूनतम बेसिक पे को मौजूदा 18,000 रुपये से बढ़ाकर सीधे 65,000 रुपये करना. महाराष्ट्र के पेंशनर्स और कर्मचारी निकायों ने तर्क दिया है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए ‘एकरायड फॉर्मूले’ के तहत यह भारीभरकम इजाफा अब समय की जरूरत बन गया है. उनका स्पष्ट मानना है कि मौजूदा वेतन ढांचा आज की आर्थिक चुनौतियों के सामने बौना साबित हो रहा है. इसके अलावा, फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 3.8 करने का भी जोरदार प्रस्ताव रखा गया है. इससे न केवल मासिक आय में ठोस बढ़ोतरी होगी, बल्कि कर्मचारियों की खरीदारी की क्षमता भी मजबूत होगी.
महंगाई भत्ते का नया फॉर्मूला
कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि मौजूदा महंगाई भत्ता सिस्टम वास्तविक मुद्रास्फीति को मात देने में पिछड़ रहा है. इसलिए मांग उठ रही है कि हर छह महीने में होने वाले संशोधन में कम से कम 4 फीसदी की गारंटीड बढ़ोतरी होनी चाहिए. एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव यह भी सुझाया गया है कि जैसे ही डीए 50 फीसदी के स्तर को छुए, उसे स्वतः मूल वेतन में मिला दिया जाए. ऐसा होने पर कर्मचारियों का बेसिक पे बढ़ जाएगा, जिससे उनके अन्य भत्तों के साथ भविष्य की पेंशन कैलकुलेशन में सीधा फायदा मिलेगा.
इंक्रीमेंट दर बढ़ाने की गुजारिश
वेतन वृद्धि की वार्षिक दर को लेकर भी कर्मचारी खासे मुखर हैं. फिलहाल सालाना इंक्रीमेंट 3 फीसदी है, जिसे बढ़ाकर 5 फीसदी करने की वकालत की जा रही है. एक तकनीकी मांग यह भी है कि जब रिवाइज बेसिक पे की गणना हो, तो उसे अगले 1000 रुपये के राउंडऑफ में सेट किया जाए. इससे सैलरी का ढांचा ज्यादा पारदर्शी बनेगा. वहीं, मकान किराया भत्ते को डीए के साथ लिंक करने का नियम खत्म करने की भी मांग है. एक्स, वाई, जेड शहरों के लिए एचआरए की दरों को 10%, 20%, 30% से बढ़ाकर क्रमशः 12%, 24%, 36% करने का प्रस्ताव है.
खजाने पर असर का होगा पूरा आकलन
वेतन आयोग को अपनी अंतिम सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने की डेडलाइन मिली है. अगर मुख्य रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में ज्यादा वक्त लगता है, तो फौरी राहत देने के लिए एक ‘अंतरिम रिपोर्ट’ भी लाई जा सकती है. कोई भी अंतिम फैसला सिर्फ मांगों के आधार पर नहीं होगा. आयोग देश के वित्तीय अनुशासन, विकास कार्यों के लिए उपलब्ध फंड, सरकारी बनाम प्राइवेट सेक्टर के वेतन संतुलन और राज्य सरकारों के खजाने पर पड़ने वाले असर को बारीकी से परखेगा. लक्ष्य यही है कि अर्थव्यवस्था का पहिया सुचारू रूप से चलता रहे.



