गाजीपुर। उत्तर प्रदेश के मऊ से विधायक और माफिया मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। गाजीपुर के बहुचर्चित ‘गजल होटल’ के मालिकाना हक को लेकर चल रहा विवाद अब और ज्यादा गहरा गया है। मोती सेठ के बाद अब अभिषेक अग्रवाल नाम के व्यक्ति ने इस होटल की जमीन पर अपना दावा ठोक दिया है।

अभिषेक अग्रवाल ने इस मामले को लेकर गाजीपुर की एमपीएमएलए कोर्ट में एक प्रार्थना पत्र दाखिल किया है, जिसके बाद कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 जून की तारीख तय की है।
“मुख्तार अंसारी ने कब्जाई थी मेरी जमीन” अभिषेक अग्रवाल
कोर्ट में दाखिल याचिका में अभिषेक अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि गजल होटल जिस जमीन पर बना है, वह असल में उनकी पैतृक संपत्ति है। उनका दावा है कि पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी ने अपने रसूख और बाहुबल के दम पर उनकी इस कीमती जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया था और बाद में इस पर गजल होटल का निर्माण कराया गया।
अभिषेक अग्रवाल से पहले मोती सेठ नाम के एक अन्य व्यक्ति ने भी इस जमीन पर अपना मालिकाना हक जताते हुए कानूनी लड़ाई शुरू की थी। अब एक और नया दावा सामने आने के बाद अंसारी परिवार की कानूनी पेचीदगियां बढ़ गई हैं।
गजल होटल पर पहले भी चल चुका है प्रशासन का बुलडोजर
आपको बता दें कि गाजीपुर का गजल होटल मुख्तार अंसारी परिवार के मुख्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में से एक रहा है।
अवैध निर्माण पर कार्रवाई: इससे पहले जिला प्रशासन ने मास्टर प्लान के उल्लंघन और अवैध निर्माण का हवाला देते हुए गजल होटल के एक बड़े हिस्से पर बुलडोजर चलाकर उसे ध्वस्त कर दिया था।
अब्बास और उमर अंसारी का नाम: इस संपत्ति का मालिकाना हक कागजों में मुख्तार अंसारी के बेटों अब्बास अंसारी और उमर अंसारी के नाम पर दर्ज बताया जाता है।
अब 27 जून को होगी अगली सुनवाई
अभिषेक अग्रवाल द्वारा एमपीएमएलए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिए जाने के बाद अदालत ने इसे रिकॉर्ड पर ले लिया है। इस मालिकाना हक के विवाद और विपक्षियों के दावों पर अब 27 जून को अदालत में विस्तृत सुनवाई होगी। कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि अभिषेक अग्रवाल या मोती सेठ के दावे कोर्ट में सही साबित होते हैं, तो प्रशासन इस जमीन को कुर्क करने या मूल मालिकों को सौंपने की कार्रवाई कर सकता है।



