पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद तृणमूल कांग्रेस ताश के पत्तों की तरह ढह रही है. विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस पहले ही दो टुकड़ों में बंट चुकी है. तृणमूल कांग्रेस के 58 विधायकों ने एक नया गुट बना लिया है और अब तृणमूल कांग्रेस की संसदीय पार्टी भी टूट की कगार पर खड़ी है. सूत्रों के मुताबिक, फूट की अटकलों के बीच तृणमूल सांसद दिल्ली का रुख कर रहे हैं. बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में एकजुट हो रहे हैं. हालांकि, लिस्ट में सभी सांसदों के नाम नहीं है. हालांकि, कई ने दिल्ली की तरफ कदम बढ़ा दिए हैं.

इस बीच, के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी शनिवार को कोलकाता से दिल्ली पहुंच गये हैं. पार्टी सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी आज दिल्ली पहुंच रही हैं. सोमवार को ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक में शिरकत करेंगे.
लेकिन राजनीतिक हलकों में यह अटकलें तेज हैं कि क्या सोमवार को ममता बनर्जी के दिल्ली दौरे के दिन तृणमूल संसदीय पार्टी में बड़ी फूट होगी?
दिल्ली में जुट रहे हैं टीएमसी के बागी सांसद
सूत्रों के अनुसार तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा के बागी सांसदों में कुछ दिल्ली आ चुके हैं. शाम तक ज्यादातर आ सकते हैं. लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के 28 सांसदों में से करीब 20 सांसद काकोली घोष दस्तीदार के साथ हैं.
सूत्रों के मुताबिक, जून माल्या, दीपक अधिकारी उर्फ देव, यूसुफ पठान, शताब्दी रॉय, रचना बनर्जी, शत्रुघ्न सिन्हा, पार्थ भौमिक, जगदीश चंद्र बसुनिया जैसे सांसदों ने अभी से पार्टी से दूरी बनानी शुरू कर दी है. इनमें जून मालिया पार्टी के किसी प्रोग्राम में शामिल नहीं हो रही हैं, बल्कि कथित तौर पर एक OTT की शूटिंग में बिजी हैं,
सूत्रों का कहना है कि सांसद अपने सरकारी आवास में न रुककर, दिल्ली में होटल में रुके हैं . बागी सांसद संभवतः कल लोकसभा स्पीकर से मुलाकात कर सकते हैं. तृणमूल कांग्रेस के 13 राज्यसभा सांसदों में से 9 पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत के लिए तैयार बताए जा रहे हैं.
सिर्फ डेरेक ओ ब्रायन, डोला सेन, मेनका गुरुस्वामी और सागरिका घोष ही ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के साथ बने रह सकते हैं. समीरुल इस्लाम भी ममता बनर्जी के साथ बताये जा रहे हैं. सूत्रों के अनुसार पश्चिम बंगाल के पूर्व डीजीपी और ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले आइपीएस राजीव कुमार और भजपा से टीएमसी में आये बाबुल सुप्रियो भी बागी ग्रुप के संपर्क में हैं.
लोकसभा में अलग गुट बनाने का प्लान
सूत्रों का कहना है कि स्पीकर को चिट्ठी लिखकर अभिषेक बनर्जी को लोकसभा में नेता पद से हटाने का ब्लू प्रिंट तैयार किया जा रहा है. वे अभिषेक बनर्जी को लोकसभा में पार्टी लीडर मानने को तैयार नहीं हैं. उनका दूसरा मकसद विधानसभा में ऋतब्रत बनर्जी की तरह ही लोकसभा के अंदर एक नया तृणमूल ब्लॉक बनाना है.
हालांकि बीजेपी का मैसेज पूरी तरह से साफ है. वे फिलहाल किसी भी तृणमूल सांसद को पार्टी में नहीं लेंगे. स्वाभाविक रूप से, वे एक अलग ब्लॉक होंगे. ऐसे में वे इस बात पर नजर रखेंगे कि फ्लोर कोऑर्डिनेशन के मामले में लोकसभा की पॉलिसी क्या है?
लेकिन अगर वे सच में ऐसा चाहते हैं, तो एंटीडिफेक्शन लॉ से बचते हुए ऐसा कैसे हो सकता है? क्योंकि, इस मामले में बागी सांसदों की संख्या इतनी पक्की करनी होगी कि वे किसी भी तरह से इस कानून के दायरे में न आएं यानी, दोतिहाई सांसदों का सपोर्ट चाहिए.



