
हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अमावस्या तिथि को पितरों का आशीर्वाद पाने का सबसे विशेष अवसर माना जाता है। इस बार अमावस्या सोमवार को पड़ रही है, सोमवार के दिन अमास्या पड़ने से इसे सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है।
इस बार अधिकमास के दौरान 15 जून को यह शुभ संयोग बन रहा है। इसी कारण इस तिथि का महत्व कई गुना बढ़ गया है। आइए आपको आप बताते हैं अमावस्या के दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं।
माना जाता है कि इस दिन किए गए दानपुण्य और सेवा कार्यों से पितरों की कृपा मिलती है। इसके साथ ही पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, परिवार में सुखशांति और समृद्धि बनीं रहती है।
जरूरतमंदों को भोजन कराएं
हिंदू धर्म में अन्नदान यानी के अनाज के दान को सबसे उत्तम माना गया है। यदि सोमवती अमावस्या के दिन किसी भूखे व्यक्ति, साधुसंत, गरीब परिवार या जरुरतमंद को अन्न का दान करना चाहिए या फिर भोजन कराए। यह बेहद ही पुण्यदायी माना जाता है। आप अपनी क्षमता के अनुसार, भोजन, राशन या अनाज का दान कर सकते हैं।
जूतेचप्पल का दान
इस भीषण गर्मी और बरसात के मौसम में कई लोग अवाश्यक जरुरतों से वंचित रहते हैं। कुछ लोग धूप में नंगे पैर चलने की जगह कोई चारा नहीं होता है। ऐसे में किसी भी गरीब व्यक्ति, वृद्ध, मजदूर या अनाथ बच्चों को जूतेचप्पल दे सकते हैं। माना जाता है कि इस तरह के दान करने से पितरों की कृपा बनीं रहती है और वह अपना आशीर्वाद बरसाते हैं।
काले तिल से करें तर्पण
अमावस्या के दिन काले तिल का उपयोग अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन प्रातःकाल स्नान करने के बाद जल में काले तिल डालकर श्रद्धापूर्वक पितरों का तर्पण किया जाता है। इसके अलावा जरूरतमंदों को काले तिल का दान देना भी लाभकारी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है और पितृ दोष से संबंधित बाधाओं तथा कष्टों में कमी आने की संभावना रहती है।
दीपदान का महत्व
सोमवती अमावस्या के दिन दीपदान करना बेहद ही शुभ माना जाता है। मंदिर, नदी के किनारे या पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना शुभ होता है। माना जाता है कि दीपदान अंधकार को दूर कर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और पितरों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का जरिया माना जाता है।
तुलसी चालीसा का पाठ
सोमवती अमावस्या के दिन तुलसी चालीसा का पाठ करना अति पुण्यकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन तुलसी चालीसा का पाठ करने से जीवन में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
”श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय।
जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।।”
नमो नमो तुलसी महारानी, महिमा अमित न जाय बखानी।
दियो विष्णु तुमको सनमाना, जग में छायो सुयश महाना।।
विष्णुप्रिया जय जयतिभवानि, तिहूँ लोक की हो सुखखानी।
भगवत पूजा कर जो कोई, बिना तुम्हारे सफल न होई।।
जिन घर तव नहिं होय निवासा, उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा।
करे सदा जो तव नित सुमिरन, तेहिके काज होय सब पूरन।।
कातिक मास महात्म तुम्हारा, ताको जानत सब संसारा।
तव पूजन जो करैं कुंवारी, पावै सुन्दर वर सुकुमारी।।
कर जो पूजन नितप्रति नारी, सुख सम्पत्ति से होय सुखारी।
वृद्धा नारी करै जो पूजन, मिले भक्ति होवै पुलकित मन।।
श्रद्धा से पूजै जो कोई, भवनिधि से तर जावै सोई।
कथा भागवत यज्ञ करावै, तुम बिन नहीं सफलता पावै।।
छायो तब प्रताप जगभारी, ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी।
तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन, सकल काज सिधि होवै क्षण में।।
औषधि रूप आप हो माता, सब जग में तव यश विख्याता,
देव रिषी मुनि औ तपधारी, करत सदा तव जय जयकारी।।
वेद पुरानन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया।
नमो नमो जै जै सुखकारनि, नमो नमो जै दुखनिवारनि।।
नमो नमो सुखसम्पति देनी, नमो नमो अघ काटन छेनी।
नमो नमो भक्तन दुःख हरनी, नमो नमो दुष्टन मद छेनी।।
नमो नमो भव पार उतारनि, नमो नमो परलोक सुधारनि।
नमो नमो निज भक्त उबारनि, नमो नमो जनकाज संवारनि।।
नमो नमो जय कुमति नशावनि, नमो नमो सुख उपजावनि।
जयति जयति जय तुलसीमाई, ध्याऊँ तुमको शीश नवाई।।
निजजन जानि मोहि अपनाओ, बिगड़े कारज आप बनाओ।
करूँ विनय मैं मात तुम्हारी, पूरण आशा करहु हमारी।।
शरण चरण कर जोरि मनाऊं, निशदिन तेरे ही गुण गाऊं।
क्रहु मात यह अब मोपर दाया, निर्मल होय सकल ममकाया।।
मंगू मात यह बर दीजै, सकल मनोरथ पूर्ण कीजै।
जनूं नहिं कुछ नेम अचारा, छमहु मात अपराध हमारा।।
बरह मास करै जो पूजा, ता सम जग में और न दूजा।
प्रथमहि गंगाजल मंगवावे, फिर सुन्दर स्नान करावे।।
चन्दन अक्षत पुष्प् चढ़ावे, धूप दीप नैवेद्य लगावे।
करे आचमन गंगा जल से, ध्यान करे हृदय निर्मल से।।
पाठ करे फिर चालीसा की, अस्तुति करे मात तुलसा की।
यह विधि पूजा करे हमेशा, ताके तन नहिं रहै क्लेशा।।
करै मास कार्तिक का साधन, सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं।
है यह कथा महा सुखदाई, पढ़े सुने सो भव तर जाई।।
तुलसी मैया तुम कल्याणी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी।
भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे, गा गाकर मां तुझे रिझावे।।
यह श्रीतुलसी चालीसा पाठ करे जो कोय।
गोविन्द सो फल पावही जो मन इच्छा होय।।




