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38 साल की उम्र में ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी; इलाज के बाद कैसे नॉर्मल लाइफ जी रहे हैं अमित मेहरा? जानिए

ब्रेन ट्यूमर यह एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही लोगों के पैरों तले जमीन खिसक जाती है। ज्यादातर लोग इसे एक जानलेवा और कभी न ठीक होने वाली बीमारी मान लेते हैं, लेकिन चिकित्सा विज्ञान की तरक्की और मजबूत इच्छाशक्ति इस धारणा को गलत साबित कर सकती है। 38 साल की उम्र में जब अमित मेहरा को ब्रेन ट्यूमर का पता चला, तो उनके सामने भी अनगिनत चुनौतियां थीं। लेकिन सही समय पर डायग्नोसिस, सफल सर्जरी और सटीक इलाज के बाद आज अमित न सिर्फ पूरी तरह स्वस्थ हैं, बल्कि अपनी नौकरी करने के साथसाथ क्रिकेट भी खेल रहे हैं और बिल्कुल नॉर्मल जीवन जी रहे हैं।

38 साल की उम्र में ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी; इलाज के बाद कैसे नॉर्मल लाइफ जी रहे हैं अमित मेहरा? जानिए
38 साल की उम्र में ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी; इलाज के बाद कैसे नॉर्मल लाइफ जी रहे हैं अमित मेहरा? जानिए

अमित बताते हैं कि क्रिकेट खेलते समय उनके बाएं हाथ में अचानक कमजोरी और सुन्नपन महसूस होने लगा था। कभीकभी उन्हें चीजें पकड़ने में भी परेशानी होती थी। ये लक्षण कुछ सेकंड के लिए आते और फिर ठीक हो जाते, इसलिए उन्होंने शुरुआत में इसे थकान या ज्यादा मेहनत का असर समझा।

खेलते कूदते और अपने जरूरी कामों के दौरान अमित को अक्सर ये कमजोरी महसूस होती तो उन्होंने डॉक्टर को दिखाया और  MRI कराई।  MRI स्कैन में पता चला कि उनके मस्तिष्क के ‘एलॉक्वेंट कॉर्टेक्स’ में ट्यूमर है। यह दिमाग का वह हिस्सा है जो शरीर की गतिविधियों और संवेदनाओं को कंट्रोल करता है। डॉक्टरों ने बताया कि उनके हाथ में महसूस होने वाली कमजोरी वास्तव में ट्यूमर की वजह से होने वाले फोकल मोटर सीजर थे। डॉक्टर ने बताया बीमारी डायग्नोज होते ही समय रहते सर्जरी की गई और इलाज के बाद पिछले आठ वर्षों में ट्यूमर दोबारा नहीं लौटा।

समय पर ब्रेन ट्यूमर की पहचान ने बचाई जान

मेदांता हॉस्पिटल में न्यूरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. कपिल सिंघल के मुताबिक भारत में ब्रेन और सेंट्रल नर्वस सिस्टम ट्यूमर के लगभग 30 मामले प्रति एक लाख आबादी में सामने आते हैं। इनमें से करीब 30 से 35 प्रतिशत ट्यूमर कैंसरयुक्त होते हैं, जबकि अधिकांश गैरकैंसरयुक्त होते हैं। न्यूरोलॉजिस्टों का कहना है कि ब्रेन ट्यूमर के मामलों में बढ़ोतरी का एक बड़ा कारण बेहतर जांच सुविधाएं और MRI स्कैन की आसान उपलब्धता है। अब लोग शुरुआती लक्षणों पर ही जांच करा रहे हैं, जिससे बीमारी जल्दी पकड़ में आ रही है।

ब्रेन ट्यूमर क्यों होता है?

ब्रेन ट्यूमर एक ऐसी परेशानी है जिसमें ब्रेन या उसके आसपास की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। यह डीएनए में होने वाले कुछ आनुवंशिक बदलावों के कारण होता है। हालांकि ज्यादातर मामलों में इन बदलावों की सटीक वजह पता नहीं चल पाती। डॉक्टरों का कहना है कि अधिकांश ब्रेन ट्यूमर जेनेटिक भी नहीं होते, बल्कि कोशिकाओं में होने वाले आकस्मिक बदलावों के कारण फैलते हैं।

ब्रेन ट्यूमर की पहचान कैसे संभव है?

मेदांता के न्यूरो सर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. मनीष वैश बताते हैं कि पिछले एक दशक में शायद सबसे बड़ा बदलाव तकनीकी रहा है। आधुनिक न्यूरोसर्जरी अत्याधुनिक इमेजिंग, कंप्यूटरसहायता प्राप्त योजना और समय की निगरानी द्वारा संचालित हो रही है। सर्जरी से पहले, डॉक्टर उन्नत MRI तकनीकों और ट्रैक्टोग्राफी का उपयोग करके मस्तिष्क की मैपिंग करते हैं, जिससे गति, वाणी और संवेदना के लिए जिम्मेदार महत्वपूर्ण तंत्रिका मार्गों की पहचान होती है।

इमेजिंग डेटा को खास नेविगेशन सिस्टम में फीड किया जाता है, जिससे सर्जन ट्यूमर तक पहुंचने के लिए सबसे सुरक्षित मार्ग तलाश लेते हैं। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर माइक्रोस्कोप, 4D अल्ट्रासाउंड और रियलटाइम मॉनिटरिंग जैसी तकनीकों का उपयोग करते है, जिससे सर्जरी अधिक सुरक्षित और प्रभावी हो गई है। एक्सपर्ट के मुताबिक ब्रेन ट्यूमर का निदान पहले की तुलना में कहीं बेहतर हो गया है और समय पर इलाज मिलने पर कई मरीज पूरी तरह सामान्य जीवन में लौट सकते हैं।

हर ब्रेन ट्यूमर कैंसर नहीं होता

विशेषज्ञों के अनुसार सभी ब्रेन ट्यूमर कैंसर नहीं होते। कई ट्यूमर धीरेधीरे बढ़ते हैं और सर्जरी के जरिए पूरी तरह हटाए जा सकते हैं। कम ग्रेड वाले ट्यूमर में इलाज के बाद दोबारा होने की संभावना भी कम रहती है। अमित मेहरा का ट्यूमर ग्रेड2 श्रेणी का था, जिसे शुरुआती चरण में पहचानकर सफलतापूर्वक हटाया गया। डॉक्टरों का कहना है कि आज आधुनिक तकनीकों की मदद से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के बाद सामान्य जीवन में लौट रहे हैं।

इलाज के बाद सामान्य जिंदगी में वापसी

सर्जरी के बाद अमित तीन दिन में अस्पताल से घर लौट आए। कुछ महीनों तक आराम और सावधानी बरतने के बाद वह फिर से ऑफिस जाने लगे। छह महीने बाद उन्होंने दोबारा गाड़ी चलाना शुरू कर दिया और अब नियमित रूप से क्रिकेट भी खेलते हैं। अमित हर छह महीने में MRI स्कैन कराते हैं और डॉक्टरों की सलाह का पालन करते हैं। उनका कहना है कि समय पर इलाज और नियमित निगरानी की वजह से वह फिर से सामान्य जीवन जी पा रहे हैं।

डिस्क्लेमर:यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। ब्रेन ट्यूमर या किसी भी स्वास्थ्य समस्या से जुड़े लक्षण दिखाई देने पर स्वयं इलाज करने के बजाय योग्य न्यूरोलॉजिस्ट या न्यूरोसर्जन से परामर्श लें। किसी भी जांच, उपचार या दवा से संबंधित निर्णय हमेशा विशेषज्ञ की सलाह पर ही लें।

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