
वॉशिंगटन:
ईरान-अमेरिका डील से ठीक पहले बेरूत पर हुए हमले से यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नाराज हो गए. उन्होंने कहा है कि अब और अटैक नहीं होने चाहिए. अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते से पहले इजरायली सेना ने बेरूत के उपनगरों पर हमले किए हैं. नई स्ट्राइक से सीजफ़ायर डील पर खतरा मंडरा सकता है. इसीलिए ट्रंप ने इजरायल और ईरान को मौका न गंवाने की चेतावनी दी है.
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा, “हम एक ऐसी डील के बहुत करीब हैं जो लेबनान सहित पूरे क्षेत्र में शांति लाएगी और आइए इसे हाथ से न जाने दें!”
एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा रूप में यह डील इज़रायल सरकार के लिए बहुत निराशाजनक है, जिसे पाकिस्तान और अन्य देशों की अगुवाई वाली बातचीत में दरकिनार कर दिया गया था. पिछली बार जब इज़रायल ने एक हफ़्ते पहले बेरूत के बाहरी इलाकों में हमला किया था, तो इससे ईरान और इज़रायल के बीच लड़ाई और गंभीर हो गई थी, जबकि 7 अप्रैल को सीज़फ़ायर लागू हुआ था.
नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा कि ये हमले उत्तरी इज़रायल पर हिज़्बुल्लाह के हमलों के जवाब में किए गए थे. इज़रायली सेना ने कहा कि हिज़्बुल्लाह ने तीन प्रोजेक्टाइल दागे, सेना ने फुटेज भी जारी किया जिसमें ज़ोरदार धमाके की आवाज़ के बाद धुंआ उठता दिख रहा था. हालांकि ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह की ओर से इस पर कोई तत्काल टिप्पणी नहीं आई.
पीएम नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इज़रायल काट्ज़ ने एक बयान में कहा, “इज़रायल अपनी सीमा में गोलीबारी बर्दाश्त नहीं करेगा.” बाद में सेना ने कहा कि वह आने वाले घंटों में संभावित हमले की तैयारी कर रही है.

डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तरी इज़रायल पर हुए हमले को “बहुत छोटा और बेमतलब” बताया और कहा कि “किसी को चोट नहीं आई, कोई घायल नहीं हुआ या मारा नहीं गया, और इससे इस अहम प्रक्रिया में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए.”
बेरूत में मौजूद एसोसिएटेड प्रेस के एक फ़ोटोग्राफ़र ने बताया कि पांच मंज़िला अपार्टमेंट बिल्डिंग, जिसके ग्राउंड फ़्लोर पर दुकानें थीं, उस पर हमला हुआ. सबसे निचली दो मंज़िलों को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचा. दक्षिणी उपनगरों के निवासी, जिनमें से कई हफ़्तों की शांति के बाद घर लौटे थे, भागते हुए देखे गए.
हिज़्बुल्लाह ने 2 मार्च को इज़रायल पर मिसाइलें दागीं थी, जो अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर हमले के दो दिन बाद हुआ था, इससे मध्य पूर्व में युद्ध छिड़ गया. तब से इज़रायली सेना ने लेबनान में अपनी घुसपैठ को पिछले 25 सालों में किसी भी समय की तुलना में ज़्यादा अंदर तक बढ़ा दिया है.
ईरान चाहता है कि युद्धविराम समझौते में लेबनान में चल रही लड़ाई भी शामिल हो. हालांकि यह साफ़ नहीं है कि इसका मतलब इज़रायली सेना की वापसी होगी या नहीं और यह कब होगी. हाल के हफ़्तों में हिज़्बुल्लाह के ज़्यादातर हमले लेबनान के अंदर इज़रायली सैनिकों को निशाना बनाकर किए गए हैं.



