वित्त वर्ष 202526 के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया जारी है. ITR1 और ITR2 दाखिल करने वाले व्यक्तिगत करदाताओं के लिए अंतिम तारीख 31 जुलाई 2026 है, जबकि ITR3 और ITR4 फाइल करने वालों के लिए 31 अगस्त 2026 तय की गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि रिटर्न दाखिल करते समय की गई छोटीसी गलती भी टैक्सपेयर्स को आयकर विभाग के नोटिस, रिफंड में देरी या अतिरिक्त टैक्स और जुर्माने जैसी परेशानियों में डाल सकती है.

गलत ITR फॉर्म चुनना पड़ सकता है भारी
ITR फाइल करते समय सबसे पहले सही फॉर्म का चयन करना बेहद जरूरी है. हर टैक्सपेयर की आय और पेशे के आधार पर अलगअलग ITR फॉर्म निर्धारित किए गए हैं. उदाहरण के तौर पर ITR1 वेतनभोगी कर्मचारियों और सीमित आय वाले लोगों के लिए है, जबकि बिजनेस या प्रोफेशन से आय कमाने वालों के लिए ITR3 लागू होता है. अगर कोई व्यक्ति अपनी आय की प्रकृति के अनुसार गलत फॉर्म भर देता है, तो आयकर विभाग उसकी रिटर्न को डिफेक्टिव रिटर्न घोषित कर सकता है. ऐसे में करदाता को नोटिस मिल सकता है और दोबारा सही रिटर्न दाखिल करनी पड़ सकती है.
असेसमेंट ईयर की जानकारी सही भरें
कई बार करदाता जल्दबाजी में वित्त वर्ष और आकलन वर्ष को लेकर भ्रमित हो जाते हैं. वित्त वर्ष 202526 के लिए सही आकलन वर्ष 202627 है. यदि रिटर्न में गलत असेसमेंट ईयर का चयन कर लिया जाए तो रिटर्न प्रोसेसिंग में समस्या आ सकती है. इसके अलावा गलत वर्ष का चयन करने पर टैक्स रिकॉर्ड में गड़बड़ी हो सकती है, जिससे बाद में सफाई देना पड़ सकता है. इसलिए रिटर्न जमा करने से पहले इस जानकारी को एक बार जरूर जांच लें.
पर्सनल डिटेल्स में गलती न करें
ITR फॉर्म में नाम, पता, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, पैन नंबर और जन्मतिथि जैसी व्यक्तिगत जानकारी सही भरना बेहद जरूरी है. यह जानकारी पैन डेटाबेस में दर्ज विवरण से मेल खानी चाहिए. अगर जानकारी में कोई अंतर पाया जाता है तो रिटर्न की प्रोसेसिंग प्रभावित हो सकती है. वहीं, रिफंड पाने वाले करदाताओं को बैंक अकाउंट नंबर और IFSC कोड जैसी जानकारी भी सावधानी से भरनी चाहिए. गलत बैंक विवरण के कारण रिफंड अटक सकता है या वापस लौट सकता है.
आय के सभी स्रोतों का खुलासा करें
कई टैक्सपेयर्स केवल वेतन से होने वाली आय की जानकारी देते हैं और अन्य स्रोतों से हुई कमाई को शामिल करना भूल जाते हैं. यह सबसे आम और गंभीर गलतियों में से एक है. सेविंग अकाउंट पर मिलने वाला ब्याज, फिक्स्ड डिपॉजिट का ब्याज, किराये से आय, शेयर या म्यूचुअल फंड से कैपिटल गेन और अन्य सभी आय के स्रोतों का खुलासा करना जरूरी है. भले ही कुछ आय टैक्सफ्री हो, फिर भी उसकी जानकारी रिटर्न में देनी होती है. आय छिपाने पर विभाग के डेटा से मिसमैच होने की स्थिति में नोटिस मिलने की संभावना बढ़ जाती है.
जानकारी भरते समय फॉर्मेट का रखें ध्यान
ITR फॉर्म में दी जाने वाली जानकारी एक निर्धारित फॉर्मेट में भरनी होती है. तारीख, बैंक डिटेल्स, आय के आंकड़े और अन्य विवरण गलत प्रारूप में भरने पर रिटर्न में त्रुटियां आ सकती हैं. उदाहरण के लिए, तारीख हमेशा DD/MM/YYYY फॉर्मेट में ही दर्ज की जानी चाहिए. इसी तरह अन्य कॉलम भी निर्देशों के अनुसार भरने चाहिए. रिटर्न सबमिट करने से पहले सभी जानकारियों की दोबारा जांच करना बेहतर रहता है.



