Screen Time Effects: वर्तमान समय में मोबाइल, टैबलेट और वीडियो गेम सरीखे गैजेट बच्चों की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन हम सभी जानते हैं कि ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों के दिमाग और मानसिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है।

लेकिन इस संबंध में समयसमय पर होने वाले रिसर्च बताते हैं कि केवल स्क्रीन के सामने बिताया गया समय ही नहीं, बल्कि बच्चा स्क्रीन पर क्या देख रहा है, कितनी देर देख रहा है और किस उद्देश्य से देख रहा है, ये बातें भी उतनी ही जरूरी है।
क्या स्क्रीन टाइम हमेशा नुकसान पहुंचाता है?
को लंबे समय से डिप्रेशन, नींद की समस्या और व्यवहार में बदलाव का कारण माना जाता है। हालांकि, कई वैज्ञानिकों का कहना है कि अब तक ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो कि केवल स्क्रीन टाइम ही बच्चों की मानसिक समस्याओं की मुख्य वजह है।
नई रिसर्च क्या कहती है?
विशेषज्ञों ने स्क्रीन टाइम और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी स्टडीज के बाद बताया कि अधिकांश और मानसिक स्वास्थ्य के बीच सीधा और मजबूत संबंध नहीं मिला। कई बार स्क्रीन टाइम से ज्यादा अकेलापन, तनाव और सामाजिक परिस्थितियां बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं।
केवल समय नहीं, कंटेंट भी है जरूरी
- पढ़ाई या नई चीजें सीखने के लिए स्क्रीन का उपयोग
- दोस्तों या परिवार से ऑनलाइन बातचीत
- शैक्षणिक वीडियो देखना
इस तरह के कंटेंट का प्रभाव, बिना उद्देश्य के लगातार सोशल मीडिया स्क्रॉल करने या घंटों गेम खेलने से अलग हो सकता है। इसलिए स्क्रीन पर बिताए गए समय के साथसाथ उसके उपयोग का उद्देश्य भी मायने रखता है।
मातापिता क्या करें?
विशेषज्ञों की सलाह है कि बच्चों का स्क्रीन टाइम पूरी तरह बंद करने के बजाय संतुलित डिजिटल आदतें विकसित करें। इसके लिए एक रूटीन सेट करें।
- स्क्रीन टाइम की समयसीमा तय करें।
- बच्चे क्या देख रहे हैं, इस पर ध्यान दें।
- आउटडोर खेल और शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा दें।
- परिवार के साथ स्क्रीनफ्री समय बिताएं।
- सोने से पहले मोबाइल और टैबलेट का उपयोग न करें।
- स्क्रीन टाइम को कम करने के लिए चाइल्ड लॉक का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।


