High Court Hearing In UPSSSC Junior Assistant Case: इलाहाबाद हाईकोर्ट में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की जूनियर असिस्टेंट भर्ती परीक्षा से जुड़े विवादित प्रश्नों के मामले में सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम ने स्वयं को मामले की सुनवाई से अलग कर लिया है। इससे पहले भी कोडीनियुक्त कफ सिरप मामले की सुनवाई से अलग होने के बाद यह दूसरा महत्वपूर्ण मामला है, जिसमें न्यायमूर्ति ने स्वयं को अलग किया है। हालांकि, इस बार उन्होंने ऐसा क्यों किया, इसका कारण न्यायालय की ओर से सार्वजनिक नहीं किया गया है।

न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम ने 31 जुलाई को आदेश पारित करते हुए कहा कि यह मामला ऐसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए, जिसके सदस्य वह स्वयं न हों। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश से नामांकन प्राप्त होने पर मामले को 6 अगस्त को नई पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया है।
तीन विवादित प्रश्नों को लेकर दाखिल हुई है याचिका
मामला उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित जूनियर असिस्टेंट भर्ती परीक्षा के 3,284 पदों से जुड़ा है। अभ्यर्थी अविनाश कुमार समेत 179 अन्य उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आयोग की संशोधित उत्तर कुंजी को चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि आयोग ने तीन प्रश्नों के उत्तर बिना पर्याप्त और प्रमाणिक आधार के बदल दिए, जिससे बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के परिणाम प्रभावित हुए।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता संजय यादव ने अदालत को बताया कि आयोग ने 2 फरवरी को प्रोविजनल उत्तर कुंजी जारी की थी, जिसमें संबंधित प्रश्नों के उत्तर सही माने गए थे। बाद में संशोधित उत्तर कुंजी जारी कर उन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर बदल दिए गए, जबकि प्रमाणिक पुस्तकों और उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार पहले दिए गए उत्तर ही सही थे।
31 जुलाई तक मांगा गया था आयोग से जवाब
इस मामले में ने पहले आयोग को विवादित प्रश्नों पर 31 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। हालांकि, अब न्यायमूर्ति के स्वयं को अलग करने के बाद मामले की सुनवाई नई पीठ करेगी। ऐसे में अभ्यर्थियों की निगाहें 6 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले 30 जुलाई को न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने कोडीनियुक्त कफ सिरप मामले में एक पक्षकार द्वारा न्यायाधीश से संपर्क करने की कोशिश का संज्ञान लेते हुए स्वयं को सुनवाई से अलग कर लिया था। उस मामले में अदालत ने इसे न्यायिक व्यवस्था के लिए गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताते हुए कड़ी टिप्पणी भी की थी। अब मामले में न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम के स्वयं को अलग करने से इस प्रकरण ने भी नया मोड़ ले लिया है।



